दफ्तर में उसकी मौत की खबर आई
दो मिनट का मौन रहा
फिर उसके हिस्से का काम
औरों में बांट दिया गया।
और वह मरने वाला इस डर से छुट्टी नहीं लेता था
कि अगर वह छुट्टी करेगा
तो उसके बिना काम कैसे चलेगा
"यूं ही आबाद रहेगी दुनिया
हम ना होंगे तो हम सा कोई होगा"
"गंभीराशय बुद्धिमानों को कभी किसी बात का कौतुक होता ही नहीं या उनके लेखे यह संपूर्ण संसार केवल कौतुक रूप है जिसमें मनुष्य का जीवन तो महा कौतुक है........!!"
('कौतुक'- निबंध)
#बालकृष्ण_भट्ट#पुण्यतिथि🙏