ओस में भीगे
शून्य में तैरते
कुछ लफ़्ज़ों को
गुनगुनाया है...
कश्मकश से भीगे
काँटों को
मुट्ठी में भींच
मन मुस्काया है...
हरसिंगार का
पहला पुष्प
जूड़े में सजाया है...
बसंत में बहके
पत्तों को चुन
बंदनवार बनाया है...
तुम्हें खोने के बाद
ऋतुओं संग
बहुत 'अपना सा' समय बिताया है..!!
#नीलम
#पुष्प
#छोटादरवाज़ा
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कभी-कभी
मैं सोचती हूँ,
उन शब्दों के पीछे छिपे प्रेम ने
तुम्हें कितना थकाया होगा,
जिसे तुम महसूस करते रहे,
रोज़ जीते रहे,
बिना किसी उम्मीद के,
बस लिखते रहे!!!
शायद तुम्हें इल्म था
कि कुछ एहसास
कह देने से नहीं बल्कि
लिख देने से मुकम्मल होते हैं।
तुम्हारी नज़्म …एक अधूरी “नज़्म”…
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~सरिता~
(नीलम- @NeelamWrites)
भीगा दर्द नम सी गुज़ारिश
अब के तन्हा लौटी बारिश
भीनी खुशबू भीना सा मन
फिर भी कितनी सूखी बारिश
भीगे पत्ते हौले से चुन
पतझड़ पास बुलाती बारिश
शोरोगुल का स्वांग रचाती
हम सी तुम सी चुप सी बारिश
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Photo- Billy Dinh