ऊंच-नीच का कथन ही नीचता है क्योंकि सम्पूर्ण संसार पंचमहाभूतों अर्थात पवन, जल, मिट्टी, इत्यादि से बनता है उनका स्रस्टा ब्रम्हा है - कबीर ग्रंथावली, पद 51, पृ. 81 #संत_कबीर_दास#SantKabirDas
संत कबीरदास न जन्म से ऊंच-नीच माने जाने वाली परंपरा पर प्रहार किया और इसका उपहास भी उड़ाया। सभी मनुष्यों के जन्म की विधि एक ही है, चाहे वे किसी भी वर्ण के क्यों न हों। #संत_कबीर_दास#SantKabirDas
छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोगों का हृदय जीत लिया था। वे जोखिम उठाने और उसके परिणामों का सामना करने में सतर्क और तत्पर थे। उन्होंने अपने साथियों के साथ गुप्त मंत्रणायें की और अपनी मातृभूमि को मुस्लिम नियंत्रण से मुक्त कराने एवं हिंदुओं के उत्पीड़न को समाप्त करने हेतु गं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज को राष्ट्रपुरुष के रूप में स्वीकार कर उनके गुणों को अंगीकृत किया था; अपितु वे स्वयं भी उसी उच्च ध्येयवाद से प्रेरित होकर यश की ओर समाज को ले जाने वाले महापुरुषों की मालिका के एक मणि थे।
Shivaji broke shackles, both mental and physical, and instilled new vigour among all countrymen. He established a glorious polity, led it towards victory and spread nationalism all around."
– Dr Mohan Bhagwat, Sarsanghchalak #हिन्दू_साम्राज्य_दिवस#HinduSamrajyaDiwas
"The vision, thoughts and administrative acumen of Shivaji Maharaj have inspired many generations of our countrymen. Even during present times the thoughts of Shivaji is worth emulating for each one of us."- Dr. Mohan BhagwatSarsanghchalak #हिन्दू_साम्राज्य_दिवस#HinduSamrajyaDiw
छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस्लामी आक्रांताओं के अत्याचारों से शिथिल हो चुके भारतीय समाज में एक नई चेतना और जागृति का संगठित प्रयास करते हुए उसे पुनर्जीवित किया। #हिन्दू_साम्राज्य_दिवस#HinduSamrajyaDiwas
दुनिया भर के कुछ देशों में, GenZ पीढ़ी ने विरोध प्रदर्शन किए और सड़कों पर उतरे। लेकिन, भारत में GenZ का परम विश्वास है। उन्हें देश और लोकतंत्र पर पूरा विश्वास है। यह पीढ़ी आशावादी है और लगातार भारत के विकास के बारे में सोचती है। उनका मानना है कि कोई भी मुद्दा शांति से हल किया
स्वदेशी सोच, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संगम।
जलगांव में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग (प्रथम) में स्वयंसेवकों ने कम खर्च वाले पर्यावरण अनुकूल चूल्हे के माध्यम से ईंधन बचत का अभिनव उदाहरण प्रस्तुत किया। कपास, तुअर के सूखे पौधों और गोबर से बने ‘वुड ब्लॉक्स’ के उपयोग
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित- जनजाति सांस्कृतिक समागम 2026 में देशभर की 550 से अधिक जनजातीय समुदायों ने अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत का भव्य प्रदर्शन किया। इस महाकुंभ में 1.5 लाख से अधिक जनजातीय भाई-बहन, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्र हुए।
पूजनीय बालासाहेब देवरस जी कहा करते थे कि यशवंतराव केलकर जी डॉ. हेडगेवार के कुलोत्पन्न हैं - माननीय श्री दत्तात्रेय होसबाले जी, सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
यशवंतराव केलकर जी ने टीम वर्क, समय पालन, सादगी, संसाधनों के सदुपयोग एवं आत्मीय कार्यपद्धति के माध्यम से संगठन जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया। वे बिना किसी ईर्ष्या-द्वेष के सभी को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व थे। उनका जीवन कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का अखंड स्रोत है
हिन्दव: सोदरा: सर्वे- यह केवल एक मंत्र नहीं, हमारे समाज का आधार है। भारत के 'स्व' को पहचानने का अर्थ है- प्रत्येक व्यक्ति में उसी चैतन्य को देखना जो हमारे भीतर है। आइए, 'पंच परिवर्तन' की इस कड़ी में हम भारत के ‘स्व’ के स्वाभाविक स्वरूप ‘समरसता’ को जानेंगे।