*"लफ़्ज़" "आईने" हैं*
*मत इन्हें "उछाल" के चलो,*
*"अदब" की "राह" मिली है तो*
*"देखभाल" के चलो,*
*मिली है "ज़िन्दगी" तुम्हे*
*बस इसी "मकसद" से,*
*"सँभालो" "खुद" को और*
*"अपनों" को "सँभाल" के चलो।*
*🌷सदा उनके कर्जदार रहिये*
*जो आपके लिए खुद का*
*वक़्त नहीं देखता,,*
*और सदा ही उनके वफादार*
*रहिये जो व्यस्त होने के*
*बावजूद आपके लिए*
*वक़्त निकालते है*