@alokrajRSSB बेच दी सारी सीट चोर है सबके सब। बेरोजगारों के गरीब परिवारों की बद्दुआ लगेगी।और यहीं पर आप सब चोरों को नर्क भुगतना पड़ेगा। बेरोजगारों के साथ इतना ज्यादा खिलवाड तो गहलोत सरकार में नही होता था जो पिछले 6 महिनो मे हुआ है।
@BadhalDr@HANUMANKISAN@BhajanlalBjp@Radhemahwa@manojmeena
जापान E20 लागू करने में 16 साल ले रहा है, थाईलैंड में 18 साल बाद भी विकल्प मौजूद है और ब्राज़ील ने 50 साल लगाए। लेकिन भारत में बिना तैयारी के महज़ 3 साल में देश के 90,000 पेट्रोल पंपों पर ज़बरदस्ती E20 थोपकर करोड़ों गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
- @ArvindKejriwal जी, राष्ट्रीय संयोजक, आम आदमी पार्टी
#StopForcingEthanolFuel
राजस्थान में फिर परीक्षा में धांधलेबाजी !
युवाओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय यही है कि उनके भविष्य को वही लोग बेच रहे हैं, जिन्हें उसकी रक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।
आज शिक्षा व्यवस्था कई लोगों के लिए कमाई का धंधा बन चुकी है।
पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने व्यवस्था को खोखला कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि जिसे चौकीदारी सौंपी गई, वही चोरी करवाने लगा।
जब व्यवस्था के रखवाले ही भ्रष्ट हो जाएं, तो ईमानदार छात्रों को न्याय कौन दिलाएगा?
आप विपक्ष के नेता हैं. @RahulGandhi@MamataOfficial@ArvindKejriwal@yadavakhilesh@VijayTh , आप सबसे सवाल है।
यदि इतने गंभीर मुद्दे पर जहाँ आपको लगता है कि देश का नुकसान हो रहा है, तो केवल ट्वीट कर देना कि देश लुट रहा है, क्या काफ़ी है?
RTI लगाइए, अदालत जाइए, PIL दाखिल कीजिए, जांच की मांग कीजिए|
हाथ धोकर पीछे पड़िए, जब तक कि पद से हटा न दिया जाए।
देश सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी के साथ विपक्ष की भी ज़िम्मेदारी है।
नुकसान किसी पार्टी का नहीं, भारत का हो रहा है।जवाब मिलने तक लड़ते रहना सच्ची देशभक्ति है।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi , गृह मंत्री श्री @AmitShah व BJP के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @JPNadda ने राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पुनर्गठन का वादा किया ,कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक मामलों की जांच सीबीआई से करवाने का वादा किया,भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने की बात कही,मगर सत्ता में आते ही BJP ने इन मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया |
BJP सरकार के निर्णयों से स्पष्ट हो रहा है कि अब भजनलाल जी भी गहलोत सरकार के नक्शे कदम पर चलने लग गई जो यह साबित करता है कि भाजपा व कांग्रेस आपस में मिली हुई है |
BJP सरकार द्वारा RPSC जैसी संस्थानों के संदर्भ में लिए जा रहे निर्णयों से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि सरकार RPSC जैसी संवैधानिक संस्थाओं का भी बंटाधार करने में लगी है |
राजस्थान के लाखों बेरोजगार युवा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व व राज्य सरकार से यह जानना चाहते हैं कि चुनावी वादे कब पूरे होंगे ?
@BhajanlalBjp@RajCMO
@tarunvats33 Then what's the meaning of 7 years OS updates if they won't give complete features to older devices. Why they @SamsungIndia claim at the time of selling that 7 years OS upgrade?
@abhijeet_dipke जनाब दिल्ली जंतर मंतर से तो मांग ही आए इस्तीफा..। वहाँ एक दिन भी पूरा नहीं टिक पाया और अब राजस्थान में प्रदर्शन करेंगे जनाब 42-45 °C की गर्मी में। और इनको लगता है कि अब लोग और सरकार इनकी और ध्यान देगी...?
