मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी से OBC आरक्षण पर 5 स्पष्ट मांगें — अब जवाबदेही तय हो!
1. तत्काल विशेष विधानसभा सत्र बुलाएँ। OBC आरक्षण पर चर्चा के लिए तारीख घोषित करें और @drmohanoffice51 सरकार का स्पष्ट रुख सदन में दर्ज कराएँ।
2. 27% OBC आरक्षण पर समयबद्ध निर्णय लें। लागू करने में आ रही कानूनी बाधाओं, लंबित प्रकरणों और उनके समाधान पर सरकार लिखित स्थिति सार्वजनिक करे।
3. अध्यादेश पर स्पष्ट जवाब दें। सरकार बताए कि क्या वह अध्यादेश लाने को तैयार है। यदि नहीं, तो कानूनी कारण और वैकल्पिक कार्ययोजना सार्वजनिक करे।
4. संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल करें। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक एवं कानूनी परीक्षण कराकर केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजने की समयसीमा घोषित करें। यह भी स्पष्ट करें कि अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के अधीन होगा।
5. जवाबदेही की समयसीमा तय करें। सरकार प्रत्येक मांग पर लिखित जवाब, जिम्मेदार विभाग और कार्रवाई की समयसीमा सार्वजनिक करे तथा प्रगति रिपोर्ट सदन के पटल पर रखे।
@BJP4MP सरकार से सीधे सवाल:
- विशेष सत्र कब बुलाएँगे?
- 27% OBC आरक्षण पर ठोस निर्णय कब लेंगे?
- 9वीं अनुसूची के लिए केंद्र को प्रस्ताव कब भेजेंगे?
- यदि मांगें स्वीकार नहीं हैं, तो उसके कारण सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
OBC समाज को अब केवल आश्वासन नहीं, समयबद्ध कार्रवाई, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए?
सुबह के 4 बजे। जब दुनिया सो रही थी, तब अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में ले लिया गया।
उनका गुनाह? वे इंडिया गेट पर चुपचाप बैठे थे - बोझिल कंधों के साथ, बिना किसी हंगामे के और सिर्फ़ इतना माँग रहे थे कि CBI जाँच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए।
कल मैं और प्रियंका इन माता-पिता से मिले थे।
जिस जाँच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की जल्दी और सवाल पूछने वाले माँ-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
इस सरकार की पहचान यही है: पीड़ितों की आवाज़ दबा दो, सवाल करने वालों को हटा दो।
पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी।
कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी - जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।
#JusticeForAnkitaBhandari
OBC आरक्षण पर @drmohanoffice51 सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने से पीछे क्यों हट रही है?
जब @BJP4MP सरकार 27% OBC आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में मुख्य पक्षकार थी और उसने खुद पैरवी की, तो अब सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण के कानून का बचाव करने की जिम्मेदारी से पीछे क्यों हट रही है?
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, मेरी मांगें स्पष्ट हैं:
1️⃣ सरकार बताए कि 27% OBC आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील/SLP कब दाखिल होगी?
2️⃣ यदि अपील नहीं की जा रही, तो उसका कानूनी और प्रशासनिक कारण सार्वजनिक किया जाए।
3️⃣ अपील की समय-सीमा, जिम्मेदार विभाग और अब तक की कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
4️⃣ OBC युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता खत्म करने के लिए सरकार ठोस कार्ययोजना और समयबद्ध जवाब दे।
OBC समाज को सिर्फ आश्वासन नहीं, जवाबदेही और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कार्रवाई चाहिए।
मुख्यमंत्री जी, बताइए—27% आरक्षण के लिए सरकार की अगली कार्रवाई क्या है और कब होगी?
ओबीसी समाज को कमतर समझने वालों को तथ्यों के साथ जवाब देना जरूरी है!
