स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अली बंधुओं का इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में लिखा हुआ है। मौलाना शौकत अली और मौलाना मोहम्मद अली जौहर को अली बंधु कहा जाता है। उनकी माता जी नाम अबादी बानो बेगम था, जिन्हें प्यार से 'बी अम्मा' कहा जाता था। वो भी महान स्वतंत्रता सेनानी थीं। वो दिसंबर 1930 में प्रथम गोलमेज सम्मेलन में शिरकत करने गए थे। यहां उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दिया था।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने ब्रिटिश शासकों की आंखों में आंख डालकर कहा हमें सलाह/मश्विरों की ज़रूरत नहीं है, और ना ही इस बात की परवाह है कि आप हमारे लिये किस तरह का क़ानून तैयार करते हैं। हमें इंसानों की ज़रूरत है। काश! सारे इंग्लैंड में एक भी शख्स ऐसा होता जो इंसान कहलाने का हक़दार होता। मैं हिंदोस्तान को आज़ाद कराने के लिये लंदन आया हूं, और आज़ादी का परवाना लेकर वापस जाना चाहता हूं। मैं एक आज़ाद मुल्क में तो मरना पसंद करुंगा लेकिन ग़ुलाम मुल्क में वापस नहीं जाऊंगा। चार जनवरी 1931 को गोलमेज कांफ्रेंस की एक कमेटी के सामने बयान देते हुए मौलाना मोहम्मद अली जौहर की दिल की धड़कन बंद थम गई, और वे इस भारत को आज़ाद कराने के तमन्ना अपने सीने में लिये इस दुनिया से कूच कर गए।
ऐसा महान स्वतंत्रता सेनानी भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath की कुंठा से नहीं बच पाया। योगी आदित्यनाथ ने मौलाना जौहर को विभाजन के लिए ज़िम्मेदार बताया है। सोचिए! ऐसी घृणित मानसिकता इस देश को कहाँ ले जाकर दम लेगी। जो स्वतंत्रता सेनानी विभाजन से डेढ़ दशक से ज्यादा समय पहले दुनिया को अलविदा कह चुका हो, उस महान स्वतंत्रता सेनानी को आज़ादी के आठ दशक बीत जाने पर विभाजन का ज़िम्मेदार बताया जा रहा है।
यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नफ़रती कुंठा है, या विकृत मानसिकता कि मौलाना जौहर के चरित्र पर लांछन लगाते वक्त उनकी ज़ुबान तक नही लड़खड़ाई! क्या मदर ऑफ डेमोक्रेसी की न्यायपालिका महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में की गई इस बदज़ुबानी का स्वतः संज्ञान लेगी? इस मानसिक दिव्यांगता का कोई तो विरोध करे! इस देश का कोई संस्थान इस जहालत का संज्ञान लेकर यूपी के मुख्यमंत्री को नसीहत करते हुए कहेगा कि नफ़रत की सियासत में इतने भी अंधे ना बनो कि इस देश के नायकों के खिलाफ बदज़ुबानी करने लगो!
The brutality unleashed by the police on protesting students near Jantar Mantar is deeply disturbing. Yet, for many of us, it painfully revives the memories of an even darker chapter—the horrific assault on students at Jamia Millia Islamia and Aligarh Muslim University in December 2019.
Inside university campuses, students were chased, mercilessly beaten, and subjected to violence that seemed intended not merely to disperse a protest, but to break their bodies and spirits. Those haunting images remain etched in our collective memory.
To add to the injustice, the committee constituted to investigate the incident eventually gave the police a clean chit, leaving countless students and citizens feeling that accountability had once again been denied.
A democracy cannot thrive when students are treated as enemies for raising their voices. Campuses should be places of learning and debate—not sites of fear and brutality.