बस genz को बावला बना के खुद का गोला सेकना चाहता है।
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही कर रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम करने का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर्मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
हमने वीडियो यूँ ही नहीं बनाया था। सवाल किसी एक चैनल, एक पत्रकार या एक खबर का नहीं था। सवाल उस nature का था जिसमें पूरी तस्वीर दिखाने के बजाय उसका एक हिस्सा दिखाया जाता है।
2016 में subsidised cylinder - 12/yr
2025 में subsidised cylinder - 9/yr
2026 में subsidised cylinder- 4/yr
जब 12 सिलेंडर से 9 और फिर 4 सिलेंडर तक की यात्रा को बड़ी राहत बनाकर पेश किया जाता है, तब समझ आता है कि आईना दिखाने की ज़रूरत क्यों पड़ती है।हमारा उद्देश्य किसी की मानहानि नहीं, बल्कि उन सवालों को उठाना था जिन्हें आम नागरिक महसूस करता है लेकिन अक्सर TV पर नहीं देख पाता।
आईना दिखाना अगर अपराध है, तो फिर सवाल पूछना भी अपराध मान लीजिए।
आज लोग मानहानि के मुकदमे को सही ठहरा रहे हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि आखिर वह वीडियो बना क्यों था। आईना चुभता इसलिए कि वह सच दिखा रहा होता है।
मज़ाक चल रहा क्या?
Retail investor का मेहनत का कई हज़ार करोड़ के साथ भरोसा भी डूब गया -Rajesh Exports वाले मामले में SEBI ने company और उसके chairman rajesh मेहता को बाजार से ban कर दिया है |
मेरा सवाल है कि इतने महीने पहले शिकायत आने के बाद रेगुलेटर ने इतनी देर क्यों लगाई और क्या रिटेल इन्वेस्टर्स की हितों क़ी सुरक्षा के लिए System वाकई काम कर रहा है?
SEBI के 3 जून 2026 के इंटरिम ऑर्डर के मुताबिक, Rajesh Exports ने FY21–FY25 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये की consolidated revenue गलत तरीके से रिपोर्ट की, जिसमें से 99.8% पर सवाल उठे हैं।
Rajesh Exports में लगभग 2 लाख retail shareholders हैं और LIC जैसी बड़ी संस्थाएं भी निवेशक हैं, जिनका हज़ारों करोड़ का exposure है
SEBI के ऑर्डर और मीडिया विश्लेषण के हिसाब से public wealth में अनुमानित 10–13 हजार करोड़ रुपये तक की erosion की बात हो रही है|
एक shareholder की शिकायत से शुरू हुई जांच ने दिखाया कि लगभग पूरा consolidated revenue ही सवालों के घेरे में है – क्या SEBI की routine surveillance इतनी कमज़ोर है कि इतना बड़ा “mess” बिना शिकायत के पकड़ में नहीं आता?
सिस्टम में किसकी जवाबदेही थी ये ? अगर 15.15 लाख करोड़ की revenue misreporting कई साल से चल रही थी, तो auditors, stock exchanges और SEBI के surveillance सिस्टम – तीनों की निगाहों से ये सब कैसे बचा रहा?
Retail investors से रोज़ कहा जाता है “do your own research” – लेकिन जब SEBI के ऑर्डर के मुताबिक 99.8% revenue ही सवालों के घेरे में हो, तो आम investor किस data पर भरोसा करे?
LIC जैसे public money वाले संस्थान भी इस कंपनी में exposed हैं; क्या संसद में ये सवाल नहीं उठना चाहिए कि regulator और PSU investors की risk oversight क्यूँ चूकी?
Rajesh Exports का केस सिर्फ एक कंपनी का नहीं, ये सवाल उठाता है: क्या हमारे बाजार में corporate fraud पकड़ने वाली व्यवस्था “proactive” है या सिर्फ शिकायत आने पर active होंगी और जब तक लोगो की गाडी कमाई स्वाहा हो चुकी होंगी!!
ट्रांसफर कब से बड़ा एक्शन हो गया ?
देश का हर परीक्षा तंत्र किसी न किसी खामी से जूझ रहा है।
कहीं पेपर लीक,
कहीं पोर्टल डाउन,
कहीं परिणाम में देरी।
अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं,
पूरी व्यवस्था का उपचार चाहिए।
@aajtak@anjanaomkashyap ये अंजना ताई मानने वाली नही है।
अब कौन समझाए अगर किसी को पढ़ना होगा तो समय तो देना होगा वो चाहे online हो, offline हो या फिर गुरुकुलों में हो।
सरकार से सवाल करने के बजाय teachers पर बकैती कर रही है। दूसरों की कमाई बता रही है पहले खुद की भी तो बता इस बकैती के कितने मिल रहे हैं?