Non-Hindutwa religions की खासियत है
कि वहां आप किसी मदद कर रहे हो उसका मज़हब नहीं देखा जाता है
सिख समाज का लंगर चालू है
तो उन्हें कोइ मतलब नहीं कि खाने वाला किसी जाति, धर्म का है
ईसाई धर्म के लोग gift बांट रहे हों
तो उन्हें कोई मतलब नहीं कि सामने वाला कौन है
बुद्ध, मुस्लिम धर्म के लंगर चलाने वालों मे भी ये आदत नहीं कि वो सामने वाले से अपने धर्म का नारा लगवाए
लेकिन 2014 के बाद से हिन्दू धर्म को सावरकर के हिंदुत्व से replace कर दिया गया है
अभी ढेरों हिंदुत्ववादी ये सोचते हैं कि मैं सामने वाले से JSR का नारा बुल वालू
जिससे मेरे धर्म की विचारधारा महान साबित हो जाए
अपने धर्म की टीचिंग को महान साबित करने के लिए कभी भी दूसरों से जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए
अगर आपका आचरण महान है
तो दूसरे खुद तारीफ करते हैं
Non-Hindutwa religions की खासियत है
कि वहां आप किसी मदद कर रहे हो उसका मज़हब नहीं देखा जाता है
सिख समाज का लंगर चालू है
तो उन्हें कोइ मतलब नहीं कि खाने वाला किसी जाति, धर्म का है
ईसाई धर्म के लोग gift बांट रहे हों
तो उन्हें कोई मतलब नहीं कि सामने वाला कौन है
बुद्ध, मुस्लिम धर्म के लंगर चलाने वालों मे भी य��� आदत नहीं कि वो सामने वाले से अपने धर्म का नारा लगवाए
लेकिन 2014 के बाद से हिन्दू धर्म को सावरकर के हिंदुत्व से replace कर दिया गया है
अभी ढेरों हिंदुत्ववादी ये सोचते हैं कि मैं सामने वाले से JSR का नारा बुल वालू
जिससे मेरे धर्म की विचारधारा महान साबित हो जाए
अपने धर्म की टीचिंग को महान साबित करने के लिए कभी भी दूसरों से जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए
अगर आपका आचरण महान है
तो दूसरे खुद तारीफ करते हैं
कटरा प्रखंड के शिवदासपुर पंच���यत में बाढ़ ग्रस्त घोषित होते हुए भी जी आर का पैसा आजतक नहीं मिला। जबकि @ADMaapdaamuzaffarpur के द्वारा आश्वासन दिया गया था कि पैसा दिवाली तक सभी लोगों को चला जाएगा।@Dmmuzaffarpur@COkatra@BDOKatra@Sdmmuzaffarpureast
वरिष्ठ बीजेपी नेता, दो बार के केंद्रीय मंत्री, 6 बार सांसद, 3 बार विधायक और जिनका पुत्र वर्तमान बीजेपी सांसद है वो BJP-नीतीश सरकार में बिहार में व्याप्त अफसरशाही एवं जनप्रतिनिधियों की दशा पर व��यक्तव्य दे रहे है।
अब आप कल्पना करिए कि थाना और ब्लॉक में आम लोगों को कितनी परेशानियों और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है? बिना रिश्वत दिए बिहार में किसी का काम नहीं होता। सार्वजनिक रूप से कोई नहीं कहेगा यहाँ तक की सत्ताधारी विधायक अपने क्षेत्र में मनचाहे अधिकार��यों के तबादलों एवं कार्यों के लिए भेंट चढ़ाते है। सांसद-विधायकों को नीतीश कुमार के परम दुलारे अधिकारी प्रणाम करना तो दूर उनका फोन तक नहीं उठाते। कुर्सी खातिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ख़ुद तो बेबस, बेचारे व असहाय बन गए है लेकिन बिहार पर अपनी बेचारगी क्यों थोप रहे है?
