2022 से स्कूल व्याख्याता भर्तियों का बिगड़ा गणित ; 2024 में भी 409 से अधिक पद रिक्त रहे; 2025 में स्थिति अधिक भयावह.….....।
ब्लू प्रिंट , अंकभार वर्गीकरण के अभाव और प्रश्नों के असहनीय स्तर ने अभ्यर्थियों का किया मोह भंग।
सुधार समिति के समक्ष रखने के लिए भेजा अभ्यावेदन।
@educationnagari@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar@rajeduofficial@RPSC1
RPSC में बैठे महानुभावों से बहन नेहा वशिष्ठ की मार्मिक अपील। @RPSC1
राजनीति विज्ञान में 2024 के परिणाम के बाद ओर ज्यादा मेहनत की थी ; सब कुछ करके भी फेल हो गए।
माता - पिता उम्मीदों के साथ भेजते है; जब ऐसे परिणाम आते है टूट जाते है।
हमें पुस्तके बता दीजिए...हम ओर ज्यादा मेहनत करेंगे...🙏🙏🙏
@educationnagari@DrRamSinghSamot@arvindchotia@sharatjpr
भर्ती चाहिए या पद खाली रखने की व्यवस्था?
RPSC की स्कूल व्याख्याता भर्तियों के परिणाम सरकार और आयोग की पूरी भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
राज्य के करोड़ों रुपये खर्च करके परीक्षा करवाई जाती है, हजारों अभ्यर्थी वर्षों तैयारी करते हैं और परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं।
तो सवाल सीधा है—पद भरने हैं या सिर्फ परीक्षा करवानी है?
2024 में 2202 पदों में 13 विषयों के 409+ पद रिक्त रहे, जिनमें लगभग 230 पद SC, ST, OBC और MBC बैकलॉग के हैं।
2025 में हालात और खराब हैं—
राजनीति विज्ञान: 645 पद — मात्र 67 सफल
कृषि: 552 पद — मात्र 49 सफल
फिजिक्स: 136 पद — मात्र 24 सफल
कॉमर्स: 600 पद — मात्र 323 सफल
समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, फिजिकल एजुकेशन सहित अन्य विषयों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त रह रहे हैं।
गलती अभ्यर्थियों की है या परीक्षा व्यवस्था की?
RPSC को प्रथम और द्वितीय प्रश्न-पत्र के स्तर, पैटर्न, कठिनता और पेपर सेटिंग की समीक्षा करनी होगी।
अभ्यर्थियों को स्पष्ट ब्लूप्रिंट और संदर्भ पुस्तकों की जानकारी देनी होगी।
राजनीति विज्ञान में SC-ST बैकलॉग का सवाल
2021-22 के बैकलॉग में SC के 39 और ST के 90 पद हैं। निर्धारित अवधि में भर्ती नहीं हुई तो इन पदों के सामान्य में परिवर्तित होने का खतरा है।
2024 में भी बैकलॉग बना और 2025 में भी बनने की स्थिति है।
सरकार बताए—आरक्षित वर्ग के पद खाली क्यों छोड़े जा रहे हैं?
छात्र दोषी नहीं हैं।
अगर परीक्षा व्यवस्था ऐसी है कि स्वीकृत पदों के अनुपात में अभ्यर्थी ही सफल नहीं हो पा रहे, तो जवाबदेही तय करनी होगी।
सरकार और RPSC को चेतावनी है—
पद खाली छोड़कर भर्ती प्रक्रिया से खिलवाड़ अब स्वीकार नहीं होगा।
यदि रिक्त पदों और बैकलॉग पर तत्काल ठोस निर्णय नहीं लिया गया तथा प्रश्नपत्र की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हुई, तो अभ्यर्थी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
यह सिर्फ राजनीति विज्ञान का सवाल नहीं है।
यह राजस्थान के हर उस अभ्यर्थी के भविष्य का सवाल है जो सरकारी भर्ती की तैयारी कर रहा है।
सरकार जवाब दे।
RPSC जवाब दे।
#RPSC #SchoolLecturer #SavePolity #StudentsJustice
स्कूल व्याख्याता भर्ती के परिणामों में पद खाली जाना और अब स्कूलों में "विद्या संबल योजना" लाना, बड़ा षड़यंत्र। ❌
"कॉलेजों में स्थाई भर्ती के रास्ते बंद करके , अब सरकार स्कूलों में स्थाई भर्ती बंद करने की तैयारी कर रही है। 🙅
RPSC की भर्तियों में 40% नहीं लाने वाले , "विद्या संबल" में बिना परीक्षा ही कैसे योग्य है ? @RPSC1
अब गुणवत्ता घास चरने गई क्या ❓ @RajCMO@BhajanlalBjp@DrRamSinghSamot@sharatjpr@Kunal_Alwar
645 पद, 42,555 अभ्यर्थी और पात्र सिर्फ 67—राजस्थान की प्राध्यापक भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल!
