महाराजा सूरजमल सिर्फ भरतपुर के नहीं, पूरे भारत के स्वाभिमान थे। सरकार (NCERT) द्वारा प्रकाशित स्कूली बच्चों की इतिहास की किताब (2025 संस्करण) में सन 1759 के इस नक्शे में भरतपुर रियासत का नामोनिशान मिटा दिया गया है और भरतपुर समेत आज के पूरे हरियाणा को मराठा साम्राज्य के अंतर्गत दिखाया गया है जो सरासर झूठ है - सच्चाई ये है की हरियाणा कभी भी मराठा साम्राज्य के तहत नहीं रहा और 1759 में भरतपुर जाट रियासत थी। 1755-1763 तक महान् योद्धा महाराजा सूरजमल भरतपुर रियासत के राजा थे।
भरतपुर साम्राज्य को NCERT के नक्शे से गायब करना - ये इतिहास के साथ अन्याय है या किसी षड्यंत्र के तहत इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। जो स्वीकार्य नहीं।
सब जानते है पानीपत की तीसरी लड़ाई 1761 में अहमद शाह अब्दाली के साथ हुई थी जिसमे महाराज सूरजमल मराठाओं के साथ थे। युद्ध में जब सदाशिवराव भाऊ जो मराठा सेनापति थे, हार गए तब हरियाणा के लोगों ने मराठों की मदद की और भाऊ को शरण दी। लड़ाई के बाद भाऊ हरियाणा के सांघी गांव में अज्ञातवास में रहे। उनका मक़बरा आज भी वहाँ मौजूद है, जिसे भाऊ का मक़बरा कहा जाता है। महाराजा सूरजमल ने भी इस लड़ाई के बाद मराठों को शरण दी, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ थीं। उन्हें सुरक्षा देकर बचाने का काम किया।
1948 में तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल और चौ. रणबीर सिंह हुड्डा जी की उपस्थिति में भरतपुर महाराजा बृजेंद्र सिंह ने इस शर्त पर अपनी रियासत का भारत में विलय कराया कि भरतपुर उत्तरप्रदेश की बजाय राजस्थान में मिलाया जाएगा।
इतिहास से छेड़खानी की जा रही है। सरकार तुरंत इस नक्शे को ठीक कराए। @dpradhanbjp
#सही_इतिहास
दिल्ली मार्च में हरियाणा पुलिस द्वारा घायल किए गए दस किसानों को हॉस्पिटल भेजा गया है, घायलों की संख्या ज्यादा है। जत्था वापस बुला लिया गया है, थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
अभीदो ही जत्थे आगे आए है, पचास जत्थों की तो लिस्ट तैयार है। देखना है जोर कितना बाजू ए कातिल में है।
ये देखना बहुत रोचक है की सत्ता महिलाओं से किस तरह डरती है। इतना की वो किसी भी फील्ड में हो उनको पूरी बेशर्मी से टारगेट करती है। परसों और आज किसानों के दिल्ली मार्च में हरियाणा पुलिस ने महिला पत्रकारों को खास निशाना बनाया है। आप खुद इन विडियोज को देखिए। क्या कहेंगे आप?
*चौधरी कुम्भाराम आर्य उन जननायकों में से थे जिन्होने जिंदगी भर अन्याय, शोषण और अत्याचार के विरुद्ध तथा गरीब व किसानों के हितों के लिए संघर्ष किया। जागीरदारी उन्मूलन, सामंतवादी डाकू गिरोह के खिलाफ लङना,व उनके अनेकों ऐसे योगदानों के लिए उनके सम्मान में स्मृति व्याख्यान रखा है।
Hello,everyone
Agrarian and Rural Research Collective(ARRC) invites you to join a Discussion on
"The Question of Representation for the Backward Classes in India’s Polity: Evolution of Chaudhary Charan Singh’s Stance on Reservations "
#chaudharycharansingh#OBCrepresentation