अगर आपको लगता है कि एक बच्चे को पकड़कर, उससे अपनी बात कहलवाकर इस आंदोलन को रोक देंगे, तो ऐसा नहीं होने वाला। इसमें कोई एक चेहरा हर्ष दुबे नहीं था, बल्कि लाखों लोग शामिल थे और यह उनकी लड़ाई है।
इसीलिए RHA Reforms की माँगें जब तक पूरी नहीं होंगी, यह आंदोलन चलता रहेगा।
श्री नेगोशिएशन प्रताप @JPNadda जी,
सादर चरणस्पर्श! अभी आपका यह पोस्ट प्राप्त हुआ और मन आह्लादित हो गया कि सरकार ने आदरणीय हर्ष भाई जी की चिट्ठी पर (जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं था) विचार किया और आप पुनः मिलेंगे। आपसे एक त्रुटि हो गई कि आपने आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे श्री आनंद स्वरूप जी को साथ नहीं लिया!
आपने पहले तो (अपने ही द्वारा प्लांटेड) आदरणीय हर्ष भाई को किडनैप करवाया (जैसा कि आदरणीय हर्ष जी ने वीडियो में कहा था), और फिर नीली कलम से दो कौड़ी की डिमांड वाली चिट्ठी लिखवाई, और अब आप सौहार्दपूर्ण वार्ता भी कर रहे हैं।
यह पोस्ट पाते ही @RHAreforms वाले सारे लोग, इंक्लूडिंग @neha_laldas, लिखना छोड़ चुके हैं और उस चिट्ठी का प्रिंट आउट ले कर उत्तर प्रदेश के गाँवों में ड्रोन से गिरा रहे हैं कि सरकार ने हमारी माँगें मान ली!
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यदि सरकार को ऐसा कोई भी भ्रम है तो कोई टेबलेट खा लो। ये पुरानी और सर्वविदित तकनीक है: अपने ही द्वारा प्लांटेड व्यक्ति को नेता मान कर नेगोशिएट करने का स्वाँग रचो, फिर वास्तविक माँगों को डकार जाओ। मैं आपसे वादा करता हूँ कि मुझे आपके साथ बैठना नहीं पड़ेगा और आप हमारी माँगें भी मानोगे।
थोड़ी भी लज्जा बची है और पार्टी की थोड़ी भी चिंता है, तो खेल खेलना बंद करो। लोग ब्रजेश पाठक वाले स्टंट से ही हर्ष को नकार चुके हैं।
@JPNadda अगर आपको लगता है कि एक बच्चे को पकड़कर, उससे अपनी बात कहलवाकर इस आंदोलन को रोक देंगे, तो ऐसा नहीं होने वाला। इसमें कोई एक चेहरा हर्ष दुबे नहीं था, बल्कि लाखों लोग शामिल थे और यह उनकी लड़ाई है।
इसीलिए RHA Reforms की माँगें जब तक पूरी नहीं होंगी, यह आंदोलन चलता रहेगा।
राजपूत समाज तो एक हो गया है मोदी की अकड़ तोङ़ने के लिए, ✊
क्या सम्पूर्ण सवर्ण समाज गुलामी से बाहर निकलकर एक हो पाएंगा, अपना भविष्य बचाने के लिए काले कानूनो के खिलाफ, मोदी को उखाड़ फैकने के लिए तैयार हो पायेगा...?
महिपाल सिंह मकराना का शंखनाद.... 🔥
They are not detaining him. They’re taking him to safety. But an uneducated brute like you wouldn’t understand the difference because facts don’t serve your purpose. You only need propaganda!
कृति सनन का चरित्र हनन सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वो पिछड़े समाज से आती हैं, अगर किसी वंचित वर्ग के पास कपड़े नहीं हैं पहनने को तो क्या अपर कास्ट उसका सोसन करेंगे? मेरा तमाम अपैरल शोरूम्सस से निवेदन है की सनन बहन को सस्ते या मुफ्त कपड़े मुहैया करवाये जायें और ब्राह्मणों को ऑर्डर दे रहा हूँ कि जो कपड़ा जनेऊ में वेस्ट करते हो, उसकी साड़ियां बनवा कर अनुसूचित जातियों की बहनों मातायों को बांट दें। जय अंबेडकर जय मराठा जय नीले गधे
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री जी ने इतिहास और जाति को लेकर कहा कि भारत के इतिहास में OBC और SC-ST समुदायों से आने वाले कम से कम 100 बड़े राजा हुए हैं।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “‘हज़ारों साल से रोटी नहीं मिली’ जैसे दावे करने वाले पहले इतिहास पढ़ें। जब ये लोग राजा थे तो पानी कहाँ से पीते थे? राजा थे लेकिन पानी नहीं पीते थे? ये कैसा मजाक है!”
