राजस्थान में शिक्षा की अलख जगाने वाले हजारों नवनियुक्त शिक्षकों के भविष्य पर आज अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। मामला बाड़मेर जिले का है, जहां करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ हो रहे प्रशासनिक भेदभाव ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में निकाली गई 62,000 रीट भर्ती के तहत बाड़मेर में नियुक्त इन शिक्षकों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पीरियड सफलतापूर��वक पूरा हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि जहां प्रदेश के अन्य सभी जिलों में स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को पूर्ण वेतन दिया जा रहा है, वहीं बाड़मेर के ये शिक्षक पिछले 4 महीनों से फाइलों के दफ्तरों में अटकने के कारण मानसिक तनाव झेल रहे हैं। प्रोबेशन प��रा होने के बावजूद इन शिक्षकों को आज भी 70% वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में आधे से भी कम वेतन पर परिवार का पालन-पोषण करना इन शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब भर्ती एक है, परीक्षा एक है और प्रोबेशन खत्म होने की अवधि भी एक है, तो फिर बाड़मेर जिले के साथ यह 'सौतेला व्यवहार' क्यों? यह संविधान के समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। जब शिक्षक खुद आर्थिक तंगी और मानसिक त���ाव में होगा, तो वह छात्रों के भविष्य के साथ न्याय कैसे कर पाएगा? प्रशासनिक देरी का खामियाजा अंततः बाड़मेर की शिक्षा व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पुरजोर आग्रह किया है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। बाड़मेर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए जाएं ताकि इन 2000 शिक्षकों का स्थायीकरण बिना किसी और देरी के सुनिश्चित हो सके और उन्हें उनका बकाया स��ेत पूरा वेतन मिल सके। यह केवल 2000 शिक्षकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन 2000 परिवारों के भविष्य का सवाल है। अब देखना यह होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद भजनलाल सरकार कितनी सक्रियता दिखाती है और इन शिक्षकों को न्याय कब तक मिल पाता है।
संविधान सभी को समान शिक्षा का अधिकार देता है लेकिन बच्चों को यह अधिकार पाना आसान नहीं होता कम जनसंख्या, स्कूलों की दूरी संसाधनों की कमी और सामाजिक भेदभाव जैसे कारण उन्हें पीछे धकेलते हैं। ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास ज़रूरी हैं।#JusticeForSchoolsChildren
पढ़ाई ��ोई बोझ नहीं, बल्कि अपना भविष्य संवारने का सबसे मजबूत हथियार है। आज की मेहनत, कल का सम्मान तय करती है। किताबों से दोस्ती कर लो, ये तुम्हें वहां पहुंचाएंगी जहां ��िर्फ सपने जाते हैं।
जो वक्त को पढ़ाई में लगाता है, वक्त एक दिन उसी के नाम की कहानी लिखता है!"
संघर्ष ही वो आग है, जो इंसान को सोने से कुंदन बनाती है।
जो अंधेरे से लड़ता है, वही उजाले का हकदार होता है। हर ठोकर हमें गिराने नहीं, संभालने आती है। संघर्ष से मत डरो, क्योंकि इसी में तुम्हारी असली ताकत छुपी है।"
#ceasefire