मेरे युवा और Gen Z साथियों,
एक बात मेरे मन में साफ़ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए: भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
पर ज़िम्मेदारी और ईमानदारी - दोनों मोदी सरकार की सोच से परे हैं।
पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियाँ, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले - इन्हीं औज़ारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है।
याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूँ - देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती ‘छात्रों की गूंज’ को, आइए कोटा में हुंकार बनाएँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
विष्णु तिवारी
फर्ज़ी SC ST केस में 20 साल जेल
परिवार बर्बाद हुआ, माता पिता का निधन
कानूनी लड़ाई लड़ते लड़ते दो भाईयों की मौत
ज़मीन, जायदाद बिक गई
20 साल जेल के बाद हाईकोर्ट से बेकसूर साबित और केस फर्जी निकला।
पिछड़ों को न्याय, GENERAL CASTE से अन्याय की कीमत पर नहीं 🙏🏻
#UGC
@romanaisarkhan we all know that you will cover all #Bihar_election coverage without break madam...🫶
You are the faith of journalism...
Respect to you 💐🫶
इनकी भाषा देखो। ये इस देश के प्रधानमंत्री हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बागडोर इनके हाथ में है। हिंदुओं की हजारों साल की संस्कृति, संस्कार, भाषा, धर्म और तर्कशास्त्र का बोझ भी इन्हीं के नाजुक कंधों पर है। लेकिन भाषा एकदम टपोरी टाइप, सड़कछाप, दो कौड़ी के लुच्चों वाली।
कौन लिखता है इनके लिए? इतना घटिया लेखक कहां मिला इनको? या फिर ये खुद ही इतने बड़े ज्ञानी हैं कि अभद्र भाषा ही इनका गहना है? इस भाषा के साथ ये सपना दिखाते हैं कि हम विश्वगुरु बनेंगे!
बाकी तथ्य में उतनी ही सच्चाई है जितना सच बोलने के लिए ये कुख्यात हैं।
तुलसीदास का ब्राह्मण समाज ने बहिष्कार किया था, तुलसीदास भीख मांगते थे और रात में मस्जिद में सोते थे
जी हां आप सही सुन रहे हो
इस बात का खुलासा किया है राजकुमार भाटी जी ने
राजकुमार भाटी जी यू कहें इतिहास की चलती फिरती लाइब्रेरी है
राजकुमार भाटी जी बताते हैं जब तुलसीदास जी रामचरितमानस लिख रहे थे तब ब्राह्मण समाज ने ही उनका बहिष्कार कर दिया था, ब्राह्मण समाज का मानना था कि लोकभाषा में रामायण नहीं लिखी जानी चाहिए क्योंकि लोकभाषा में लिख जाएगी तो हर व्यक्ति इसे पढ़ लेगा
ब्राह्मण चाहते थे यह सिर्फ संस्कृत में ही रहे
इसी बात से नाराज होकर ब्राह्मण तुलसीदास को मंदिर में नहीं घुसने देते थे, तब तुलसीदास मस्जिद में सोते थे भीख मांग कर खाते थे
बाद में जब देखा कि तुलसीदास ने रामायण में ब्राह्मण समाज के लिए बहुत कुछ लिखा, तो सभी ब्राह्मणों ने तुलसीदास को ब्राह्मण शिरोमणि मान लिया
लेकिन जब तुलसीदास जीवित थे तब रहीम दास जी तुलसीदास की मदद करते थे
रहीम दास अकबर के दरबार में रहते थे जो पैसे उन्हें दरबार से मिलते थे उसमें से कुछ पैसे वह तुलसीदास को मदद स्वरूप दे देते थे
अब आप ही सोचो क्या इस देश में कभी हिंदू मुस्लिम की लड़ाई रही है, अगर रही होती तो क्या मुगल काल में तुलसीदास रामायण लिख पाते
24 घंटे भी नहीं हुए हैं राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को और अब तक लगभग 11 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
ये प्रेस कॉन्फ्रेंस पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली है🔥