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हुलिया देख के हुनर का अंदाज मत लगाना
ये है UP देवरिया की पूनम देवी
यूट्यूब पर मैथ्स और फिज़िक्स पढ़ाती है (60K SUBS)
साधारण बोर्ड , बिना मेकअप, साधारण कपड़े पहनकर पढ़ाती है
यहा कंट्रोवर्सी नहीं , केवल पढ़ाई होती है
शिक्षक फैजल खान जेसे नहीं...पूनम देवी जेसे होते है
विवेकी बनें
किसी भी वस्तु अथवा पदार्थ के उपयोग में विवेक की अहम भूमिका होती है। विष की अल्प मात्रा भी दवा का काम करती है और दवा की अत्यधिक मात्रा भी विष बन जाती है। विवेक से, संयम से जगत का भोग किया जाये तो कहीं समस्या नहीं है। पदार्थों में समस्या नहीं है, हमारे उपयोग करने में समस्या है। संसार का विरोध करके कोई इससे मुक्त नहीं हुआ, बोध से ही इससे ज्ञानीजनों ने पार पाया है।
संसार को छोड़ना नहीं, बस समझना है। परमात्मा ने पेड़-पौधे, फल-फूल, नदी - वन, पर्वत - झरने और न जाने क्या-क्या हमारे लिए बनाया है। अस्तित्व में निरर्थक कुछ भी नहीं है। यहाँ प्रत्येक वस्तु का अपना महत्व है बस कब, कैसे, कहाँ, क्यों और किस निमित्त उसका उपयोग करना है, इतना विवेक जागृत हो जाए। विवेकपूर्वक भोग करना ही संसार के अनेक रोगों से बच जाना भी है।
जय श्री राधे कृष्ण
أستاذة في جامعة ستانفورد تقضي 20 عام في دراسة سبب امتلاك بعض الأشخاص حظ أكبر.
استنتاجها:
الحظ ليس صدفة، إنه مثل الريح: يجب أن نضع له شراعًا.
إذا أردت أن أكون أكثر حظ، سأفعل هذه الأشياء السبع:
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200 ज्योतिषीय सूत्र
लग्न जीवन का आधार है।
लग्नेश की स्थिति जीवन की दिशा बताती है।
बल��ान लग्न व्यक्ति को संघर्षों में विजयी बनाता है।
सूर्य आत्मा का कारक है।
चंद्रमा मन का कारक है।
मंगल साहस का कारक है।
बुध बुद्धि का कारक है।
गुरु ज्ञान का कारक है।
शुक्र सुख का कारक है।
शनि कर्म का कारक है।
राहु महत्वाकांक्षा बढ़ाता है।
केतु वैराग्य देता है।
प्रथम भाव शरीर का ��ूचक है।
द्वितीय भाव धन का सूचक है।
तृतीय भाव पराक्रम का सूचक है।
चतुर्थ भाव माता का सूचक है।
पंचम भाव संतान का सूचक है।
षष्ठ भाव रोग का सूचक है।
सप्तम भाव विवाह का सूचक है।
अष्टम भाव आयु का सूचक है।
नवम भाव भाग्य का सूचक है।
दशम भाव कर्म का सूचक है।
एकादश भाव लाभ का सूचक है।
द्वादश भाव व्यय का सूचक है।
गुरु की दृष्टि शुभता बढ़ाती है।
शनि विलंब देता है पर वंचित नहीं करता।
राहु अचानक लाभ देता है।
केतु अचानक हानि भी दे सकता है।
चंद्रमा मन की स्थिरता बताता है।
सूर्य पिता का कारक है।
चंद्रमा माता का कारक है।
मंगल भाई का कारक है।
गुरु संतान का कारक है।
शुक्र पत्नी का कारक है।
शनि सेवकों का कारक है।
बुध व्यापार का कारक है।
गुरु धर्म का कारक है।
शुक्र कला का कारक है।
मंगल भूमि का कारक है।
शनि श्रम का कारक है।
उच्च ग्रह बलवान फल देते हैं।
नीच ग्रह संघर्ष करवाते हैं।
स्वराशि ग्रह स्थ���र फल देते हैं।
मित्र राशि शुभ फल देती है।
शत्रु राशि फल घटाती है।
वक्री ग्रह विशेष परिणाम देते हैं।
अस्त ग्रह शक्ति खो देता है।
पाप ग्रह उपचय भाव में अच्छे माने जाते हैं।
शुभ ग्रह केन्द्र में शुभ फल देते हैं।
त्रिकोण भाव भाग्यवर्धक होते हैं।
पंचम और नवम भाव लक्ष्मी स्थान हैं।
दशम भाव राजयोग का आधार है।