रामपुर के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी सपा सुप्रीमो @yadavakhilesh का ‘पैग़ाम’ लेकर जौहर विश्विद्यालय पहुंचे हैं। सवाल यह है कि लखनऊ से रामपुर की दूरी क्या इतना ज्यादा है कि सपा सुप्रीमो वहां खुद ना आकर अपना ‘डाकिया’ भेज रहे हैं।
ध्यान रहे जौहर विश्विद्यालय इस देश में लोकतंत्र की अवधि तय कर रहा है, अगर गिरा उसे दिया जाता है, तो उसे लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील समझिएगा। जौहर विश्विद्यालय को बचाने की लड़ाई ना तो संसद में भाषणबाज़ी करके लड़ी जाएगी, और ना ही लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करके। जौहर विश्विद्यालय को बचाने की लड़ाई रामपुर पहुंचकर जौहर विश्विद्यालय में खड़े होकर लड़ी जाएगी। क्या अखिलेश ऐसा करने के लिए तैयार हैं? क्या वो रामपुर जाने की घोषणा करने के लिए तैयार हैं?
जौहर विश्विद्यालय को गिराने के बहाने भाजपा चुनावी अभियान शुरू करना चाहती है, क्या अखिलेश जौहर विश्विद्यालय को गिरने से बचाकर अपने चुनावी अभियान की शुरूआत करने के लिए तैयार होंगे?
आईने में चेहरा देखने की अगर किसी को ज़रूरत है तो वो तुम्हें है। तुम देखो उसी चेहरे में तुम्हें बेग़ैरती और बेशर्मी भी नज़र आएगी। तुम क्या चाहती हो कि वो मुसलमान जिसके बार दादा परदादा इस मुल्क की आज़ादी के लिए लड़े यातनाएँ सही, जेल में रहे, फांसी पर लटके, उन मुसलमानों को तुम्हारी तरह उस गैंग की दलाली करनी चाहिए जिस गैंग ने अंग्रेज़ों से पेंशन पाईं? उन मुसलमानों को अंग्रेज़ों से पेंशन लेने वाले ‘वीरों’ का गैंग प्रताड़ित करता है तो मुसलमान शिकायत भी ना करें। सुनिए! मोहतरमा यह बात अपने ‘मालिकों’ को भी बता दीजिए कि दुनिया की कोई ताक़त उसे इसके मज़हबी फरीज़े अदा करने से नहीं रोक सकती, ना जंग, ना बंदिशें ना दक्षिणपंथ।
इस देश का मुसलमान खुद्दार है। वो तुम्हारी तरह खुदगर्ज नहीं है। वो नौकरी बचाने के लिए बुतपरस्ती का ढोंग नहीं करता। एक आम साधारण सा मुसलमान जिसे मालूम है कि उसकी धार्मिक पहचान के कारण उस पर हमला हो सकता है, उसकी जान जा सकती है, फिर भी वह अपनी पहचान के साथ रहता है, तुम्हारी तरह बुतपरस्त होने का ढोंग दिखावा नहीं करता। शिर्क नहीं करता, वह तौहीद पर अडिग है। जहां तक सवाल ईमान का है तो उस साधारण, कम पढ़े लिखे, मजदूर के सामने तुम्हारा ईमान राई के दाने के बराबर भी नहीं है।
अब यह कहकर कि “भारत में हो तो सुरक्षित हो” उस अपराध को सामान्य करने का षडयंत्र बिल्कुल मत कीजिए जो अपराध संघ परिवार और उसके अनुषांगिक संगठनों के उपद्रवी मुसलमानों के खिलाफ करते हैं। भारत भारतीय मुसलमान का देश है, उसी तरह भारत भारत में रहने वाले गैर मुसलमानों का देश है। जो भारत के नागरिक हैं, उनकी सुरक्षा सरकार की ज़िम्मेदारी है। यह कोई अहसान नहीं है, सरकार देश की संरक्षक है मालिक नहीं! लेकिन ये बातें उनकी समझ में आती हैं, जो हर तरह से ईमानदार हों। नागरिक कर्तव्यों के प्रति ईमानदार, अपने धर्म, अपने पेशे के प्रति ईमानदार हो। कुछ समझी! आई बड़ी मुसलमानों से शुक्राने की तवक्को रखने वाली। इतनी ही बड़ी ज्ञानी होती तो यह भी पता होता कि कुरान ने कहा है कि “हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करते रहो!” भारत का मुसलमान अल्लाह का शुक्रगुजार है कि भारत उसका देश ही नहीं बल्कि घर है। और उस “घर” पर जब-जब मुसीबत आई उसने जान की बाजी लगाई। उसे तुमसे या तुम्हारे ‘मालिक’ से सर्टिफिकेट नहीं चाहिए! तुम्हारे ‘मालिकों’ की तो खुद की वतनपरस्ती संदिग्ध है।
बीजेपी के लोग गोदी मीडिया को कुत्ते की तरह समझते है देखिए कैसे दुत्कार रहे हैं!
