Hindi Booklist for 2026 :-
1. गुनाहों का देवता - धर्मवीर भारती
2. आषाढ़ का एक दिन - मोहन राकेश
3. दीवार में एक खिड़की रहती थी - विनोद शुक्ल
4. रेत की मछली - कांता भारती
5. मैला आंचल - फरिश्वरनाथ रेणु
6. निर्मला, गोदान और कर्मभूमि – प्रेमचंद
7. बेहया - विनीता अस्थाना
8. यार पापा और अक्टूबर जंक्शन - दिव्य प्रकाश
9. मुसाफिर कैफे, इब्नेबतूती - दिव्य प्रकाश दुबे
10. कतरनें, पतझड़, बहुत दूर कितना दूर होता है - मानव कौल (अभिनेता)
नोट:- आपने 2026 में ये नहीं पढ़ा तो क्या पढ़ा? — आपने इनमें से अभी तक कौन कौन सी बुक पढ़ी हैं?
कल से कुछ टुच्चे टाइप के छोट भैया नेता एवं देश–विरोधी सोच वाले लोग सोशल मीडिया पर ऊटपटांग बाते लिख रहे हैं कि,
• अगला नंबर भारत का
• Today Nepal – Tomorrow India
• आज नेपाल जला कल भारत जलेगा
सुन लो जाहिलों –
कभी सपने में भी इसे ट्राई करने की भूल न करना। ये भारत तुम्हारे जैसे गद्दारों का ही नहीं "देश भक्तों" का भी देश है। देश के आन–बान–शान में सीने पर गोलियां खाने का इतिहास रहा है इस देश का। तुम्हारे जैसे चंद गद्दारों को छोड़कर बच्चे बच्चे के दिल में "राष्ट्र प्रथम" के भावना है इस देश में।
याद रखना कि,
जिस दिन तुम "नेपाल फॉर्मूला" ट्राई करने की कोशिश करोगे – तुम्हारा वो हश्र होगा कि तुम्हारी आने वाली सात पुश्तें भी याद रखेगी।
~ साभार: @NCIBHQ
Maturity is when you realise:
Living a disciplined life with your parents earning ₹20–25k and staying close to them…
Is far more fulfilling than earning ₹60–80k in a metro city by leaving them behind
हम किस मुँह से बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दुओं के हक़ की बात करेंगे,
जब अपने ही देश में हिन्दू परिवार डर से पलायन करने को मजबूर हैं.
दंगाइयों के भय से बहुत से परिवारों को अस्थायी कैंपों में रखा गया है.
पश्चिम बंगाल में जो हो रहा है, वो सिर्फ भीड़ प्रायोजित हिंसा नहीं है, यह सुनियोजित और संगठित आतंक का मॉडल है, जिसकी नींव बेहद खतरनाक मंसूबों से रखी जा रही है.
बंगाल को अशांत करने का मंसूबा पाले घुसपैठिए से ममता बनर्जी सरकार की हमदर्दी, वहाँ की पुलिस का नकारापन, और मीडिया के एक वर्ग की चापलूसी, सब मिलकर एक बहुत बड़े राष्ट्रीय संकट की जमीन तैयार कर रहे हैं.
वक्फ पर देश की संसद ने कानून बनाया है. संसद किसी एक दल की जागीर नहीं होती यह भारत के जनमानस की सामूहिक लोकतांत्रिक चेतना का प्रतिनिधि है. यहां हर विचार, हर मत और हर दल की भागीदारी होती है.
इस कानून को संविधान के दायरे में रहकर पारित किया गया है. और यही संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार भी देता है. लेकिन विरोध की आड़ में जो कुछ हो रहा है, वो लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र है.
पश्चिम बंगाल की सड़कों पर उन्मादी भीड़ का रूप धारण कर, सार्वजनिक संपत्ति को आग के हवाले करना, लोगों की दुकानों को लूटना, और हत्या तक कर देना यह न तो विरोध है, न लोकतंत्र, यह खालिस आतंक है.
अगर अब भी हम नहीं चेते, तो वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर की त्रासदी, पश्चिम बंगाल में भी दस्तक देगी.
“दीवार का सिखर तोड़कर गुम्मद वना देने से यह गंगा जमुनी तहज़ीब नहीं होती “.. what a brilliant speech by Raja Bhaiya that will shut mouth of many pseudo seculars👏👏