Tired नेता और Retired अधिकारी बिहार के सर्वेसर्वा बन बिहार को पीछे धकेल रहे है। #Bihar #Corruption #Crime
वरिष्ठ बीजेपी नेता, दो बार के केंद्रीय मंत्री, 6 बार सांसद, 3 बार विधायक और जिनका पुत्र वर्तमान बीजेपी सांसद है वो BJP-नीतीश सरकार में बिहार में व्याप्त अफसरशाही एवं जनप्रतिनिधियों की दशा पर व्यक्तव्य दे रहे है।
अब आप कल्पना करिए कि थाना और ब्लॉक में आम लोगों को कितनी परेशानियों और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है? बिना रिश्वत दिए बिहार में किसी का काम नहीं होता। सा��्वजनिक रूप से कोई नहीं कहेगा यहाँ तक की सत्ताधारी विधायक अपने क्षेत्र में मनचाहे अधिकारियों के तबादलों एवं कार्यों के लिए भेंट चढ़ाते है। सांसद-विधायकों को नीतीश कुमार के परम दुलारे अधिकारी प्रणाम करना तो दूर उनका फोन तक नहीं उठाते। कुर्सी खातिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ख़ुद तो बेबस, बेचारे व असहाय बन गए है लेकिन बिहार पर अपनी बेचारगी क्यों थोप रहे है?
Tired नेता और Retired अधिकारी बिहार के सर���वेसर्वा बन बिहार को पीछे धकेल रहे है। #Bihar #Corruption #Crime
अग्निवीर स्कीम बंद करने का वादा, MSP की गारंटी, रेलवे किराये में कटौती, 450 में सिलेंडर... ऐसा होगा कांग्रेस का घोषणापत्र!
#MSP#Congress#LokSabhaElection2024#manifesto
https://t.co/dsEbhZ5SXu
अग्निवीर स्कीम बंद करने का वादा, MSP की गारंटी, रेलवे किराये में कटौती, 450 में सिलेंडर... ऐसा होगा कांग्रेस का घोषणापत्र!
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@NitishKumar जी ये तो बिहार के लिए गर्व की बात है। ये तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। जननायक कर्पूरी ठाकुर बाबू जैसे महान नेता जिसे जनता ने जननायक का उपाधि दिया। ऐसे महान नेता जिसने बिहार की दिशा बदल दिया। अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किए। गरीबों के लिए आरक्षण लागू किए।
मैं देख रहा हूं धीरे-धीरे लोग मनीष कश्यप को भूलते जा रहे हैं
क्या मनीष कश्यप को न्याय मिलेगा?
बड़े-बड़े अपराधी पैसा और पावर के बल पर जमानत से बाहर है तथा खुले में घूम रहे हैं लेकिन मैं आप सभी हिंदुओं से प्रश्न करना चाहता हूं कि मनीष कश्यप ने आखिर वह कौन सा जुर्म किया है कि उस पर NSA हटा देने के बाद भी वह जेल में बंद है और उसे जमानत नहीं मिल रहा है?
क्या यही इस देश का संविधान और कानून व्यवस्था है? क्या इसमें भाजपा का भी कोई राजनीतिक फायदा हैं जिसके लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा है?
*मोदी का दूसरा झटका आ रहा है ।*
*एक्ट 30-ए समाप्त हो सकता है ।*
*मोदी जी हिन्दुओं के साथ किये हुये विश्वासघात को सुधारने के लिए पू��ी तरंह से तैयार हैं।*
*क्या आपने "कानून 30" और कानून "30 ए" सुना है ?*
क्या आप जानते हैं *"30A"* का हिन्दी में क्या मतलब होता है ?
अधिक जानने के लिए देर न करें ⬇️
*30-A* संविधान में निहित एक कानून है।
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने की कोशिश की तो सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा, *"यह कानून हिन्दुओं के साथ विश्वासघात है,* इसलिए अगर यह कानून संविधान में लाया गया, तो मैं कैबिनेट और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा। इसके खिलाफ।
आखिरकार सरदार पटेल की इच्छा के आगे घ���टने टेकने पड़े थे नेहरू को।
लेकिन दुर्भाग्य से पता नहीं.. इस घटना के बाद कुछ महीनों में सरदार वल्लभ भाई पटेल की अचानक मौत हो गई..?