अमन चोपड़ा :- लगता है अब आप BJP के बागी बन चुके हैं।
सुब्रह्मण्यम स्वामी:- मुझे लगता है तुम बेवकूफ और हो आगे से तुम्हारे साथ इंटरव्यू नहीं करूंगा🤣🤣
अमन चोपड़ा:- आप अक्सर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोलते हैं।🤔
सुब्रह्मण्यम स्वामी:- मेरे बोलने से जब पार्टी को कोई समस्या नहीं है तो तो तुम बकवास क्यों कर रहे हो?😆😆😆
Deeply saddened to hear about Imran bhai. Cricket has given us many shared moments, and as a fellow sportsman who has shared the platform and learned from him, I sincerely appeal that he be treated with dignity. Praying for his good health and strength for his family.
@ImranKhanPTI #ImranKhanHealthEmergency
Kapil Dev, Sunil Gavaskar among 14 former international cricket captains requesting Pakistan Govt for fair medical treatment, dignified detention conditions and fair trial for Imran Khan
These guys have shown how they may have been rivals on the field but will be friends forever
IMP: The list has no Pakistani name on it. Sad
कल पार्टी ने परिहार से मुझे, गोविंदपुर से मो. कामरान जी को, चिरैया से अच्छेलाल यादव जी को और कई अन्य जमीनी कार्यकर्ताओं को 6 साल के लिए बाहर कर दिया। कारण बताया गया - पार्टी समर्थित उम्मीदवार के विरोध में निर्दलीय खड़ा होना या किसी अन्य को समर्थन देना।
चलिए, मान लेते हैं कि मैं बागी हो गई हूँ। लेकिन मो. कामरान जी का टिकट क्यों काटा गया? एक शांत स्वभाव के व्यक्ति, जो विधायक होते हुए भी पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और तल्लीनता से निभा रहे थे, उनका अपराध क्या था?
2020 में जब रामचंद्र पूर्वे जी ने एमएलसी रहते हुए परिहार में पार्टी विरोधी काम किया था, तब पार्टी का अनुशासन कहाँ था? अगर तब उन्हें 6 साल के लिए बाहर किया गया होता, तो क्या 2025 में अपने परिवार के किसी सदस्य को टिकट दिला पाते? स्पष्ट है कि पार्टी में दो मापदंड हैं - एक परिवार के लिए, दूसरा कार्यकर्ताओं के लिए।
मैंने पहले भी कहा है - अगर परिहार से किसी अन्य जमीनी कार्यकर्ता को टिकट मिला होता, तो मैं उसका समर्थन पूरे मन से करती। जो कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच खड़ा रहे, उसे टिकट न मिले, और जो परिवार गणेश परिक्रमा करे, उसे इनाम में टिकट दे दिया जाए - यह दोहरा मापदंड #परिहार की जनता को स्वीकार नहीं है, और इसकी गूंज 11 नवंबर को #सीटी बजाकर पूरे बिहार को सुनाई जाएगी !
#Parihar
#RituJaiswal
एंकर:- आप किसका समर्थन करते हैं?
"महात्मा गांधी का या सावरकर का?"
