एक मुस्लिम जज संविधान के आड़ में अपना मकसद
नहीं भूली और 14 हिंदुओं को उम्र कैद की सजा..
आतंकवादी देशद्रोही के लिए रात को 2 बजे कोर्ट के
दरवाजे खुलते हे तो हमारे गौरक्षकों के लिए क्यों नहीं
हिंदुओं एक हो जाओ दिखाओ अपनी ताकत 🔥💪
सावधान हिन्दुओं 🚨
ये राक्षसों की भीड़ मुंबई बांद्रा से भगाये जाने के बाद रेलों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में जा रही है
वीडियो को Repost कर सभी तक पंहुचायें..
और यदि ये जाहिल दरिंदो की फौज आपको अपने आसपास कहीं दिखे तो नजदीकी पुलिस
को सूचित करें... ✍️
धन्यवाद
संघर्ष करो तो ऐसा...
सन्_2010 में.....
अमित शाह को एक फर्जी एनकाउंटर मे गुजरात से तड़ीपार किया गया था,
उस समय सोनिया गाँधी बेहद खुश थी .......
चर्चा मे थी कि इंदिरा गाँधी से भी बड़ी लौहे की लुगाई बनेगी एक दिन.....
दूसरा मुलायम सिंह यादव खुश था और बड़े बड़े बयान दे रहा था........
लेकिन बस चार साल मे दोनों की
"ऊपर की हूं और निचे की पूं" बंद होने वाली थी,
अमित शाह दिल्ली आये
फिर उत्तरप्रदेश के प्रभारी बने
और 2014 के चुनाव मे समाजवादी गुंडों का सफाया कर दिया साथ ही सोनिया के बच्चे को प्रधानमंत्री बनने मे सदा के लिए ग्रहण लगा दिया......
इसे कहते है कि एक कदम पीछे खींचो तो ढाई कदम आगे बढ़ जाना,
2014 मे भारत मे सीमित स्टार्टअप थे
मगर अब विश्व के तीसरे सबसे अधिक स्टार्टअप भारत मे है!
2014 मे भारत दुनिया की 11 वें नम्बर की अर्थव्यवस्था थी......आज चौथे नम्बर की अर्थव्यवस्था और तीसरे नम्बर पर आने को है....
साथ ही भारतीय सेना को विश्व की तीसरे नम्बर की सेना आंका गया अभी पिछले महीने हुए वैश्विक आंकलन में..
2014 मे बीजेपी भी एक प्रकार का स्टार्टअप ही थी।
अमित शाह ने बीजेपी की कमान 2014 मे संभाली थी!!
नाम के अध्यक्ष थे असल मे वे बीजेपी के CEO थे और आज भी डायरेक्टर के पद पर तो बैठे है।
वे अमित शाह ही थे जिन्होंने राजनीति मे पद अनुक्रम की व्यवस्था स्थापित की, एक अधिकारी लोकसभा देखता है उसके अधीन कई विधानसभा अधिकारी आते है।
ये काफी हद तक RSS के ही सिस्टम जैसा है, भाजपा अध्यक्ष किसी भी नेता से सीधे सम्पर्क करके हालचाल पूछ सकता है।
राज्य का मुख्यमंत्री फालतू की बयानबाजी नहीं कर सकता, ना ही राष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी देकर संतुलन को बिगाड़ सकता है।
ये व्यवस्था कॉर्पोरेट वाली है जिस वजह से बहुराष्ट्रीय कंपनीया शताब्दी तक चलती रहती है।
अमित शाह के गृहमंत्री बनने के बाद सिर्फ एक शाहीन बाग़ जैसा दंगा हुआ है उसके बाद पूर्ण शांति है।
घुसपैठ का मुद्दा सिर्फ तब तक बचा है ज़ब तक ममता की सत्ता खत्म नहीं होती, कश्मीर और अयोध्या सुलझ चुके, नक्सलवाद भी लग रहा है 2026 से पहले ही खत्म हो जायेगा।
ऐसा नहीं है कि उनके आने से बीजेपी कभी नहीं हारी मगर उसका अस्तित्व कही खत्म नहीं हुआ,
कांग्रेस 1967 मे तमिलनाडु, 1990 मे उप्र बिहार, 1977 मे बंगाल, 1995 मे गुजरात, 2003 मे मध्यप्रदेश और 2014 मे महाराष्ट्र और हरियाणा जो हारी जिसकी आज तक वापस नहीं लौटी और कई जगह तो इन्होने हराने वालो से ही गठबंधन करके आत्मसमर्पण कर दिया।
लेकिन बीजेपी ने उत्तरप्रदेश और दिल्ली को दो दशक बाद वापस हासिल किया।
महाराष्ट्र, हरियाणा और उड़ीसा मे पहली बार सत्ता मे आयी जिन राज्यों मे थी उन्हें वापस प्राप्त किया।
आज बीजेपी छोटे भाई के रूप मे सिर्फ वही गठबंधन मे है जहाँ उसका आधार बहुत कम है, लेकिन जैसे जैसे आधार बढेगा वह सत्तारूढ़ अवश्य होंगी।
अमित शाह सिर्फ नेता नहीं, एक रणनीतिकार हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति की पूरी संरचना बदल दी।
गुजरात से लेकर दिल्ली तक का उनका सफर दिखाता है कि राजनीति सिर्फ भाषण से नहीं, संगठन से जीती जाती है।
आज भाजपा का जो अनुशासन और मैकेनिज़्म है, वो उन्हीं की देन है।
सच्चे अर्थों में
“Modern Chanakya” 👑
ये तो अमित शाह के युग के आपने सिर्फ 10 साल देखे,
मोदीजी 2029 या 2034 मे चले ही जायेंगे मगर अमित शाह अभी यही है।
इनके मार्गदर्शन मे भी भाजपा को बहुत कुछ करना है
कांग्रेस रूपी मुग़ल सल्तनत को समाप्त करने वाले हमारे अमित भाई
जय श्री राम 🚩
@AmitShah@HMOIndia@AmitShahOffice@PMOIndia
बस judiciary को जरा टाइट करें ताकि न्याय करना काम है वो SA ले राजनीति करते है ....और देश द्रोही यों के प्यादे हैं!