इस इंटरव्यू को पूरा सुनिए और समझिए कि ओबीसी आरक्षण पर बहस करते समय किस तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। कभी आरक्षण की समीक्षा के नाम पर सवाल उठाए जाते हैं, तो कभी ओबीसी समाज की समझ और बुद्धिमत्ता को ही कमतर बताने वाली भाषा सामने आती है।
सवाल यह है कि क्या संवैधानिक अधिकारों पर बहस तथ्यों और कानून के आधार पर होगी, या किसी समाज को नीचा दिखाकर?
अगर ओबीसी आरक्षण की हर 10–11 साल में अनिवार्य समीक्षा का दावा किया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट संवैधानिक या कानूनी आधार भी बताया जाना चाहिए। अधूरी जानकारी, विरोधाभासी तर्क और समाज के प्रति अपमानजनक सोच किसी भी गंभीर कानूनी बहस का विकल्प नहीं हो सकते।
वकील होना बड़ी जिम्मेदारी है। पदवी से नहीं, बल्कि तथ्यों, संवैधानिक समझ और तर्कों की मजबूती से बात साबित होती है।
इसलिए इंटरव्यू को पूरा सुनिए, हर तर्क को परखिए और खुद तय कीजिए कि ओबीसी आरक्षण पर संवैधानिक तथ्यों की बात हो रही है या पूर्वाग्रह की।
ओबीसी समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई तथ्यों, कानून और लोकतांत्रिक तरीके से लड़ता रहेगा।
PM @narendramodi जी,
CM @DrMohanYadav51 जी —27% OBC आरक्षण पर जवाबदेही तय कीजिए!
1️⃣ सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नरसिम्हा जी द्वारा अंतरिम राहत/व्यवस्था के संदर्भ में उठाए गए मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध क्यों किया? उनके तर्कों और उपलब्ध वीडियो की निष्पक्ष समीक्षा हो।
2️⃣ मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह द्वारा हाईकोर्ट में पेश तथ्यों, आंकड़ों और कानूनी दलीलों की समीक्षा सार्वजनिक हो।
3️⃣ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर 27% OBC आरक्षण की कानूनी लड़ाई और आगे की कार्ययोजना पेश की जाए।
4️⃣ सुप्रीम कोर्ट में अपील/SLP दाखिल करने की समय-सीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
OBC युवाओं के भविष्य का सवाल है—बयान नहीं, जवाब और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए!
#OBCReservation #27PercentReservation
27% OBC आरक्षण पार्लियामेंट ने दिया था. OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर भी था. सुप्रीम कोर्ट ने बाद में क्रीमी लेयर जोड़ दिया था.
मध्यप्रदेश में नियम से 27% OBC आरक्षण मिलना चाहिए. यह मांग हमारी न्यायसंगत है. OBC की आबादी 50% से ज्यादा है.
मध्यप्रदेश में SC-ST की आबादी ज्यादा है इसलिए वहां SC-ST आरक्षण 36% है.
50% आरक्षण सीलिंग कैप के नाम पर OBC आरक्षण को 14% नही किया जा सकता. 10% EWS आरक्षण के कारण 50% आरक्षण सीलिंग पहले ही टूट चुकी है.
10% EWS आरक्षण को 4-5% कर दिया जाना चाहिए. जब हर समुदाय को उनकी आबादी के अनुपात में आधा आरक्षण मिल रहा है तो जिनकी आबादी ही 10% है उन्हें 10% आरक्षण क्यों ?
आरक्षण हमारा अधिकार है, कोई खैरात नहीं ⚖️
27% ओबीसी आरक्षण पर लगी रोक केवल एक प्रतिशत का मुद्दा नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य,उनके सपनों और उनके अधिकारों का सवाल है
आरक्षण हमारा अधिकार है, सामाजिक न्याय हमारा संकल्प है
जय संविधान
— ऋचा पटेल
प्रदेश अध्यक्ष, महिला मोर्चा
ओबीसी आरक्षण सिर्फ विशेष सत्र से ही लागू होगा बाकी कोई रास्ता नहीं है।
@DrMohanYadav51 जी आप विशेष सत्र भुलाओ और कानून बना के लागू कर दो।
@UmangSinghar जी नेता विपक्ष भी आपके साथ है वो आपका समर्थन करेंगे।।
#reservation_obc
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी, अब सुप्रीम कोर्ट–हाईकोर्ट के नाम पर केवल तारीखों और आश्वासनों का सिलसिला बंद कीजिए!
