@yadavakhilesh भगवान श्री राम समस्त हिंदुओं एवं सनातन धर्म के लिए आस्था एवं संगम का विषय है प्रभु श्री राम मंदिर पर बदनामी का आरोप लगा करके सपा जिसने कभी ₹1 चंदा नहीं दिया कभी दर्शन नहीं करने गए प्राण प्रतिष्ठा में जलन के कारण दर्शन नहीं किए फर्जी आरोप लगा रहे हैं
आतिशी जी जनता सब देख रही है 'सच बदलता नहीं, सिर्फ़ AAP के बयान बदलते हैं' 😂
मैडम जब खुद मुख्यमंत्री थीं, तब खुले मंच से मानती थीं कि तेज़ गर्मी, धूप और हवा के कारण Evaporation से Water Loss होता है। लेकिन आज वही तथ्य विपक्ष में बैठकर झूठे नैरेटिव और प्रोपेगेंडा का हिस्सा बना दिया गया है।
विज्ञान वही है, तथ्य वही हैं, लेकिन AAP की राजनीति के हिसाब से इनके बयान बदल जाते हैं।
सत्ता में रहते हुए Evaporation वैज्ञानिक सच था, और सत्ता से बाहर आते ही वही बात सवाल बन गई!
इतना यू-टर्न, इतनी अवसरवादी राजनीति और इतना दोगलापन आखिर AAP वाले लाते कहाँ से हैं? 🤦♂️
राम मंदिर पर बिना ठोस प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना और फिर बाद में यह कहना कि कोई सबूत नहीं है, सपा की अवसरवादी राजनीति को उजागर करता है।
जब बात राम मंदिर और करोड़ों रामभक्तों की आस्था की हो, तब राजनीतिक लाभ के लिए अफवाहों और आरोपों का सहारा लेना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
सपा ने एक बार फिर दिखा दिया कि उसके लिए तथ्य और सच्चाई से ज्यादा महत्वपूर्ण राजनीतिक सुर्खियां हैं।
आस्था को बदनाम करने की कोशिश करने वाले नेताओं को यह समझना चाहिए कि जनता अब हर बयान और हर यू-टर्न का हिसाब रखती है।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है, उस पर बिना प्रमाण आरोप लगाना सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि करोड़ों भक्तों की भावनाओं पर सवाल उठाना है।
जनता देख रही है कि कौन तथ्य के साथ खड़ा है और कौन सिर्फ राजनीति के लिए आरोपों की खेती कर रहा है।
Source: OpIndia
राम मंदिर पर पहले बिना प्रमाण के आरोप लगाए गए, अब खुद सपा नेता कह रहे हैं कि कोई सबूत नहीं है।
आस्था को राजनीति का हथियार बनाना सपा की पुरानी आदत है।
रामभक्त सब देख रहे हैं, जनता समय आने पर जवाब देगी।
Source: OpIndia
राम मंदिर को लेकर पहले सनसनीखेज आरोप लगाना और फिर प्रमाण न होने की बात स्वीकार करना सपा की राजनीति की सच्चाई सामने लाता है।
तथ्यों के बिना आरोप लगाकर करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को आहत करना किसी जिम्मेदार राजनीतिक दल का आचरण नहीं हो सकता।
जब भी सनातन, राम मंदिर या हिंदू आस्था का विषय आता है, सपा के कुछ नेताओं के बयान अक्सर विवाद और भ्रम पैदा करने वाले नजर आते हैं।
राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आस्था के विषय पर बिना सबूत आरोप लगाना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है।
आज जनता सवाल पूछ रही है कि यदि प्रमाण नहीं थे, तो इतने बड़े आरोप आखिर किस आधार पर लगाए गए थे?