अग्निहोत्री जी ने कहा कि ऐसे झूठे दावों और पूर्वाग्रहों से पहले इतिहास समझिए, पढ़िए-लिखिए और बुद्धि के दरवाजे खुले रखकर बात कीजिए।
उस, बेगूसराय के जहाँ — दिल्ली सल्तनत के तुगलक काल में जब क्रूर सेनापति मलिक बया (सैयद इब्राहिम अली) ने बेगूसराय के चमथा पर हमला किया, तो यहाँ के भूमिहार ब्राह्मण वीरों ने उसे युद्ध में मार गिराया। उसका मकबरा आज भी बिहार शरीफ की पीर पहाड़ी पर है।
ये वही चमथा-बलिया है जो कभी मुगलों के कंट्रोल में नहीं आया। यहाँ के जमींदार इतने संगठित थे कि मुगल फौज यहाँ से एक रुपया लगान नहीं वसूल पाई।
फिर अंग्रेज आए। नील की खेती और भारी टैक्स थोपा।
बेगूसराय ने बगावत कर दी। गांधी जी के नो-टैक्स आंदोलन में चमथा के लोगों ने अंग्रेजों को एक पाई देने से मना कर दिया।इसी बागी तेवर के कारण बिहट को बिहार का लिटिल मॉस्को और बेगूसराय को बिहार का लेनिनग्राद कहा गया। ये जमीन झुकी नहीं, आज भी नहीं झुकती।
वही से आते है अजीत भारती, पेशवा के अल्मामाटा सैनिक स्कूल के साथी,
OBA SAINIK SCHOOL Alma Mata
#AjeetBharti 🚩🚩🚩🚩🚩
#PESHWA
#sainikschool
#OBASAINIKSCHOOL
दिल्ली में जिस तरह से भारी बारिश के चलते आप वाले वीडियो शेयर कर रहे हैं,
लग रहा है वो दिल्ली को स्वर्ग बना कर गए थे, और नई सरकार ने आकर दिल्ली को नरक बना दिया।
अरे मूर्खो, अपने गिरेबान में भी तो झांक लो, की तुमने क्या किया है।
तुम सबके सब निकम्मे हो,
बीजेपी की सरकार जाते ही वो लोग भी ऐसे ही वीडियो शेयर करेंगे, जैसे ससुरे स्वर्ग बना कर जाएंगे।
धन्यवाद आतिशी जी,
आपके द्वारा बनाई गई विकसित दिल्ली में रेखा गुप्ता जी ने आते ही फावड़ा कुदाल लेकर सारी नालियाँ जाम कर दीं है।
हम उनके द्वारा किए गए इस कृत्य की निंदा करते हैं।
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।
मुर्दा है वो, जो घर की बहन-बेटियों पर बात आ जाए तो भी चुपचाप सहता रहे। हमारी परंपरा ने हमें सिखाया है कि अगर कोई दुर्योधन किसी द्रौपदी को अपने जंघे पर बिठाने की बात करे तो तुम उसकी जंघा चीर डालो। अगर कोई रावण किसी सीता को हर ले जाए तो समंदर पार करके उसकी नाभि में तीर मारो।
जब बात घर की बहन-बेटी पर आ जाए तो प्रतिकार करना चाहिए, संविधान और क़ानून से भी ऊपर आता है स्वाभिमान। जिसका स्वाभिमान मर गया, उसके लिए क्या करेगा क़ानून और क्या करेगा संविधान। अजीत भारती की बहन पर टिप्पणी हुई। उन्होंने टिप्पणी करने वाले को उसी की भाषा में जवाब दिया। सामान्य वर्ग की बहन-बेटियों को भोग की विषय-वस्तु समझकर माँगने वालों को उसकी औक़ात दिखाई। यही होना चाहिए।
स्वाभिमान, अहंकार नहीं है। "मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूँ" - ये अहंकार है। "मेरी बहन-बेटियों का सम्मान मेरे लिए सर्वोपरि है" - ये स्वाभिमान है। "मेरी बहन-बेटियों पर टिप्पणी करने वाले के मुँह पर थूक दूँगा" - ये उस स्वाभिमान का प्राकट्य है। अगर उस प्राकट्य की परिणति एकतरफ़ा SC/ST एक्ट और फिर जेल है तो वही सही।
जहाँ तक चंद्रशेखर 'रावण' की बात है, उसने वाल्मीकि समाज की लड़की रोहिणी घावरी को धोखा दिया है। बेचारी कई महीनों से आवाज़ उठा रही है न्याय के लिए, कोई नहीं सुन रहा। कोई एक्ट नहीं लग रहा। कारण - चंद्रशेखर 'रावण' के पास वोट बैंक है, इसीलिए वह अधिक दलित है। रोहिणी घावरी सफाईकर्मी की बेटी है, इसीलिए उसका दलित वाला सर्टिफिकेट आधी साइज का ही है।
बहन-बेटी भी खैरात में चाहते हैं, कम अंक लाकर भी एडमिशन-नौकरी पाने से मन नहीं भर रहा।
सवर्णों को खुद से ज्यादे पार्टी और उनके नेताओं के भविष्य की चिंता है |
भाजपा हट गया तो क्या होगा???
