“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
हर पेपर लीक सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं बिगाड़ता, बल्कि लाखों युवाओं की उम्मीदें तोड़ देता है। फिर भी सरकार का रवैया ऐसा है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
152 पेपर लीक और 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित होने के बावजूद जवाबदेही शून्य है। न इस्तीफा, न सख्त कार्रवाई, न कोई जवाब।
आज हालात ऐसे हैं कि पेपर लीक कराने वाले बेखौफ हैं, लेकिन अपने अधिकारों की बात करने वाले छात्र पुलिस के निशाने पर हैं। यही इस सरकार की प्राथमिकता बन चुकी है।
He is not a criminal. Why did you drag him away hiding behind sheets?
He didn’t want to go to the hospital. He wanted to join the Parliament march. But what these police have done- he was not a criminal. The way they took him away hidden under sheets- if you were so concerned about his health, you should have taken him with respect.
In every state, in every district, set up a Jantar Mantar! And protest there just like it has been going on here for a month.
CJP Founder Abhijeet Dipke’s video message after he was let go by the Police - once the Police had successfully kidnapped Sonam Wangchuk from Jantar Mantar.
He has been beaten up by the Police. CJP protesters have been lathi charged badly at Jantar Mantar.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को सादा कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार ह
लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को सादा कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के साथ भी यही हुआ। देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया। अब सोनम वांगचुक जी के सत्याग्रह के साथ भी वही व्यवहार किया जा रहा है।क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया?
हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक जी को उत्तम स्वास्थ्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करे।
#SonamWangchuk
छात्रों की गूंज कार्यक्रम के समापन के बाद लौटते समय, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून–ऋषिकेश हाईवे के 7 मोड़ पर पेड़ों की कटाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों की चिंताओं को सुनने के लिए अपने काफिले को रोक दिया।
Bandra Youth Congress team gathered nr Khar Road Stan lst evening to pay tribute to the innocent lives lost in d cowardly Pahalgam attack on 22 Apr 2025.
V bow 2 D martyrs. V stand wid families
Their sacrifice will nt go in vain our F8 agnst terrorism will only grw stronger
भारत माता की जय।
भारत की पहचान केवल एक राष्ट्र की नहीं, बल्कि विश्व में शांति के सेतु की रही है—कोरिया से कांगो तक, स्वेज से श्रीलंका तक भूतकाल उत्पन्न हुए युद्धों में समझौता एवं शांति करने में भारतवर्ष की महान भूमिका रही है। जिस पाकिस्तान को डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने हमारे सैकड़ो डिप्लोमेट्स ने विश्व एक आतंकी मुल्क साबित कर के अलग थलग किया था, वो पाकिस्तान आज विश्व शांति को दूत बना हुआ है। भारत की विदेश नीति के लिए इससे बुरा समय नहीं हो सकता।
अपनी आजादी के बाद से भारत की विश्व शांति को स्थापित करने जो भूमिका रही है वो निम्नलिखित है।
भारत: विश्व में शांति का सेतु
1950–53 | कोरिया युद्ध (North Korea – South Korea)
भारत ने युद्धबंदियों के मुद्दे पर Neutral Nations Repatriation Commission की अध्यक्षता की और युद्धविराम प्रक्रिया को संभव बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई।
1954 | इंडो-चीन संकट (Vietnam, Laos, Cambodia)
भारत ने International Control Commission का नेतृत्व किया, जिसने फ्रांस और वियतनाम के संघर्ष के बाद शांति समझौते के पालन की निगरानी की।
1956 | स्वेज संकट (Egypt – Britain – France – Israel)
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में सक्रिय कूटनीति से युद्धविराम का समर्थन किया और UN Peacekeeping Force में सैनिक भेजकर संकट शांत करने में योगदान दिया।
1960–64 | कांगो संकट
अफ्रीका में गृहयुद्ध और विदेशी हस्तक्षेप को रोकने के लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र मिशन में बड़ी सैन्य टुकड़ी भेजी और स्थिरता बहाल करने में मदद की।
1987–90 | श्रीलंका संघर्ष (Sri Lanka Civil War)
भारत ने Indo-Sri Lanka Accord (1987) के माध्यम से तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच शांति स्थापित करने का प्रयास किया और IPKF मिशन भेजा।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (Africa & Asia)
भारत दुनिया के सबसे बड़े UN Peacekeeping contributors में रहा है —
कांगो, सूडान, लेबनान, सिएरा लियोन, दक्षिण सूडान आदि में भारतीय सैनिकों ने शांति बनाए रखने में भूमिका निभाई।
जय हिंद।