देश की जनता अब आरोपों और तथ्यों के बीच का अंतर समझती है और राजनीतिक अवसरवाद को भी पहचानती है।
Source: OpIndia
राम मंदिर के चढ़ावे पर पहले बड़े-बड़े आरोप लगाए गए, लेकिन अब आरोप लगाने वालों के ही सुर बदलते दिख रहे हैं। बिना ठोस प्रमाण करोड़ों रामभक्तों की आस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं। राजनीतिक लाभ के लिए लगाए गए आरोप जनता देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी।
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राम मंदिर के चढ़ावे पर लगाए गए बड़े आरोप अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। बिना ठोस प्रमाण करोड़ों रामभक्तों की आस्था पर सवाल उठाए गए। जनता सब देख रही है और आस्था पर राजनीति करने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
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राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर लगाए गए आरोपों पर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आरोप लगाने वाले ही अपने दावों से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। बिना ठोस प्रमाण के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और मंदिर की व्यवस्था पर सवाल खड़े करना उचित नहीं है। राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है। सत्य तथ्यों से तय होता है, आरोपों से नहीं। जनता सब देख रही है और समय आने पर अपना निर्णय भी देगी।
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राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में बिना ठोस साक्ष्यों के चढ़ावे में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास भी है। यदि आरोपों में दम होता, तो प्रमाण सामने आते। राजनीतिक स्वार्थ के लिए राम मंदिर और सनातन आस्था को विवादों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता तथ्यों और सच्चाई के आधार पर निर्णय लेना जानती है।
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राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पर पहले बड़े-बड़े आरोप लगाए गए, लेकिन अब खुद सपा नेताओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं।
जब प्रमाण ही नहीं हैं, तो करोड़ों रामभक्तों की आस्था पर सवाल क्यों उठाए गए?
सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए सनातन और राम मंदिर को निशाना बनाना सपा की पुरानी रणनीति रही है।
झूठे आरोपों से न सच बदलता है, न जनता का विश्वास डगमगाता है।
रामभक्त सब देख रहे हैं
आस्था पर राजनीति करने वालों को जनता जवाब जरूर देगी।
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गाजीपुर में कमलेश बिंद से जो लोग सबसे ज़्यादा परेशान थे, वो इस पूरी बहस में कहीं नहीं हैं।
वो ठेला वाले जो हर हफ्ते वसूली देते थे।
वो दुकानदार जो सिर झुकाकर जीते थे।
वो लड़कियां जो स्कूल जाते हुए डरती थीं।
विनीत राय का परिवार जिसकी हत्या ने यह पूरा मामला शुरू किया।
इनके लिए कोई जाति का शोर नहीं। कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं।
योगी सरकार का जीरो टॉलरेंस इन्हीं के लिए बना है। यही लोग हैं जिन्हें एनकाउंटर से राहत मिली। जो शोर मच रहा है वो इनके लिए नहीं है। कभी था भी नहीं।
#ZeroToleranceOnCrime
गटर के कॉकरोच ढपली गैंग ...
RSS मुर्दाबाद के नारे लगाने वाले
तुम लोग डरते हो RSS से 🤣
क्योंकि RSS के होते तुम भारत को नेपाल नहीं बना सकते.…...
वह तो शुक्र मनाओ वहां पुलिस थी वरना वहीं तुम कीड़ों की चटनी बना देते राष्ट्रवादी..🤣🤣
AAP-दा वाले अक्सर जनता को भ्रमित कर के खुद फायदे उठाते हैं; संजीव झा का मकान भी सरकारी जमीन पर बताया जा रहा है; पहले खुद की जांच करें, फिर दूसरों पर आरोप लगाएँ।
आतिशी जब खुद मुख्यमंत्री थीं तब कह रही थीं कि Evaporation से Water Loss होता है, लेकिन अब उसी मुद्दे पर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।
जब सत्ता में थीं तब एक बात, और आज विपक्ष में आकर दूसरी बात!
वैज्ञानिक रूप से भी यह सिद्ध है कि तेज़ गर्मी, धूप और हवा के कारण जल सतह से पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है, जिसे Evaporation कहते हैं। इसी प्रक्रिया से जलाशयों और नहरों में Water Loss होता है।
AAP वालों, इतना दोगलापन लाते कहाँ से हैं? 🤦♂️
आतिशी जब मुख्यमंत्री थीं तो कहती थीं कि तेज़ गर्मी, धूप और हवा से जल सतह से Evaporation होकर पानी कम होता है।
अब वही लोग विपक्ष में आकर उसी प्रक्रिया पर विवाद फैला रहे हैं दोगलापन साफ दिखता है।
वैज्ञानिक रूप से Evaporation जलाशयों और नहरों में पानी की हानि का प्रमुख कारण है।