अरे हमारा क्या होना है अभी सोनिया का लड़का बेरोजगार है कल अमित शाह और राजनाथ सिंह का लड़का बेरोजगार हो जाएगा....
हम पहले भी अपने मेहनत से कमा खा के एक वर्ग जो खैरात मे पल रहा है उसका पेट पालते है, आगे भी पालेंगे |
हमे कौन सा किसी सरकार से कुछ मिलना है, हमे तो बस अपना पीठ मज़बूत रखना है क्यूंकि जो भी सरकार आएगी हमारे ही पीठ पे मुक्का गिरना है....
सामान्य वर्ग गांव गांव के लोग चिंतन मनन करना शुरू कर दिए हैं...
Sc/St एक्ट, UGC प्रावधान और आरक्षण को लेकर
IT सेल के दल्ले जो सोशल मीडिया पर बोल रहे है कि योगी को हराने के लिए ये आंदोलन शुरू किया गया है, ये हरामखोर पिछले 7 महीने से UGC प्रावधान के फायदे गिना रहे हैं।
आंदोलन हैं दोस्तों,
बिना लाठियों के कोई भी आंदोलन सफ़ल नहीं होता है, और भीमटो की सरकार सामान्य वर्ग के आंदोलन को बर्बरता पूर्वक दबाने में लगी हुई है।
इस आंदोलन की उपलब्धि ये हैं कि गांव में बुजुर्ग भी अब बैठकर इस आंदोलन को लेकर बहस शुरू कर चुका है।
हर लाठियों का हिसाब होगा.............✋
सामान्य वर्ग ओ वर्ग हैं जो सरकार का लाभार्थी नहीं हैं, सरकार के अनुकम्पा का मोहताज नहीं है। हाँ, सरकार को बनाने और बिगड़ने की हैसियत रखता है।
लालू के जिन्न को कैसे बोतल में बंद किया ये सामान्य वर्ग की हैसियत हैं। मायावती के जिन्न को हमेशा के लिए सुला दिया।
अखिलेश यादव आज 10 साल से सत्ता से बाहर एक और मौका की तलाश कर रहे है। कांग्रेस केन्द्र में सत्ता से बाहर 12 साल से हैं।
ये सामान्य वर्ग की ताकत है....
और सामान्य वर्ग इसी विमर्श को अब नए ढंग संजोने की तैयारी शुरू कर चुका है। अगर 10% वाले अखिलेश यादव अपनी सरकार का समीकरण बना सकते है तो फिर सामान्य वर्ग क्यों नहीं ??
12 % वाली मायावती दंभ भर सकती हैं तो सामान्य वर्ग क्यों नहीं ??
4%वाला चिराग पासवान अगर सत्ता का मौज ले सकता है तो सामान्य वर्ग क्यों नहीं ??
सामान्य वर्ग को अब समय के हिसाब से सोचना है, हर नेता को औकात दिखानी है कि तुम गटर के की ड़े हो, तुम्हारी औकात सामान्य वर्ग के बिना शून्य हैं।
विकल्प के रूप में "निर्दलीय" चुनिए जो सामान्य वर्ग की आवाज को उठा सके.....
बाकि योगी उपयोगी नहीं है सामान्य वर्ग के लिए , क्योंकि योगी महाराज ने अयोध्या के लुटेरों को बचाकर अपनी कमजोरी केंद्र सरकार के सामने झुककर प्रकट कर चुके हैं...
योगी जी का स्वतंत्र चिंतन राष्ट्र को लेकर शून्य है...
योगी जी चुनाव हारेंगे नहीं, चुनाव हार चुके हैं उत्तर प्रदेश का, सोचना है कि उत्तर प्रदेश के सामान्य वर्ग को कि ओ आज की परिस्थितियों में दलगति राजनीति को ठोकर मारकर निर्दलीय राजनीति को आगे बढ़ाए......
हर दल को, हर नेता को अपनी जाति की चिंता पहले हैं, तो सामान्य वर्ग को अपनी चिंता करनी चाहिए..
5 साल के लिए हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की पोटली बनाकर खूंटी पर टांग कर सामान्य वर्ग को खुलकर "निर्दलीय" राजनीति को बढ़ावा देना चाहिए..
30% सामान्य वर्ग हैं, और सबका साझा हित हैं अन्यायकारी कानूनों को खत्म करवाना तो फिर दिक्कत कहा है ??
अजीत भारती जितना सभ्य तरीके से अपने समाज की बहन बेटियों का बचाव किया है। वो औसत बेगूसराय के लोग नहीं करते है चाहे वो किसी समाज से हो। आप अजीत भारती के कृतज्ञ हो कि वो एक संविधान का पालन करने वाला नागरिक है, वर्ना जिस हिसाब का कमेन्ट उसके बहन के लिए किया गया उसपे