मध्यप्रदेश के OBC युवाओं को 27% आरक्षण के सवाल पर स्पष्ट जवाब चाहिए।
@narendramodi, @AmitShah,
@BjpBiplab, @GaneshSingh_in,
@Hkhandelwal1964 सरकार अपनी जिम्मेदारी तय करे और हर मांग पर समयबद्ध कार्रवाई का हिसाब दे।
हमारी 10 जवाबदेह मांगें:
1. विधानसभा का विशेष सत्र: 15 दिनों के भीतर विशेष सत्र बुलाने की तारीख घोषित करें और 27% OBC आरक्षण पर सरकार का लिखित पक्ष सदन में रखें।
2. 27% आरक्षण पर स्पष्ट निर्णय: आरक्षण की संवैधानिक बहाली के लिए प्रस्तावित विधायी कदम, कानूनी आधार और कार्रवाई की समय-सीमा सार्वजनिक करें।
3. सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई का हिसाब: अपील की वर्तमान स्थिति, दाखिल दस्तावेजों, कानूनी आधार और अगली कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करें। यदि अपील दाखिल नहीं हुई है, तो निर्णय की समय-सीमा बताएं।
4. 13% होल्ड पदों पर जवाब: भर्तीवार पदों, प्रभावित अभ्यर्थियों और न्यायालय के आदेश के अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करें। नियुक्तियों की प्रक्रिया के लिए लागू समय-सीमा स्पष्ट करें।
5. 9वीं अनुसूची पर औपचारिक पहल: 30 दिनों के भीतर विधिक राय लेकर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने अथवा प्रस्ताव भेजने में बाधा होने पर उसका लिखित कारण सार्वजनिक करें।
6. महाधिवक्ता और अधिकारियों की जवाबदेही: आरक्षण मामले की कानूनी तैयारी की स्वतंत्र विशेषज्ञ समीक्षा कराएं। प्रमाणित लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करें।
7. OBC आंकड़ों का सार्वजनिक विवरण: सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े उपलब्ध प्रमाणित आंकड़े तथा उनकी कमियों को सार्वजनिक करें।
8. जिम्मेदार अधिकारी तय करें: मुख्यमंत्री (CM Madhya Pradesh) कार्यालय एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जो सभी मांगों पर हुई कार्रवाई की निगरानी करे और नियमित प्रगति रिपोर्ट जारी करे।
9. केंद्र सरकार को पत्र और अनुवर्ती कार्रवाई: प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय विधि मंत्रालय को भेजे गए पत्र, प्रस्ताव और प्राप्त जवाब की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
10. जनता के सामने जवाबदेही: 15 दिनों के भीतर कार्ययोजना जारी करें और प्रत्येक 30 दिनों में प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करें। समय-सीमा पूरी न होने पर कारण और संशोधित समय-सीमा बताएं।
मुख्यमंत्री जी, सवाल साफ है: कौन जिम्मेदार है, क्या कार्रवाई होगी और कब तक होगी?
OBC युवाओं को केवल आश्वासन नहीं—लिखित निर्णय, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहिए।
27% आरक्षण की मांग हमारा मुद्दा है, युवाओं का भविष्य हमारा सवाल है और सरकार से जवाब मांगना हमारा अधिकार है।
— कमलेंद्र सिंह
राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य, OBC महासभा
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BJP ने OBC समाज के पीठ में छुरा घोंपा है! ओबीसी समाज इसके लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेगा!
: नेता प्रतिपक्ष श्री @UmangSinghar जी.
