अगर मस्जिदों में कुर्सियों का ये मेला नहीं रोका गया तो बहुत जल्द हमारी मस्जिदें चर्च की शक्ल अख्तियार कर लेंगी।
ऐसे लोगों को समझाना चाहिए कि थोड़ा बहुत उजर की वजह से कुर्सियों का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें,
हिम्मत करें और खड़े हो कर नमाज पढ़ें, अगर कुछ ज्यादा ही मजबूरी है तो जमीन पर बैठ कर आजिज़ी के साथ खुदा की इबादत करें।
सऊदी अरब के शहर से एक बहुत खूबसूरत तस्वीर।
दो लोग अपनी-अपनी कारों से जा रहे थे। अचानक दोनों कारों की आपस में टक्कर हो गई, और उनमें से एक की कार लगभग पूरी तरह तबाह हो गई। आम तौर पर दिमाग में यही आता है कि दोनों नीचे उतरेंगे, झगड़ा करेंगे, शोर-शराबा होगा और लोग इकट्ठा हो जाएंगे। लेकिन जो हुआ, वह बिल्कुल अलग था। दोनों कार से उतरे, और सबसे पहले एक-दूसरे की ख़ैरियत पूछी। हादसा मगरिब की अज़ान के समय हुआ था, तो दोनों ने वहीं उतरकर साथ में नमाज़ अदा की। यह हक़ीक़त है, कोई scripted scene नहीं।
नमाज़ खत्म करने के बाद दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और अपने-अपने रास्ते चल दिए।
यह तस्वीर अमेरिकी और युरोपीयन देशों में बहुत वायरल हुई, और हर कोई इसकी चर्चा करने लगा। बहुत से लोगों को उनका यह रवैया बेहद पसंद आया। एक ब्रिटिश अख़बार की हेडलाइन थी: “इस्लाम अमन और सहनशीलता का धर्म है।” माशाअल्लाह। अल्लाह इस्लाम और मुसलमानों को इज़्ज़त और कामयाबी अता फरमाए। आमिन 🤲