हर पेपर में 40% न्यूनतम अंक की शर्त के चलते हजारों युवा बाहर, आखिर इतने कम अभ्यर्थी ही क्यों पहुंच पाए अगले चरण में?
युवाओं की मांग है की निष्पक्ष जांच हो, पद खाली न रहें और योग्य अभ्यर्थियों को न्यायपूर्ण अवसर मिले।
#RPSC #RajasthanYouth #YouthVoice @BhajanlalBjp@RajGovOfficial
एक अभ्यर्थी की चिठ्ठी...
राजनीति विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों का भविष्य गंभीर संकट में है।
▪️ स्कूल व्याख्याता 2024: 225 पद, मात्र 6 चयन, 219 खाली
▪️ सहायक आचार्य 2025: 83 पद, मात्र 40 चयन, 43 खाली
▪️ स्कूल व्याख्याता 2025: 645 पद, मात्र 67 चयन, 578 खाली
वर्षों से मेहनत कर रहे योग्य अभ्यर्थी अत्यधिक कठिन एवं तथ्यात्मक प्रश्नपत्रों के कारण लगातार बाहर होते जा रहे हैं।
RPSC अध्यक्ष मूल पुस्तकों पर जोर देते हैं, लेकिन सवाल है—वे कौन-सी मूल पुस्तकें हैं, जिनसे प्रश्नपत्र तैयार किए गए? हमारे पास उपलब्ध अधिकांश मूल पुस्तकें पढ़ने के बावजूद यदि इतने बड़े स्तर पर पद खाली रह जाते हैं, तो प्रश्नपत्र की कठिनाई और पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
RPSC का काम महान विद्वानों या विशेषज्ञों का चयन करना नहीं, बल्कि निर्धारित पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन कर रिक्त पदों को भरना है।
हमारे 3–4 वर्ष का समय, मेहनत और धन इस प्रक्रिया में लगा है। अब सवाल है—इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रमुख मांगें
1. सरकार उच्च स्तरीय समिति गठित कर पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच करवाए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो और पद रिक्त न रहें। प्रश्नपत्र निर्माण में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
2. पाठ्यक्रम आधारित मानक पुस्तकों/संदर्भ पुस्तकों की सूची जारी की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को स्पष्ट दिशा मिल सके।
3. RPSC सबसे पहले निर्धारित पाठ्यक्रम एवं परीक्षा के स्तर के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करे, ताकि प्रश्नपत्र अनावश्यक रूप से कठिन एवं अप्रासंगिक न हो।
हम किसी की मेहरबानी नहीं मांग रहे हैं। हम अपनी मेहनत, समय और भविष्य के साथ न्याय मांग रहे हैं।
@RPSC1@RajCMO
@NareshJ46012@arvindchotia भाई आप मेरे रूम पर आओ , मैं आप को मूल पुस्तकें और प्रश्न पत्र जो विगत भर्तियों में आये हैं वो दोनों देता हूं , बस आप को देखकर उतर बताना है , पुरे दिन का समय रहेगा आपके पास ,
अगर पास नहीं हों पाएं तो घुटनों के बल बैठकर माफ़ी मांगनी पड़ेगी ,