*सरदार पटेल की मृत्यु के बाद, नेहरू ने इस कानून को संविधान में तुरंत शामिल किया।*
*30-ए क्या है, मैं आपको इसकी विशेषताएं बता दूँ!...*
इस कानून के अनुसार - हिंदुओं को अपना "हिन्दू धर्म" सिखाने/पढ़ाने की अनुमत�� नहीं है। *"अधिनियम 30-ए"* उसे अनुमति या अधिकार नहीं देता है.....
इसलिए हिन्दुओं को अपने निजी कॉलेजों में हिंदू धर्म नहीं पढ़ाना चाहिए।
हिंदू धर्म सिखाने/पढ़ाने के लिए कॉलेज शुरू नहीं होने चाहिए। हिन्दू स्कूलों को हिंदू धर्म सिखाने के लिए शुरू नहीं किया जाना चाहिए। एक्ट 30-ए के तहत पब्लिक स्कूलों या कॉलेजों में हिन्दू धर्म संस्कृती पढ़ाने की किसी को अनुमति नहीं है।
यह अजीब लगता है, (30-ए) नेहरू ने अ��ने संविधान में एक और कानून बनाया *"कानून 30"*। इस "कानून 30" के अनुसार मुसलमान, सिख और ईसाई अपनी धार्मिक शिक्षा के लिए इस्लामी, सिख, ईसाई धार्मिक स्कूल शुरू कर सकते हैं।
मुसलमान, सिख और ईसाई अपना धर्म सिखा सकते हैं।
कानून 30 मुसलमानों को अपना 'मदरसा' शुरू करने का पूरा अधिकार और अनुमति देता है और संविधान का अनुच्छेद 30 ईसाइयों को अपने धार्मिक स्कूल और कॉलेज स्थापित करने और पढ़ाने और सिखाने का पूरा अधिकार और अनुमति देता है। फ्री में अपने धर्म का प्रचार करो... इसका दूसरा कानूनी पहलू यह है कि हिन्दू मंदिरों का सारा पैसा और संपत्ति सरकार के विवेक पर छोड़ी जा सकती है, हिन्दू मंदिरों में हिंदू भक्तों द्वा��ा किए गए सभी धन और अन्य दान को राज्य के खजाने में ले जाया जा सकता है।
वहीं मुस्लिम और ईसाई मस्जिदों से दान और भिक्षा केवल ईसाई-मुस्लिम समुदाय के लिए दी जाती है। इस *"कानून 30"* की विशेषताएं इस प्रकार हैं।
इसलिए,*अधिनियम 30-ए"और अधिनियम 30"* हिन्दुओं के साथ जानबूझकर भेदभाव और सोच सझकर व्यवस्थित बहुत बड़ा किया हुआ विश्वासघात है।
यह बात सभी को अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि आज हिन्दू लोक कथाओं तक सीमित है। हिन्दुओं को अपने शास्त्रों का ज्ञान नहीं है। *जानिए*
दूसरों के प्रति जागरूकता आइए हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। पढ़ें, सीखें और आगे फैलाएं..
यह *अनुच्छेद 30-ए* के कारण है
कि हम अपने देश में कहीं भी *भगवद गीता* नहीं पढ़ा सकते हैं।
पढ़ने के बाद सही लगे तो इसे अवश्य फॉरवर्ड करें। ताकि सबको पता चले कि नेहरु ने ऐसा किस लिए और क्यों किया था ?🪷
*यदी आप हिंदू हैं तो कृपया इसे 5 लोगों को जरूर फॉरवर्ड करें���*
*🙏🙏 धन्यवाद 🙏🙏*
*मैं हिन्दू हूं इसलिए भेजा है !!*