एक चुने हुए सांसद युवाओं के हक में संसद के बाहर धरने पर बैठे है। बारिश भी हौसला तोड़ नहीं पा रही है। मगर एक विपक्षी सांसद @BhimArmyChief को संसद परिसर में मौजूद शौचालय भी इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा।
महामानव हमेशा की तरह घटिया स्तर पर उतारू है!
बारिश की हर बूँद स्वीकार है, मगर मासूमों पर अन्याय स्वीकार नहीं, जिन्होंने अन्याय किया वो कितने ही ताकतवर क्यों ना हो, उनके पीछे कितनी बड़ी शक्ति क्यों ना हो, लेकिन जवाब देना ही होगा।
महापुरुषों के विचार ही मेरे संघर्ष की ताक़त हैं। जय भीम, जय भारत।
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
पुलिस के लाठी चार्ज के बाद, तमाम चोट सहकर और टियर गैस झेलने के बाद आप सब वापिस पहंचे हो और इस आंदोलन को जिंदा रख रहे हो
आप सभी को मेरा सलाम, जल्दी से मिलेंगे
जहाँ संविधान की शपथ ली, आज वहीं संविधान का सम्मान बचाने बैठा हूँ।
मासूमों पर हुए अत्याचार के विरुद्ध अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ।
जय भीम, जय भारत।
#संसद_मार्च#जंतर_मंत्र
आज 22वे दिन सुबह से दिल्ली पुलिस तीन बार भूख हड़तालियों को डिटेन करने की कोशिश कर चुकी है। हर कोशिश के बावजूद जंतर मंतर पर लोग भूख हड़तालियों के समर्थन में डटे हुए हैं।
आप सब भी जल्द से जल्द जंतर मंतर पहुंचिए!
दिल्ली पुलिस शर्म करो, भूख हड़ताल जारी है!
हर आंदोलन गलत है।
लोग गलत हैं।
आवाज़ उठाना गलत है।
सवाल पूछना गलत है।
विरोध करना गलत है।
जवाब मांगना गलत है।
पारदर्शिता मांगना गलत है।
व्यवस्था पर प्रश्न उठाना गलत है।
अधिकार मांगना गलत है।
न्याय की उम्मीद करना गलत है।
फिर मैं पूछता हूँ -
क्या पेपर लीक सही है?
क्या मिलावटी पेट्रोल सही है?
क्या मंदिरों से चंदा चोरी सही है?
क्या भर्ती परीक्षाओं में वर्षों की देरी सही है?
क्या बेरोज़गारी सही है?
क्या महंगाई सही है?
क्या अस्पतालों में भ्रष्टाचार सही है?
क्या शिक्षा में घोटाले सही हैं?
क्या नकली दवाइयाँ सही हैं?
क्या पुलों का गिरना सही है?
क्या सड़कों पर गड्ढे और हादसे सही हैं?
क्या टैक्स देने के बाद भी बदहाल सुविधाएँ सही हैं?
क्या बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ सही है?
क्या युवाओं के सपनों का टूटना सही है?
आवाज़ उठेगी तभी तो कुछ बदलेगा अगर हर protest को हम ऐसे ही उसकी कमिया बताकर कमजोर करेंगे तो एक दिन आवाज़ उठाने वाले भी नहीं बचेंगे तब कौन आएगा आगे जब तुम पर ही बीतेगी |
मानवता जिन्दा रखो ||
सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
सरदार जी, गाड़ी ही तो ख़राब हुई है। @nitin_gadkari जी को ऐसी गंदी-गंदी गालियाँ तो मत दीजिए।
मैं इस ट्वीट को पोस्ट करके इन गालियों का विरोध करता हूँ। आप भी रिपोस्ट करके विरोध कर सकते हैं।
मेहनत की कमाई से जिंदगी भर की पूंजी लगाकर लोग कार-बाइक खरीदते हैं, सपने देखते हैं।
लेकिन आज E20 पेट्रोल पंपों से गन्ने juice जैसा पीला पानी निकल रहा है।
इंजन खराब, माइलेज घटने की बात लोग ख़ुद बोल रहे है नई गाड़ियां तक बेकार हो रही हैं।
वही सुप्रीम कोर्ट में सरकार खुद कह रही कि ये ongoing experiment है, नतीजे अगले साल आएंगे।
तो क्या आम आदमी की गाड़ियां सरकार के लिए प्रयोग की लैब Experiment हैं? करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई और सपनों के साथ खिलवाड़ आख़िर किसके लिए ?
इतने सारे आरोप लोग लगा रहे है ! किसी के पास कोई जवाब नहीं है! और है तो हमेशा की तरह चुप्पी !
गडकरी जी E20 और एथेनॉल को भारत की Green Energy Revolution बता रहे हैं।
लेकिन बर्नीहाट पूछ रहा है क्या सिर्फ ईंधन बदल देने से विकास सचमुच "ग्रीन" हो जाता है?
#E20#Ethanol#GreenEnergy#Burnihat#AirPollution
बॉटल में पेट्रोल डालकर आधा पेट्रोल आधा घन्ने का ज्यूस दिखाओ तो मंत्री जी के दलाल कहते हैं कि पानी ख़ुद से मिलाकर दुष्प्रचार कर रहे हो, एंटी नेशनल!
फ्यूल टैंक से गन्ने का ज्यूस निकालकर दिखाते हैं तो दल्ले कहते हैं यह हमारी गाड़ी में से तो नहीं निकलता।
क्या बोलोगे? किसको बोलोगे? गुण्डों का राज है, जैसी देंगे वैसी खानी पड़ेगी।