नवमेश और दशमेश का संबंध राजयोग बनाता है।
केन्द्र और त्रिकोण स्वामी का संबंध शुभ होता है।
लग्नेश निर्बल हो तो संघर्ष बढ़ता है।
चंद्रमा निर्बल हो तो मानसिक तनाव बढ़ता है।
सूर्य निर्बल हो तो आत्मविश्वास घटता है।
मंगल निर्बल हो तो साहस घटता है।
बुध निर्बल हो तो निर्णय क्षमता प्रभावित होती है।
गुरु निर्���ल हो तो भाग्य कमजोर होता है।
शुक्र निर्बल हो तो वैवाहिक सुख प्रभावित होता है।
शनि निर्बल हो तो कर्म में बाधा आती है।
राहु विदेश का कारक है।
केतु मोक्ष का कारक है।
अष्टम भाव गुप्त विद्या का भाव है।
नवम भाव गुरु कृपा का भाव है।
दशम भाव प्रतिष्ठा देता है।
एकादश भाव इच्छापूर्ति करता है।
द्वादश भाव आध्यात्मिकता देता है।
गुरु और चंद्रमा का योग गजकेसरी योग कहलाता है।
मंगल और चंद्रमा का योग लक्ष्मी योग देता है।
बुध और सूर्य का योग बुधादित्य योग है।
पंचमहापुरुष योग जीवन बदल सकते हैं।
हंस योग गुरु से बनता है।
मालव्य योग शुक्र से बनता है।
रुचक योग मंगल से बनता है।
भद्र योग बुध से बनता है।
शश योग शनि से बनता है।
कालसर्प योग जीवन में उतार-च��़ाव देता है।
पितृदोष पूर्वजों से जुड़ा माना जाता है।
चंद्रमा पर राहु ग्रहण योग बनाता है।
सूर्य पर राहु ग्रहण योग बनाता है।
राहु भ्रम उत्पन्न करता है।
केतु अंतर्ज्ञान बढ़ाता है।
शनि न्यायप्रिय ग्रह है।
गुरु दया का प्रतीक है।
शुक्र प्रेम का प्रतीक है।
मंगल ऊर्जा का प्रतीक है।
बुध तर्क का प्रतीक है।
सूर्य नेतृत्व का प्रतीक है।
चंद्रमा संवेदनशीलता का प्रतीक है।
मजबूत नवम भाव भाग्यशाली बनाता है।
मजबूत दशम भाव करियर बनाता है।
मजबूत एकादश भाव लाभ बढ़ाता है।
मजबूत द्वितीय भाव धन बढ़ाता है।
मजबूत पंचम भाव विद्या बढ़ाता है।
मजबूत सप्तम भाव विवाह सुख देता है।
मजबूत चतुर्थ भाव संपत्ति देता है।
मजबूत तृतीय भाव साहस देता है।
मजबूत अष्टम भाव शोध क्षमता देता है।
ग्रह दशा घटनाओं का समय बताती है।
गोचर घटनाओं को सक्रिय करता है।
शनि की साढ़ेसाती आत्मनिरीक्षण का समय है।
ढैया अनुशासन सिखाती है।
गुरु गोचर विस्तार देता है।
शुक्र गोचर सुख देता है।
मंगल गोचर ऊर्जा देता है।
राहु गोचर अचानक परिवर्तन लाता है।
केतु गोचर विरक्ति देता है।
ग्रह कर्म के अनुसार फल देते हैं।
कर्म उपायों से श्रेष्ठ है।
माता-पिता का सम्मान ग्रहों को बल देता है।
गुरुजनों का सम्मान भाग्य बढ़ाता है।
दान ग्रह दोष कम करता है।
सेवा पुण्य बढ़ाती है।
सत्य ग्रहों को अनुकूल बनाता है।
संयम जीवन सुधारता है।
क्रोध मंगल को दूषित करता है
अहंकार सूर्य को कमजोर करता है
लोभ राहु को बढ़ाता है
संतोष शुक्र को मजबूत करता है
श्रद्धा गुरु को मजबूत करती है
अनुशासन शनि को प्रसन्न करता है
गणेश पूजा बुध को बल देती है।
शिव पूजा चंद्रमा को बल देती है
सूर्य अर्घ्य आत्मबल बढ़ाता है
हनुमान पूजा मंगल को बल देती है
विष्णु पूजा गुरु को बल देती है
लक्ष्मी पूजा शुक्र को बल देती है
शनि स्तोत्र शनि दोष कम करता है
दुर्गा पूजा राहु दोष कम करती है
गणपति उपासना केतु दोष कम करती है
आयुर्वेद में अलग-अलग प्रकार की हरिद्रा (हल्दी) का उल्लेख मिलता है, जिन्हें उनके गुण, प्रभाव और उपयोग के आधार पर जाना जाता है। सामान्य रूप से लोग पीली हल्दी, काली हल्दी, सफेद हल्दी, जंगली हल्दी और दारुहल्दी को “पंचम हल्दी” के रूप में बताते हैं।