#kitabikeeda -- रागदरबारी को पढ़ना जैसे भारत की हिन्दीपट्टी का सजीव चित्र देखने जैसा है।
पचास वर्ष बीत जाने पर भी ये जैसे आज की ही कहानी लगती है।
हिन्दी व्यंग्य के पाँच पाण्डवों में से एक, श्रीलाल शुक्ल जी की ये कालजयी रचना अपने चुटीले अंदाज़ और यथार्थबोध के लिए विख्यात है.