मनुष्य का जीवन उसके विचारों से बनता है। व्यक्ति वैसा ही होता है, जैसा वह सारे दिन सोचता है। जो विचार आप अपने मस्तिष्क में रखते हैं,वे शारीरिक व भौतिक रूप में अवश्य प्रकट होते हैं।
बेहतर स्वास्थ,शांति,सफलता,सदभावना आदि के विचार प्रेषित करें
*अधिकतर लोगों को भ्रम होता है कि लोग उन्हें बहुत सम्मान देते हैं, बहुत पसंद करते हैं। भगवान बुद्ध, बाबा साहब जैसे और भी महापुरुषों को छोड़ दें तो हम सिर्फ प्राप्त पद, पॉवर से जाने जातें हैं न कि अपने नाम से।
सारी संपत्ति, प्रगति, उपलब्धियों का उस समय कोई मूल्य नहीं जब ऊपर से तो शांत व व्यवस्थित दिखाई दें लेकिन अथाह समुद्र की लहरों के समान स्वयं के भीतर अशांत हों.
आकर्षण का नियम सटीक है। जब हमें अपने मनचाहे परिणाम न मिलें तो समझ लें, हमने अनजाने मे इस नियम का दुरूपयोग किया है। अपनी मनचाही चीज,मनचाहे काम के बजाय हमने उन चीजों का चिंतन, मनन कर सृजन किया है जिन्हें हम वास्तव में नही चाहते हैँ। विज्ञान के अनुसार यह नियम अचूक है।
��िचार शब्द के रूप में व्यक्त होता है। शब्द कर्म के रूप में व्यक्त होता है। और यही कर्म हमारी आदत बनकर हमारे चरित्र का निर्माण करता है। इसलिए अपने विचारों पर हमेशा ध्यान दें। विचारों का उदगम प्रेम से होना चाहिये जिसमे सभी प्राणियों की परवाह शामिल हो।
भले ही हमारे इरादे नेक हों लेकिन कभी कभी ���ोगों का बिना मांगे मार्गदर्शन करने पर, उचित तवज्जो न मिलने के कारण ऐसा लगता है कि हमारे सम्मान को ठेस पहुंची है। इसलिए माँगने पर ही मार्गदर्शन दिया जाना उचित है। सम्मान की जरूरत मार्गदर्शन से बड़ी होती है।
नकारात्मक नजर आने वाली हर चीज में, हर स्थिति में अच्छाई छिपी होती है। यदि हम यह जान सकें तो हमारे देखते ही देखतें नकारात्मक स्थिति अच्छी एवं लाभकारी स्थिति मे बदल जाएगी। यह हमारी असमर्थता है कि हम व्यापक दृष्टिकोण से चीजों को स्पष्ट रूप से देख नही पाते हैँ।
टीकमगढ़ जिले में अधिकारियों की बैठक साथ सब स्टेशन व वितरण केंद्र का भ्रमण। कर्मचारियों से चर्चा के साथ उपभोक्ताओं से मिलकर क्षेत्र की समस्याओं को जानकर निराकरण के निर्देश दिए।