Dear @KirenRijiju
अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि...
१) एक बार भरे मंच से माननीय मोदी जी ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे।
ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं?
इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए।
२) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था?
(वीडियो संलग्न है )
२) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था।
३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।
४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था?
५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।
क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं?
६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था।
ये किस स्तर की राजनीति थी?
७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था।
क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था?
८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं।
ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी?
९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी?
आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया।
मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा।
(देखें द टेलीग्राफ)
१०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए।
विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे।
📍भारत के किसी प्रधानमंत्री तो छोड़िए दुनिया के किसी देश के मुखिया ने सार्वजनिक मंच से ऐसे अश्लील इशारे नहीं किए जैसे 'माननीय' कर चुके हैं।
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नैतिकता के पैरोकार , शालीनता के झंडाबरदार पिछले बारह सालों से कहां किस गुफा में सो रहे थे?
लंबी चर्चा की एक छोटी सी कतरन।
🙏
@SpecialCoverage
बहुत से लोगों का दिल दुख रहा है कि प्रधानमंत्री पद पर बैठे हुए इंसान का मजाक क्यों उड़ाया जा रहा है.
इन दुखी लोगों का कहना है - प्रधानमंत्री के पद का सम्मान होना चाहिए. उनका मजाक नहीं बनाना चाहिए.
अब ये दुखी लोग अपने आदर्श मोदी का वीडियो देख लें 👇
मनमोहन सिंह VS बनाम नरेंद्र मोदी
🛑 अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह को 0.7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था सौंपकर गए थे
🛑 मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी को 2.07 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था सौंपी यानी उनके कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था लगभग तीन गुना हो गई
🛑 नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के शासन के बाद, 31 मार्च 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था 3.92 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची है
🛑 यानी मोदी अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था को दोगुना भी नहीं कर पाए हैं @Sheeetalps
बंदे मातरम पर कुछ बातें
1- बंकिम बाबू के जिस 'आनंदमठ' से वंदे मातरम को लिया गया है, वह ब्रिटिश विरोधी नहीं बल्कि मुस्लिम विरोधी उपन्यास है।
2-बंकिम बाबू स्वाधीनता सेनानी नहीं बल्कि ब्रिटिश सरकार में ऊंचे पद पर (डेपुटी मजिस्ट्रेट) थे।
3-'बंदे मातरम' गीत नहीं, नारे की तरह लोकप्रिय हुआ था। भगत सिंह ने इसकी जगह 'इन्क़लाब ज़िन्दाबाद' और नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने इसकी जगह 'जय हिन्द' का नारा चुना।
4- आज़ादी के पहले हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इसे कभी नहीं गाया।
संघ ने अपना एक नया गीत बनाया- नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि।
5 -कांग्रेस के आयोजनों में इसे गाया जाता था।
6- गुरुदेव टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने मिलकर तय किया था कि इसके शुरू के दो स्ट्रेन्जा गाए जाएँगे, क्योंकि बाद के स्ट्रेन्जा धार्मिक प्रतीकों से भरे हैं।
कांग्रेस कार्यकारिणी ने इसी रेकमेन्डेशन को लागू किया।
7- आज़ादी के बाद भी इसे ही लागू रखा गया।
रेहान फ़ज़ल साहब ने फ़िदेल कास्त्रो के बहाने नेहरू और इंदिरा गांधी के रिश्ते को कितनी खूबसूरती से समझा दिया .
दो मिनट गौर से सुनिए.
अनपढ़ और नफरती गैंग को इतिहास के बारे में कुछ नहीं पता .
एक बात महसूस कर रही हूँ , सबने (GenZ सहित) धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से बात शुरू की , फिर बात नितिन गडकरी को छू कर निकल गई , फिर अमित शाह घिरते दिखे (विपक्ष के हाथों सबसे अधिक), लेकिन 2,3 के पीछे GenZ उतना नहीं पड़ा, जितना पीछे वह सीधे प्रधानमंत्री मोदी जी के पड़े हैं, अब तो GenZ के साथ Gen Alpha भी मैदान में है - दोनों ने मिलकर मोदी जी की नींदे उड़ा रखी है.
ये लगता है मोदी जी ये दोनों आपको छोड़ने वाले नहीं,आपको ये कभी माफ़ नहीं करने वाले,
20 जुलाई को आपके द्वारा इन्हें दिए गए ज़ख़्म बेहद गहरे जो हैं.
1st Video: GenZ
2nd Video: Gen Alpha
🚨 एचपीसीएल (HPCL) के पूर्व चेयरमैन एम.के. सुराना का ऑन रिकॉर्ड बयान:
एथेनॉल की कीमत: ₹56.71–71 प्रति लीटररिफाइनरी से निकलने वाले पेट्रोल की कीमत: लगभग ₹53 प्रति लीटर
एथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) से ईंधन की कीमतें कम नहीं होंगी, क्योंकि एथेनॉल पेट्रोल से महंगा है। यह कोई सस्ता विकल्प या छूट नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया की मीडिया बता रही कि जो स्टेडियम खचाखच भरा था प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में
वो भीड़ खुद मोदी ढोकर ले गया था
अच्छा लगा देखकर कोई तो सच बोल रहा
भारत की मीडिया तो भांड से ज्यादा कुछ रही नहीं
मोदीजी के ऑस्ट्रेलिया से निकलते ही वहां के चैनल 7 ने उनकी पोल खोल दी।
बताया कि कैसे भारत की जनता, यहां के मंदिरों और टैक्स के पैसे को लूटकर 30 हज़ार प्रवासी भारतीयों को चार्टर्ड फ्लाइट से मेलबर्न लाया गया।
भारत की लूट ही भिसगुरु की ताकत है।
अब समझ आया कि चंदा चोरी का पैसा कहां जा रहा है?
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📅 July 14, 2026
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Super Exclusive-
राम मंदिर SIT के चीफ पर
खुद '420' की एफआईआर!
जांच कैसे निष्पक्ष होगी सरकार?
राम मंदिर SIT के चीफ और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत पर खुद दर्ज है चीटिंग और फोर्जरी की एफआईआर!
मेरठ CJM कोर्ट ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त कर CO स्तर के अधिकारी को उनकी जांच के लिए कहा है।
जांच मेरठ क्राइम ब्रांच के CO के पास।
फ्रॉड, फोर्जरी, कमीशन खोरी और फ्लूड लगाकर सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ के गंभीर आरोप।
जो खुद फ्रॉड और फोर्जरी की जांच के दायरे में,
वो कर रहा है राम मंदिर में हुए गबन, फ्रॉड और फोर्जरी की जांच!!!
फिर राम मंदिर की जांच निष्पक्ष कैसे होगी?
जैसा सरकार कहेगी, एकदम वैसे होगी।
पूरी ख़बर @TOPSecret24x7