प्रशांत किशोर:- आपकी हिम्मत कैसे हुई एक ही वाक्य में गांधी जी और सावरकर का नाम लेने की, ये सवाल ही बापू का अपमान है।
यह सुनते ही एंकर शांत हो गया और लज्जित महसूस किया।
बरेली में मौलाना तौक़ीर रज़ा के क़रीबियों की संपत्तियों पर सरकारी बुलडोज़र पहुंच चुका है। सवाल है कि यह बुलडोजर फतेहपुर में कहाँ गया था? आगरा में दलित सांसद के घर पर हमला करने वाले हमलावरों पर यह बुलडोज़र क्यों नहीं चला था? बहराइच के महसी में मुसलमानों के मकान दुकानों में आगज़नी तोड़-फोड़ करने वालो के खिलाफ यह बुलडोज़र क्यों नहीं चल पाया था? सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुलडोज़र कार्रावाई पर लगाई गई रोक का क्या हुआ?
पूरा देश मुसलमानों पर होते इस अत्याचार को देख रहा है। कोई रोते बिलखते, पुलिस की ज़ेर-ए-हिरासत लंगड़ाकर चलते मुसलमानों को देखकर खुश हो रहा है। कोई मुसलमानों की ऐसी हालत करने वाली पुलिस पर फूल बरसाकर अपनी खुशी का इज़हार कर रहा है। कोई मुसलमानों के दुकानों, मकानों को ज़मींदोज़ करते सरकारी बुलडोज़र को देखकर ठहाका लगा रहा है। ये जितने भी लोग हैं, इनकी शायद ही किसी मुसलमान से कोई निजी रंजिश रही हो। लेकिन सत्ता पोषित नफ़रत और कुंठा इन्हें अपने ही हमवतनों के खिलाफ दुश्मनी निभाने पर आमादा कर दिया है। जब किसी देश का लोकतंत्र भीड़तंत्र अथवा बहुसंख्यकवाद में परिवर्तित होता तब ऐसा ही होता है।
मुसलमानों के लिए ज़मीन तंग करने की कोशिश जारी है। मुख्यमंत्री की भाषा ऐसी है, मानो मुसलमान इस देश के नागरिक ही ना हों, मानो मुसलमानों की उनसे कोई पुरानी निजी रंजिश रही हो। मुसलमानों के खिलाफ मीडिया, पुलिस और सत्ता का गठजोड़ मुसलमानों को मनमाफिक अपमानित कर रहा है। इस अपमान को देश का विपक्ष देख रहा है, और खामोश है। क्या यह खामोशी मुसलमानों पर होते सरकारी ग़ैर सरकारी अत्याचार को मौन समर्थन है?
This is a slap to Right Wing hatemongers by Himanshi, wife of Indian Navy Lieutenant Vinay Narwal, who was killed in the Pahalgam terror attack. "We don't want people going against Muslims or Kashmiris. We want peace and only peace. Of course, we want justice,"
नरसंहार में 4 लोगों की निर्मम हत्या करने और 3 बच्चों को गोली मारने वाला नरभक्षी बीजेपी नेता और उच्च वर्ग का है इसलिए जातिवादी गोदी मीडिया अपने भाई-बंधु की काली करतूतों पर डिबेट शो नहीं करेगा?
दो कौड़ी के चंद राष्ट्रीय पत्रकार अभी दानापुर में इंटरव्यू कर अपनी जातीय पिपासा को शांत कर रहे थे वो ऐसी हत्याओं पर कभी बात नहीं करते क्योंकि ऐसा करने से CM और अधिकारी उन्हें विज्ञापन नहीं देंगे, उनके विपक्ष विरोधी लेखों, खबरों और टुच्चे गानों की CD को IPRD से नहीं ख़रीदवायेंगे। जब दलित-पिछड़ों की हत्या होती है तो ऐसे बदमाशों को मानसिक शांति मिलती है क्योंकि ये जन्मजात बहुजन विरोधी है। मनुष्यता, मानवता, समता और न्याय की इनसे अपेक्षा करना व्यर्थ है। #Crime #Bihar