आज उन्नाव की उस बेटी के साथ फिर से अन्याय हुआ है।
इस बार अपराधी कोई इंसान नहीं, हमारा सिस्टम है।
और ऐसे अपराध अन्याय पर हमारा system चुप्पी साध लेता है ! आख़िर क्यो?
न्याय की उम्मीद कोई अब और कहाँ से करे ? #justiceForUnnaoVictim
परिवार फर्स्ट, जीजा फर्स्ट, भांजा फर्स्ट और अब मां फर्स्ट
चिराग पासवान के बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट का सच।
चिराग पासवान अब अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजने की तैयार में।
UP : जौनपुर में 75 साल के शख़्स ने 35 साल की महिला से की शादी, सुहागरात में शख़्स की हो गई मौत
◆ पत्नी ने बताया, "हम देर रात तक बातें करते रहे, सुबह उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और अस्पताल लेने जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया"
◆ मृतक शख्स संगरू राम के भतीजों ने मामले को संदिग्ध बताते हुए अंतिम संस्कार रुकवा दिया है
#UttarPradesh | #Jaunpur | Jaunpur | Uttar Pradesh
सरकारी स्कूल में नई शिक्षा नीति लागू,
बच्चे मिड डे मील भी खाएं और बर्तन भी धोएं।
📍लोकेशन: सेक्टर 128, नोएडा।
वीडियो में बच्चे बर्तन माँज रहे हैं, शिक्षा विभाग मुँह छुपा रहा है।
शायद अब ये भी कहा जाएगा- श्रम ही साक्षरता है।
वो सिर्फ एक सैनिक नहीं था,
वो भारत माता की चुपचाप गरजती हुई तलवार था।
ये सच्ची कहानी पढ़कर आपके “होश उड़” जाएंगे।
पहले स्पष्ट इसलिए कर दिया ताकि आप इसे फिल्मी कहानी ना समझ बैठें। लेख का एक एक शब्द सच है।
वर्ष 2003, शोपियां, कश्मीर...
एक नौजवान कश्मीरी युवक—
“इफ्तिखार भट्ट” कंधे तक लंबे बाल, कंधों पर पारंपरिक “फेरन” और आँखों में आग लिए हिजबुल मुजाहिदीन के दरवाजे पर खड़ा था।
पूरा लेख कमेंट में पढ़िए.... 👇👇
🔹एक चुटकी ज़हर प्रतिदिन🔹
आरती नामक एक युवती का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास के साथ अपने ससुराल में रहने लगी।
कुछ ही दिनों बाद आरती को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। सास पुराने ख़यालों की थी और बहू नए विचारों वाली। आरती और उसकी सास का आये दिन झगडा होने लगा।
दिन बीते, महीने बीते. साल भी बीत गया। न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती और न आरती जवाब देना। हालात बद से बदतर होने लगे। आरती को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी।
मोदी जी, थोड़ा तो सोच समझ कर बोला कीजिए. इस देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं आप - बदज़ुबान ट्रोल नहीं
आज बाबासाहेब की जयंती पर भी आपसे मर्यादा की उम्मीद करना बेमानी है - आज भी आप कांग्रेस को ही कोस रहे हैं और एक समुदाय विशेष को ‘पंचर बनाने वाला’ बुला रहे हैं
आप ख़ुद तो हरियाणा में रैली संबोधित करने के लिए निकल लिए, आपके अंदर इतनी भी तमीज़ नहीं कि बाबासाहेब को सेंट्रल हाल में पुष्पांजलि देते. सब लोग आए लेकिन आपको तो आज भी भाषणवीर बनना ज़्यादा प्रिय था
आपके गृह मंत्री जिनको ‘अंबेडकर का नाम जपना फैशन’ लगता है - वो भी नदारद थे
पहले बाबासाहेब का सम्मान करना सीखिए, उनके संविधान को खत्म करने के लिए हर हथकंडा अपनाना बंद कीजिए
आप हमें क्या पाठ पढ़ायेंगे?
श्री खरगे जी हमारे चुने हुए सम्मानित अध्यक्ष ख़ुद दलित समाज से आते हैं. अपने दम पर, लगन और मेहनत से यहाँ तक पहुँचे हैं. छकड़ा भर जगह सरकारें हैं आपकी एक जगह दलित मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना पाए?
सारी दुनिया जानती है RSS में दलितों का क्या हाल है. बजाय ज्ञान देने के यह बताइए कि आज तक ठाकुर और ब्राह्मणों को छोड़कर एक भी RSS प्रमुख किसी और जाति का क्यों नहीं बना?
आपका इतिहास सियाह है. लिखित दस्तावेज़ बताते हैं कि बाबासाहेब को चुनाव हराने में आपके आराध्य सावरकर ने अपने धुर विरोधियों से हाथ मिला कर इस साज़िश को अंजाम दिया
यह कौन नहीं जानता कि आपके जनसंघ और RSS के पुरखों - गोलवलकर, सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ना सिर्फ बाबासाहेब को अपशब्द कहे बल्कि उनकी तस्वीरें और संविधान की प्रतियां भी जलाईं
सच तो यह है कि आप लोगों को आज भी बाबासाहेब के समतामूलक समाज से चिढ़ है, तभी तो आपके तमाम नेताओं, सांसदों और मंत्रियों के साथ ही संघ ने ना जाने कितनी बार संविधान को बदलने की बात कही है ।
अच्छा होगा - अगर आज के दिन आप आत्ममंथन करते - और सोचते कि आप नफ़रत और विभाजन के जिस रास्ते पर मेरे देश को ले जा रहे हैं - वो बाबासाहेब के विचारों, उनकी सोच और उनके बनाए संविधान से कितनी दूर है ।
कुछ नहीं तो आज तो भाषण के बजाय बाबासाहेब को प्राथमिकता देते!
: @SupriyaShrinate