पेमेंट दो दिन लेट क्या हुआ ये तो पोल पट्टी खोलने लगी @myogiadityanath जी आपकी।🫵😱
दो दिन का सब्र नहीं है,
ये तो सोचना चाहिए कि महराज जी के एडवरटाइजमेंट में प्रतिदिन का 2 करोड़ लगता है।🥴
@chitraaum
पिछले 10–12 वर्षों में भाजपा और RSS ने मिलकर देश की शिक्षा व्यवस्था को योजनाबद्ध तरीके से बर्बाद किया। सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को उपेक्षा, निजीकरण और वैचारिक कब्ज़े की प्रयोगशाला बना दिया।
लेकिन अब देश का युवा चुप नहीं है। वह शिक्षा को अपना संवैधानिक अधिकार मानकर डटकर लड़ रहा है। यह सिर्फ़ शिक्षा बचाने की लड़ाई नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और भारत के लोकतांत्रिक चरित्र को बचाने की लड़ाई है।
मोहन भागवत को लगा जैसे RSS वाले हर जगह ज़बानी जमाखर्च करते हैं
यहाँ भी वही चल जाएगा
भूल गए - Gen Z से बात कर रहे थे
कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया युवाओं ने
सीता सोरेन, @HemantSorenJMM की भाभी
BJP ज्वाइन कर चुकी हैं। महतो को देखने और मदद करने की बात कहने आईं थीं
महतो ने कहा साँस नहीं आ रही डॉक्टर बुलाओ, इतने लाव लश्कर सुरक्षा के साथ आईं सीता एक डॉक्टर न करा पाईं…. कैमरे पर देखिए डॉक्टर बुलाने की जद्दोजहद
https://t.co/zkcVWASPfw
प्रशांत किशोर ने पहली बार छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर बात की..
पत्रकार — विरोध प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने नरेंद्र मोदी के लिए और उनकी माताजी को लेकर अपशब्द कहे।
PK —जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे। जो चीज़ें आप शुरू करते हैं, वे हमेशा लौटकर आपको ही परेशान करती हैं। 😭
पंजाब के अमृतसर की सिमरत कौर की 23 साल की बेटी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ती है। आज उसका जन्मदिन था। माता-पिता और भाई बिना बताए सरप्राइज देने पहुँचे उसके प्राइवेट रूम में।
दरवाजा खटखटाया…
15 मिनट तक कोई जवाब नहीं।
जब आखिरकार गेट खुला तो बेटी ने बड़ी शांत आवाज में कहा –
“मैं अंदर पढ़ाई कर रही थी…”
इतने में पड़ोस का एक शख्स दौड़ता हुआ आया और बोला –
“आपकी पीछे वाली खिड़की से कोई कूदा है… उसके सिर से खून बह रहा है!”
बेटी ने तुरंत जवाब दिया –
“मुझे नहीं पता… मैं तो अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी।”
माता-पिता का चेहरा देखकर दिल बैठ गया। जन्मदिन का केक हाथ में लिए खड़े थे, और सामने ये ड्रामा चल रहा था।
आजकल हर जगह यही सिस्टम चल रहा है।
जिसे यकीन न हो, वो कभी बिना बताए ऐसे ही छापा मार के देख ले।
"सत्ता से सवाल करना अब आसान नहीं रहा..."
@news24tvchannel छोड़ने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने टीवी मीडिया का ऐसा सच सामने रखा है, जिसे हर नागरिक को सुनना चाहिए।
अगर किसी सरकार के दौर में पत्रकारों को सवाल पूछने से पहले दबाव, ट्रोलिंग और स्टूडियो तक पहुँचने वाली भीड़ का डर सताने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
जब पत्रकार निर्भीक नहीं रहेंगे, तो जनता भी सच से वंचित होती जाएगी। इसलिए यह मुद्दा किसी एक पत्रकार या एक चैनल का नहीं, पूरे लोकतंत्र का है।
बाक़ी, आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ।