इस नीति की मूर्खता हर दुकान के काउंटर पर साफ दिखाई देगी।
सरकार व्यापारी से ₹8 शुल्क लेती है।
व्यापारी ग्राहक से कहता है—“UPI के ₹15 अतिरिक्त लगेंगे।”
अब निर्मला सीतारमण आखिर करेंगी क्या?
क्या वह भारत के हर QR कोड के पास खड़ी होकर दुकानदारों को समझाएंगी कि यह शुल्क ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है?
एक दुकान पर ₹10 अतिरिक्त मांगे जाएंगे, दूसरी पर ₹15। कोई सीधे कह देगा—“कैश में भुगतान करो।”
और ज्यादातर ग्राहक चुपचाप पैसे दे देंगे, क्योंकि दवाइयां या किराना खरीदते समय ₹10 के लिए 20 मिनट बहस करने वाला कोई नहीं है।
यही समस्या है जब नीतियां जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटकर बनाई जाती हैं।
निर्मला आंटी कागज पर वित्त मंत्रालय के नियमों को नियंत्रित कर सकती हैं, लेकिन काउंटर पर दुकानदार क्या कहेगा, इसे नियंत्रित नहीं कर सकतीं।
और आखिर में, उस फैसले की कीमत एक बार फिर आम लोगों को चुकानी पड़ेगी।
Freebies Budget of Govt : ₹500000 Cr
Govt is increasing these freebies
What we actually need to be free
1. UPI
2. Quality Education
3. Best Healthcare
But we aren't getting any of them Free
वैसे धुरंधर 3 में पता चलेगा कि यह कदम क्यों जरुरी था जिसकी वजह से UPI चार्ज लगाना पड़ा 😂
अब जब किसी product per 20 रुपये ही बच रहे हैं तो दुकानदार कहाँ से भरेगा...?
आच्छे दिन की शुरुआत पेटीयम करो😂
ये तारिका अंबानी से मोदी जी ने सिख लिया है पहले फ्री में फिर पैसे से?😂
Wonderful work done by producers of this explainer. MDR is just one more irritant that has been introduced by @narendramodi govt.
Maybe to cut @myogiadityanath to size!
मेडिकल सामान की कीमतों में लागत और MRP के बीच भारी अंतर का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। महाराष्ट्र FDA के आयुक्त एवं IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने इस विषय को उठाते हुए आम आदमी और गरीब मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
महाराष्ट्र FDA के एक सर्वे में ₹6.75 की सिरिंज की MRP ₹57.20 और ₹11.05 के IV सेट की MRP ₹325 दर्ज की गई। कीमतों में इतना बड़ा अंतर कई गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर मेडिकल उपकरणों की कीमतें किस आधार पर तय होती हैं और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमतों में कितनी पारदर्शिता है?
इलाज पहले ही आम परिवारों के लिए महंगा है। ऐसे में मेडिकल सामान की कीमतों में पारदर्शिता, उचित मूल्य निर्धारण और प्रभावी निगरानी जरूरी है, ताकि किसी मरीज की बीमारी उसके परिवार के लिए अनावश्यक आर्थिक संकट न बन जाए।
The government can spend thousands of crores on schemes like Ladli Behna and loan waivers, but suddenly keeping UPI free becomes a problem?
UPI became successful because even a ₹10–20 payment could be made instantly and effortlessly.
Start adding “small” charges today, and tomorrow those charges may not remain small.
UPI is public digital infrastructure, not another avenue to collect money from people.
Find the money elsewhere — don’t charge citizens for a system you spent years encouraging them to adopt.
क्या मूर्खतापूर्ण प्रोपोगंडा चलाया जा रहा है!!
कुछ महामूर्खों का प्रश्न है की
जब घडी की खोज 1505 में हुई थी श्रीकृष्ण भगवान के जन्म का समय रात को 12 बजे हुआ, ये कैसे पता चला??
आइये इसके पीछे के तथ्य को समझते हैं।
👇🏻👇🏻
हम चाहते हैं हमारा बच्चा इंगलिश मीडियम में पढ़ाई
करे और ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार को तोते कि
तरह रटे पर वहां इंगलैंड में ये क्या हो रहा है,
देखें. !!👇