📍भोपाल | प्रेस कॉन्फ्रेंस
🚨 मध्यप्रदेश के OBC समाज के 27% आरक्षण पर भाजपा सरकार से पाँच सीधे सवाल!
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 , @BJP4MP, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और @BJP4India नेतृत्व जवाब दें!
9 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने OBC का 27% आरक्षण बढ़ाने वाले 2019 के संशोधन को निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियों का पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
अब सवाल यह है कि सत्ता में रहने के दौरान भाजपा सरकार ने इस मामले में क्या किया?
1️⃣ हाईकोर्ट में OBC समाज के पक्ष में पर्याप्त आंकड़े क्यों नहीं रखे गए?
OBC की वास्तविक आबादी, सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन, सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व और रिक्त पदों के प्रमाणित आंकड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। यदि आंकड़े अपर्याप्त थे, तो सरकार ने उन्हें समय रहते जुटाने के लिए क्या किया?
2️⃣ Youth for Equality की WP 18105/2021 और 87:13 का विवाद!
87:13 व्यवस्था न्यायालय द्वारा बनाया गया कोई सामान्य भर्ती फार्मूला नहीं था। राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2022 के आसपास इस संबंध में प्रशासनिक निर्देश अपनाए। इसके तहत 13% पद विवाद के समाधान तक रोके गए।
यदि सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया जारी रखना था, तो प्रभावित अभ्यर्थियों को वर्षों तक अनिश्चितता में क्यों रखा गया? अब हाईकोर्ट ने इन पदों को तीन महीने में भरने का निर्देश दिया है।
3️⃣ महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की समीक्षा कौन करेगा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पष्ट करें कि राज्य का पक्ष रखने के लिए कौन-सी कानूनी रणनीति अपनाई गई, कौन-से आंकड़े पेश किए गए और किन कमियों की ओर अदालत ने संकेत किया। यदि कानूनी तैयारी या सरकारी पक्ष प्रस्तुत करने में लापरवाही हुई, तो निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए।
4️⃣ नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल कहाँ है?
भाजपा सरकार बताए कि OBC आरक्षण की संवैधानिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष क्या प्रस्ताव रखा गया है। नौवीं अनुसूची में किसी कानून को शामिल करना अपने-आप न्यायिक समीक्षा से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। फिर भी सरकार इस विकल्प सहित सभी संवैधानिक उपायों पर अपना स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक करे।
5️⃣ OBC समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हवाला देकर उसके अधिकारों पर सवाल क्यों?
मुख्यमंत्री या मंत्री का OBC समुदाय से होना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि पूरे समुदाय का सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। सरकार को व्यक्तियों की राजनीतिक मौजूदगी के बजाय प्रमाणित सामाजिक और सेवा-संबंधी आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
भाजपा सरकार से हमारी स्पष्ट मांग
• 27% आरक्षण के मामले में प्रस्तुत सभी प्रमुख आंकड़े और कानूनी रणनीति सार्वजनिक की जाए।
• महाधिवक्ता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो।
• 13% रोके गए पदों पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समयबद्ध नियुक्तियाँ सुनिश्चित की जाएँ।
• OBC की आबादी, पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के विश्वसनीय आंकड़े जुटाए जाएँ।
• नौवीं अनुसूची सहित संवैधानिक विकल्पों पर केंद्र और राज्य सरकार अपना स्पष्ट रुख बताएँ।
मुख्यमंत्री जी, OBC समाज को केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
2019 में 27% आरक्षण का कानून बना। उसके बाद भाजपा भी सत्ता में रही। सात वर्षों तक चले विवाद के बाद आज लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल फिर खड़ा है।
अब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने से काम नहीं चलेगा। सरकार को बताना होगा कि OBC आरक्षण का प्रभावी बचाव करने के लिए क्या किया गया और आगे क्या किया जाएगा।
OBC समाज का सवाल है—हमारे अधिकारों के लिए ठोस तैयारी कब होगी और जवाबदेही कब तय होगी?
