जिसे मैं आईने जैसा दिखाई देता था
वो आज राह का पत्थर समझ रहा है मुझे
جسے میں آئینے جیسا دکھائی دیتا تھا
وہ آج راہ کا پتّھر سمجھ رہا ہے مجھے
●~𝗞𝗵𝗮𝗹𝗶𝗱 𝗡𝗮𝗱𝗲𝗲𝗺 𝗕𝘂𝗱𝗮𝘂𝗻𝗶
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हम मुलाक़ात को तरसेंगे तुम्हारी यारो
दिन ये उड़ जाएँगे सूखे हुए पत्तों की तरह
ہم ملاقات کو ترسینگے تمہاری یارو
دن یہ اُڑ جائیں گے سوکھے ہوئے پتّوں کی طرح
~ Khalid Nadeem Budauni
अस्सलाम अलैकुम ! मेरी तरफ से आपको और आपके अहले खाना को दिल की गहराई से 'ईद-उल-अज़हा' की बहुत-बहुत मुबारकबाद !
तबियत अलील है, दुआ की दरख़्वास्त है।" 🤲🏻
🌙 .𝐄𝐈𝐃 𝐔𝐋 𝐀𝐙𝐇𝐀 𝐌𝐔𝐁𝐀𝐑𝐀𝐊. 🌙
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