@premkumarcbn01 धारा 292 गैर संज्ञेय (Non-cognizable) है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 292 के तहत पुलिस स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेकर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती है। पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के न तो मामले की जांच शुरू कर सकती है ना कोई अन्य कार्यवाही। इन्हें हाई कोर्ट भेजो।
@kaushambipolice@Ptneeraj94@ADGZonPrayagraj@igrangealld@Rajeevkrishna69 धारा 292 गैर संज्ञेय (Non-cognizable) है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 292 के तहत पुलिस स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेकर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती है। पुलिस बिना मजिस्ट्��ेट के आदेश या वारंट के न तो मामले की जांच शुरू कर सकती है ना कोई अन्य कार्यवाही। इन्हें हाई कोर्ट भेजो।
@ImGauravYadav9@ikhus_ @komal323232 मा चो उड़ीसा, हरियाणा, छत्तीसगढ़ का क्��ों नहीं बताया? बिहार का अति पिछड़ा है उसको सवर्ण बता दिया। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का क्यों नहीं बताया। जनता को बेवकूफ समझे हो?
@AbhinayWithYou भोसडीके दूसरों के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहिए। युद्ध विराम को ना ईरान मानेगा और ना इजरायल फिर युद्ध विराम करवाने वाले देश की होगी फजीहत। वैसे भी पाकिस्तान अमेरिका का दल्ला है क्या भारत को अमेरिका के इशारों पर चलना चाहिए।
@NitinNabin धारा 3(1) ग. में संशोधन करके
जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ किसी भी जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय या परंपरा के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय, परंपरा के आधार पर भेदभाव है," कर दिया जाए।
#UGC#modi#PMOIndia
@ArunKosli धारा 3(1) ग. में संशोधन करके
जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ किसी भी जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय या परंपरा के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय, परंपरा के आधार पर भेदभाव है," कर दिया जाए।
#UGC#modi#PMOIndia
@rashtrapatibhvn धारा 3(1) ग. में संशोधन करके
जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ किसी भी जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय या परंपरा के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय, परंपरा के आधार पर भेदभाव है," कर दिया जाए।
#UGC#modi#PMOIndia
@rashtrapatibhvn धारा 3(1) ग. में संशोधन करके
जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ किसी भी जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय या परंपरा के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय, परंपरा के आधार पर भेदभाव है," कर दिया जाए।
#UGC#modi#PMOIndia
@rashtrapatibhvn धारा 3(1) ग. में संशोधन करके
जाति-आधारित भेदभाव" का अर्थ किसी भी जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय या परंपरा के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति, जनजाति, वर्ग, समुदाय, परंपरा के आधार पर भेदभाव है," कर दिया जाए।
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