Congress at it again
Is Hindu faith being targeted again in Karnataka?
The removal of an arch at a temple in Bengaluru’s Brookefield area has raised serious questions.
Was this purely a traffic-related action, or is there more to it?
The administration must explain why action was taken against the temple and address concerns surrounding Hindu places of worship.
Chu Hindus of Karnataka🤡🤡
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
One can agree or disagree with need for reforms wrt Reservations but the way the government and police are treating those who are peacefully protesting and filing cases is a matter of absolute shame.
What a fall ... these are our people !
Saurabh Raj Jain, best known for playing Lord Krishna in the blockbuster 2013 TV serial Mahabharat, has extended his support to the Reservation Hatao Andolan.
Finally, a celebrity with the guts to take a stand on this issue.
In India, Hinduism is framed as regressive and Buddhism as progressive.
In South Korea, Buddhism is framed as regressive and Christianity as progressive.
Different narratives, same beneficiary: Christianity
‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का हर्ष दुबे के इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कोई समर्थन नहीं है। चूँकि हम इस आंदोलन से वैचारिक रूप से जुड़े थे, इसलिए कल मेरी उपस्थिति वहाँ थी। हमने ना तो यह आंदोलन बुलाया था, ना प्रेस कॉन्फ्रेंस।
जो लोग हर्ष या अन्य लोगों के बुलाने पर जंतर मंतर आए थे, उनसे विनम्र निवेदन है कि वो अपने घरों को प्रस्थान करें। कोई तो कारण रहा होगा कि मैंने ऐसे किसी आंदोलन के लिए लोगों को इतनी शीघ्रता से बुलाने से मना किया था।
कोई भी पार्टी इसे यह ना समझे कि आंदोलन समाप्त हो चुका है। हम चर्चा करेंगे, लोगों को बताएँगे और हम शीघ्र ही वापस आएँगे और इस संख्या से बहुत बड़ी संख्या में आएँगे।
साथ ही, हर्ष दुबे के पिताजी को विधायक टिकट हेतु शुभकामनाएँ। आपके माध्यम से एक सवर्ण विधानसभा में पहुँचेगा। आशा है आप वहाँ आरक्षण की वर्तमान नीतियों का विरोध करेंगे।
@neha_laldas@talk2anuradha
Hello @DelhiPolice, why are you stopping today’s peaceful protests?
Cockroaches were abusing Indian Army right in front of your face and you did nothing.
Why are you using force against nationalists?
दिल्ली में सांसद चंद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट और IT एक्ट 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
अजीत भारती पर ये कार्रवाई सरासर गलत है यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है जब इनके पास कोई तर्क नहीं बचता तो यह SC/ST एक्ट का सहारा लेते है।
#UGC रोल बेक पर अपना बलिदान एक सवर्ण भाई ने दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर दे दिया
बोले भाईयो पर लाठिया बरसती मैं नहीं देख सकता
धन्य है🙏 ऐसे शूरवीर भाई को जो सवर्ण समाज के लिए अपनी नोकरी को बलिदान कर दिया
आपके इस बलिदान के संघर्ष का सवर्ण समाज अपने लिए उसका परिणाम जरूर निकालेगा
भोजशाला मामले पर हमने पूरी रिसर्च की है और हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है। हमारी नजर 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द करवाने पर है, जिसमें नमाज़ की इजाज़त दी गई थी। कौन क्या कहता है, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें अपने ईश्वर पर विश्वास है और जो सच्चा काम है,उसे पूरा करना है।
It’s collective weakness and cowardice of the Hindus that they have failed collectively to restore honour of Hindus in Indian subcontinent. Failure is because of ideological subversion and political affiliation.
तर्क: हमारे साथ 5000 वर्षों से डिस्क्रिमिनेशन हुआ। अतः आरक्षण सकारात्मक डिस्क्रिमिनेशन है और उचित है।
उत्तर: हिन्दुओं का नरसंहार मुगलों के समय में हुआ, बलात्कार हुआ, गाँव जलाए गए। यह 4-500 वर्ष पहले की ही बात है। तो क्या वर्तमान मुसलमानों का, उपरिलिखित तर्क से, नरसंहार उचित हो जाएगा?
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इस पर तुरंत भीम वाले पगला जाएँगे कि ऐसे कैसे तुम आरक्षण के डिबेट में लॉजिकल बातें ले आते हो। आज तक ये 5,000 वर्ष का कोई भी प्राइमरी सोर्स ले कर आए नहीं। और उस समय किसने किया, क्या किया, मैं उसका लोड क्यों लेता फिरूँ?
जिन जातियों को आरक्षण से हटाने के लिए 1960 के ही दशक में सिफारिश हुई, वो आज तक टिकी हुई हैं लिस्ट में, सबसे अधिक आरक्षण खा रही है। जिन जातियों को मुगलों के समय में जमींदारी दी गई, वो आज ओबीसी लिस्ट में हैं।
यदि सरकार को लगता है कि ये सारे डॉक्यूमेंट प्रधानमंत्रियों के तकिए की खोली में रखे होते हैं, तो वो भूल जाएँ। ये सब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़े और तथ्य हैं।
‘व्हाइट पेपर’ तो लाना ही होगा। नहीं लाओगे तो हम निकलवा लेंगे या ऐसे आँकड़े रख देंगे जो तुम्हें और भी असहज करेगा।
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एक बात संघ के लिए भी है: मूर्ख बनाना बंद करो ये सब लीक करवा कर कि ‘UGC पर तो हमें न उगलते बन रहा, न निगलते’। यह ऐसा स्तरहीन तर्क है कि सामने मिले ऐसा आदमी तो पूछूँ कि तुम्हारी बुद्धि घास चरने चली गई?
इसमें ‘उगलना-निगलना’ क्या है? सीधा वक्तव्य यह दो: “आज के संदर्भ में, जब विश्वविद्यालयों की दीवारों पर सवर्णों के नरसंहार की बातें लिखी जाती हैं, हर सप्ताह कब्र खुदने के नारे लगते हैं, तो यह मानना अनुचित है कि उनको लेकर जातिगत घृणा नहीं है। अतः उन्हें भी इस लिस्ट का हिस्सा होना चाहिए।”
तत्पश्चात्, इसमें एक और बिन्दु जोड़ा जाए: यदि कोई भी शिकायत झूठी निकली, उस पर दोगुना जुर्माना और जेल का दंड होगा।
ऐसा कोई रॉकेट साइंस नहीं है।