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OBC समाज के नेताओं को इससे सबक लेना चाहिए! 27% OBC आरक्षण हटाने को भाजपा अपनी जीत कह रही की और हमने OBC समाज को हरा दिया और आरक्षण को 14% कर दिया "द्वितीय स्वरूप"
आज समय की माँग है कि OBC समाज के सभी राजनीतिक दलों के नेता समाज के अधिकारों के लिए एकजुट हों। यदि वे समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें अपने पदों पर बने रहने के बजाय सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।
जिस तरह OBC आरक्षण के मुद्दे पर पिछड़े समाज के हित प्रभावित हुए हैं, उस पर पूरे देश की नजर है।
मध्य प्रदेश में OBC समाज की आबादी लगभग 60% होने का दावा किया जाता है, जबकि समाज को 27% आरक्षण देने की माँग लंबे समय से उठती रही है। लेकिन 27% आरक्षण के स्थान पर 14% आरक्षण तक सीमित रहने की स्थिति को मैं गलत और अन्यायपूर्ण मानता हूँ।
मेरा सवाल OBC समाज के सभी नेताओं से है:
जब समाज के अधिकारों की बात आती है, तो सभी नेता एक मंच पर आकर आवाज क्यों नहीं उठाते? आखिर कब तक समाज के नाम पर राजनीति होगी और समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा?
अब समय आ गया है कि OBC समाज के नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठें और अपने समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
समाज को केवल राजनीतिक वादे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की ठोस पैरवी चाहिए।
✊ OBC समाज की एकता ही उसके अधिकारों की मजबूत आवाज है।
— अपने विचारों के साथ, सामाजिक न्याय के पक्ष में
इस घटना ने मणिपुर की घटना की याद दिला दी. नारी सम्मान की बड़ी बड़ी बातें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी वंदन, आदि सब दिखावा साबित हुआ. किस तरह के यह गुन्डे एक लड़की को दौड़ाकर पीट रहे हैं. किसी भी सरकार को कभी घमंड नहीं पालना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में उसको भी एक दिन जाना है.जीवन और राजनीति में कुछ भी परमानेंट नहीं होता है. इन पर @DelhiPolice कड़ी कार्यवाही नहीं करती है तो माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश की माननीय राष्ट्रपति जी इस पर संज्ञान ले कर कार्यवाही कराएँ और एक बेटी को न्याय दिलायें.
दिल्ली पुलिस के सामने BJP-RSS के गुंडे प्रोटेस्टर्स को मार रहे हैं।
मोदी-शाह ने पूरे देश में गुंडाराज कायम कर दिया है।
वीडियो में दिख रहा है कि गुंडे एक लड़की को जमीन पर गिराकर मार रहे हैं और पुलिस तमाशा देख रही है।
मध्यप्रदेश @BJP4MP सरकार की कथित ‘बड़ी जीत’ आखिर किसके खिलाफ है—ओबीसी समाज के खिलाफ?
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर जवाबदेही तय करो!
@BJP4India सरकार मुर्दाबाद!
@DrMohanYadav51 मुर्दाबाद!
@narendramodi मुर्दाबाद!
@AmitShah मुर्दाबाद!
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह मुर्दाबाद
27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को जवाब देना चाहिए कि ओबीसी समाज को न्याय दिलाने के लिए सरकार ने अदालत में पर्याप्त आंकड़े और ठोस पक्ष क्यों नहीं रखे?
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो और जवाबदेही तय की जाए। यदि सरकार ओबीसी हितों के प्रति गंभीर है, तो उन्हें पद से हटाने की मांग पर भी स्पष्ट निर्णय ले।
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मूर्ख अकेले नहीं डूबता अपने साथ मालिक को भी ले डूबता है. अंजना ने मजीठिया से ये सवाल पूछकर भी यही किया है - अंततः फिर सिद्ध हुआ कि गंगाधर ही शक्तिमान है.