गंगा जल का रहस्य
संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि गंगा सतलोक से आई है, जहां की कोई भी वस्तु खराब नहीं होती। इसलिए गंगा का जल
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"Sant Rampal Ji Maharaj"
#गंगा_ही_का_पानी_निर्मल_क्यों
गंगा का स्रोत
संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि गंगा का जल सतलोक से निकलकर शिवलोक के जटा कुंडली डैम में आता है और फिर हिमालय से पृथ्वी पर बहता है।
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सतलोक का सैंपल
गंगा नदी सतलोक से आई है, जो अमर लोक है। वहां की हर चीज़ अमर है और कभी खराब नहीं होती।
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#GodMorningTuesday
सत् भक्ति संदेश ________🌺 🌺
जीवों की हत्या कसाई व्यक्ति करते हैं। जो शिकार करके खुशी मनाते हैं, वे दुष्ट अन्यायी हैं।
उनको चाहिए कि बुराई तथा हिंसा त्यागकर सतगुरू शरण में आकर दीक्षा लेकर भक्ति करके अपना कल्याण कराएँ।
🙇🙇
#SantRampalJiQuotes
#गुरुनानकजी_के_गुरु_कौन
🍂कबीर साहेब जी ही नानक जी के गुरु थे।🙇♂️🙇♂️
जिंदा बाबा के रूप में कबीर परमेश्वर नानक जी को मिले और उन्हें सच्चखंड दिखायाऔर अपने से परिचित करवाया और फिर उसी परमेश्वर को जब नानक जी ने काशी में धाणक जुलाहे के रूप में
#GodMorningTuesday
#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
किसी साधक ऋषि ने किसी स्थान या जलाशय पर बैठकर साधना की या अपनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रदर्शन किया। वह अपनी भक्ति कमाई करके साथ ले गया तथा अपने ईष्ट लोक को प्राप्त हुआ। उस साधना स्थल का बाद में तीर्थ नाम पड़ा।
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
तीर्थों से लाभ संभव नहीं है। क्योंकि गीता अध्याय 16 श्लोक 23 कहा गया है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उन्हें न सुख मिलता है, न उनकी गति होती। अर्थात तीर्थ यात्रा शास्त्र में वर्णित न होने से व्यर्थ साधना है।
#सुमर_सुमर_नर_उतरो_पारा
कौन सा है मोक्ष मंत्र ?
हरे राम हरे कृष्णा मंत्र से मोक्ष संभव नहीं है क्योंकि वेदों मे कहीं भी हरे राम हरे कृष्णा मंत्र नहीं है।
मनमाने मंत्रों से मोक्ष कैसे हो सकता है?
Sant Rampal Ji Maharaj
#सुमर_सुमर_नर_उतरो_पारा
क्या आप जानते हैं?
राधे-राधे श्याम मिला दे, ॐ नमः शिवाय, जय माता दी आदि मंत्रों से मोक्ष संभव नहीं है। क्योंकि ये मनमाने मंत्र हैं जिनका प्रमाण किसी भी श्रीमद्भगवत गीता, चारों वेदों में नहीं है।
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गायत्री मंत्र से मोक्ष संभव नहीं है क्योंकि गायत्री मंत्र वास्तव में मनमाना मंत्र है। क्योंकि जिसे गायत्री मंत्र माना जाता है वह वास्तव में यजुर्वेद 36 का मंत्र 3 है जिसमें ॐ मंत्र नहीं है।
मोक्ष मंत्र जानने के लिए डाउनलोड करिए Sant Rampal Ji Maharaj App
#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
तीर्थ क्या है ?
तीर्थ यादगारें हैं कि यहाँ पर कोई घटना घटी थी ताकि उनका प्रमाण रहे। लेकिन पवित्र गीता में तीर्थों पर जाना कहीं नहीं लिखा है।
तीर्थ भ्रमण गलत है। शास्त्र विधि त्यागकर मनमाना आचरण है जो गीता अ. 16 श्लोक 23 के अनुसार व्यर्थ है।
#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
परमेश्वर कबीर जी बताते हैं कि भ्रमित ज्ञान के आधार से संसार के व्यक्ति तीर्थों पर जाते हैं। आजीवन यह साधना करते हैं। जब मृत्यु हो जाती है तो उनको राहत उस साधना से नहीं मिलती। काल के दूत उनको बलपूर्वक (घसीटकर) खींचकर ले जाते हैं, दंडित करते हैं।
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हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रंथ ऋग्वेद मंडल
9 सूक्त 1 मंत्र 9 में लिखा है कि,
परमेश्वर जब भी शिशु रूप में पृथ्वी पर आते हैं तो उनका पालन पोषण कुंवारी गायों के दूध से होता है। ये बात हमारे ग्रंथों में लिखी थी। लेकिन अभी तक हमको नहीं बताया गया।
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#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
श्रीमद्देवी भागवत के छठे स्कन्ध, अध्याय 10 पृष्ठ 417 के अनुसार ‘‘ । उसके लिए तत्त्वदर्शी संत का सत्संग सुनना चाहिए। सत्संग चित्तशुद्धि करता है। इसे चित्तशुद्धि तीर्थ कहा जाता है। इसी का समर्थन गीता अध्याय 4 श्लोक 32 व 34 भी करता है।
#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
श्रीमद्देवी भागवत के छठे स्कन्ध, अध्याय 10 पृष्ठ 417 के अनुसार ‘‘तीर्थों के जल में स्नान करने से शरीर का मैल तो धुल जाता है, परंतु मन का मैल नहीं धुलता। उसके लिए तत्त्वदर्शी संत का सत्संग सुनना चाहिए।
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#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
सूक्ष्मवेद में कहा गया है:-
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कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊड़ै पानी न्हाय। सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय ।।
Tattvadarshi Sant Rampal Ji
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#चितशुद्धतीर्थ_में_सबतीर्थों का फल
तीर्थों से लाभ संभव नहीं है। क्योंकि गीता अध्याय 16 श्लोक 23 कहा गया है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उन्हें न सुख मिलता है, न उनकी गति होती। अर्थात तीर्थ यात्रा शास्त्र में वर्णित न होने से व्यर्थ साधना है।