वृंदावन के संत प्रेमानंद के आश्रम पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
बच्चों की मौत और बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
अगर यही मामला किसी मदरसे से जुड़ा होता, तो आज यह बड़ा मुद्दा बन चुका होता।
हर टीवी चैनल और मीडिया में बार-बार मदरसे की तस्वीरें दिखाई जा रही होतीं।
लेकिन वृंदावन से जुड़े इन गंभीर सवालों पर ऐसी व्यापक चर्चा क्यों नहीं दिख रही?
कानून और मीडिया की निगाह में हर संस्था के लिए एक जैसा पैमाना क्यों नहीं होना चाहिए?
यूँ होगा क्या बेटियों का सम्मान ??
पूछना चाहती हूँ क्या भाजपा की मौन महिला नेत्रियाँ यह सब देख कर भी मौन रहेगी??
अगर हाँ , तो अगला नंबर तुम्हारा भी हो सकता है तब हम अगर हम चुप रहें तो छटपटाना मत -
शाह की पुलिस शर्म करो .
#jantarmanr@MahilaCongress