ये वही खाने की मंडी वाला 40 फूटा रोड शाहीन बाग़ है ओखला दिल्ली डम्बिंगयार्ड भी इससे साफ़ होगा।
मुसलमान बिचौलियों और दलालों के कहने में आकर वोट डाल देता है और फिर भूल जाता है अपने वार्ड को 5 साल के लिए निगम पार्षद और विधायक के हवाले कर के
5 साल बाद अगले चुनाव में जागता है और फिर से बिचौलियों के कहने पर वोट कर देता है और फिर सो जाते है
यही हाल लगभग हर मुस्लिम एरिया का मिलेगा
गंदगी, खस्ता हालत, सड़कों पर जाम,
लोकल ऑटो रिक्शा व E रिक्शा का अतिक्रमण,
क्राइम, नशे में पड़ता नौजवान,
स्कूल ,डिस्पेंसरी, समुदाय भवन , डाकघर बैंक सुविधा बुरी हालत में मिलेंगे या मिलेंगे ही नही
इन सब पर ध्यान पब्लिक ही नहीं देती है तो नेता ही क्यों देंगे क्योंकि मुसलमान वोट परम्परा समझ कर देता है
वोट क्यों और किसे किया जाए, वोट देने के बाद उन्होंने जिसको चुना है उससे इन्हें क्या काम लेना है इन्हें ख़ुद मालूम ही नही होते
जिन्हें मालूम होता है वो पहले ही बिरयानी खा चुके होते हैं या टेंशन लेना ही नही चाहते इन सब की।
कोई ओवैसी. को पसंद करता है कोई इमरान. को कोई मोदी. को कोई राहुल. को कोई अखिलेश. को लेकिन कुछ समर्थक बिना गाली के बात नहीं करते।
इख्तिलाफ अपनी जगह लेकिन तहज़ीब तरबियत में अपनी बात रखनी चाहिए सबको.।
इंसाफ अगर सबके लिए बराबर है..तो सवाल पूछना भी हर नागरिक का हक़ है 👍
दिल्ली दंगे के दौरान अंकित शर्मा मर्डर केस में ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है
लेकिन सवाल सिर्फ़ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि न्याय के उस पैमाने का है जो हर नागरिक पर समान रूप से लागू होना चाहिए
अगर लोगों को ये महसूस होने लगे कि न्याय एकतरफ़ा है या पहचान और नाम देखकर होता है तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमज़ोर पड़ता है
इंसाफ अधूरा है अगर वो सबके लिए बराबर न हो
न्याय का तराज़ू किसी नाम मज़हब या पहचान से नहीं सिर्फ़ सबूत और क़ानून से झुकना चाहिए #JusticeForAll
दिल्ली दंगे के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन समेत सभी 5 लोगों को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा सुनाई
ताहिर ने जाते हुए कहा "मुझे हाई कोर्ट से न्याय मिलेगा।
इस मामले मे कोर्ट ने 13 जुलाई को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम कासिम, जावेद और अनस को दोषी करार दिया था कोर्ट ने पांचो दोषियों को IPC की 302, 165, 188,153A, 147, 148 के तहत दोषी को ठहराया था
कोर्ट ने हत्या, अपहरण दंगा सामाजिक विद्वेष फैलाने और अन्य मामलों में पांचो को अलग-अलग दोषी करार दिया, जबकि अन्य 6 को बरी कर दिया वही कोर्ट ने आपराधिक साजिश रचने के मामले में सभी 11 आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया था।