बरेली में कांवड़िए गैर परंपरागत जुलूस निकाल रहे थे। पुलिस के समझने पर भी नहीं माने। भीड़ में कुछ लोग दारू के नशे में थे। कुछ के पास कट्टा वगैरह भी था। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने हल्का लाठीचार्ज करके भीड़ को हटाया।
घर पहुंचते, इससे पहले प्रभाकर का ट्रांसफर हो चुका था। 10 साल में 21 बार ट्रांसफर हो चुका है। खबरें हैं कि एसएसपी चौधरी सख्त मिज़ाज अधिकारी हैं। करप्शन के मामलों में पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ भी खूब एक्शन लिए हैं।
ज़ाहिर है, एक जगह रहने दिया जायेगा, तो करप्शन और बदमाशियों से फ़ायदा पाने वालों का नुकसान होगा। इसलिए, सरकार इनको एक जगह रहने नहीं देती। आदित्यनाथ का लॉ एंड ऑर्डर!!!
#PrabhakarChoudhary #Bareilly
ये महानुभाव अपने खुद के गांव में स्कूल नहीं बना सके लेकिन बागेश्वर में कई खदानों की खोज कर गए उत्तराखंड छोड़ने से पहले। अब फिर वापस आ रहे हैं तो जाने क्या खोजेंगे इस बार।
ट्वीट में प्रक्षिशित डॉक्टरों के दिये जवाब पढ़ें और समझें कि कैसे इन जैसे जाहिल भ्रामक बातें फैला कर डर का माहौल बनाते हैं। इनके फॉलोवर्स की संख्या के आधार पर इनपर रासुका लगानी चाहिए।
@OfficeOf_MM@mansukhmandviya
@sanjaypandey@myntra@MyntraSupport Online shopping के चक्कर में स्थानीय दुकानदारों को उपेक्षित किया जाता है। इन MNC सौदागरों को छोड़ अपने नजदीकी दुकानदार से सामान खरीदें। समझें कि कोई भी अपनी जेब से डिस्काउंट नहीं देता। जब सामान खरीद से कम में बिकता दिखे तो या तो वो नकली है या फिर चोरी का।
पिछले कुछ दिनों से भूकंप के घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसका एक बड़ा कारण पहाड़ों में पेड़ काटने और खनन से हो रहा नुकसान है। एक ओर इन विषयों पर सरकार को सोचना होगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग पर्यावरण को बचाने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। प्लास्टिक का उपयोग बिल्कुल बंद करें 🙏
@RahulMawri@kanda_samuh@BJP4UK@narendramodi@PMOIndia हमें एम्स भले न दें... ढंग के PHC तो दें!!! पहाड़ी भी इंसान हैं। पहाड़ियों को बीमारियां कम होती थी लेकिन अब वो भी नहीं रहा। जब जंगल छीन लिए गए, हवा प्रदूषित जार दी गई, खेती कुछ बची नहीं, ढोर डंगर के लिए घास काटने पे पुलिस केस लगाने लगी। अब सेहत अच्छी कैसे रहे??
@sanjaypandey@kanda_samuh@BJP4UK@narendramodi@PMOIndia क्योंकि सरकार को लगता है सिर्फ मैदानी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होनी चाहिए इसीलिए दोनो एम्स मैदानी क्षेत्रों में खोले गए हैं बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं है पर्वतीय क्षेत्रों में किंतु दून में बैठे लोगो को सब बढ़िया दिखता है