सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं और देश चुप है
लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद, पर्यावरणविद और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक एक बार फिर आमरण भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए है। ताज़ा जानकारी के अनुसार उनकी भूख हड़ताल दो सप्ताह से अधिक समय पार कर चुकी है और उनकी सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन कई किलो कम हो चुका है तथा डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश इस आंदोलन को उतनी गंभीरता से देख रहा है, जितनी किसी लोकतांत्रिक समाज में देखनी चाहिए?
सोनम वांगचुक कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा सुधार, 'आइस स्तूप' जैसी पर्यावरणीय तकनीक और स्थानीय विकास के लिए दशकों तक काम किया है। फिल्म 3 Idiots के 'फुंसुख वांगड़ू' का किरदार भी काफी हद तक उनके जीवन से प्रेरित माना जाता है। Sonam Wangchuk
इस बार उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही की मांग से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा है कि यदि देश के बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा तो भारत का भविष्य भी सुरक्षित नहीं होगा। वे चाहते हैं कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से जवाब दे और जिम्मेदारी तय करे।
भूख हड़ताल के दौरान उन्होंने लोगों से भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि उन्हें "आधुनिक गांधी" या "हीरो" न कहा जाए, बल्कि हर नागरिक खुद अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के लिए खड़ा हो। उनके शब्द थे कि "अपना नायक स्वयं बनिए।"
उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार उनका रक्तचाप प्रभावित हुआ है, वजन सात किलो से अधिक घट चुका है और डॉक्टर लगातार स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने से इनकार किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक व्यापक बहस को जन्म दिया है। क्या देश केवल तब जागता है जब कोई मुद्दा राजनीतिक लाभ-हानि से जुड़ जाता है? क्या शिक्षा, पर्यावरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे विषय राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में नहीं होने चाहिए? किसी भी आंदोलन से सहमत या असहमत होना अलग बात है, लेकिन एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को सुनना और उस पर संवाद करना लोकतंत्र की मूल भावना है।
सवाल केवल सोनम वांगचुक का नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारत में शांतिपूर्ण विरोध और जनहित के मुद्दों पर उठाई गई आवाज़ें पर्याप्त ध्यान पा रही हैं, या फिर वे शोर-शराबे वाली राजनीति के बीच दबती जा रही हैं। लोकतंत्र में किसी भी नागरिक की आवाज़ का मूल्य उसकी राजनीतिक पहचान से नहीं, बल्कि उसके मुद्दे की गंभीरता से तय होना चाहिए।
59 साल के सोनम वांगचुक देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो चुका है, लेकिन मेलोडी मोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
'पहुँचो जंतर मंतर'
: @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP
पेपर लीक से करोड़ों युवाओं का भविष्य तबाह हो रहा है। इसके ज़िम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए सोनम वांगचुक जी और छात्र 16 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। हम युवाओं के हक की इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। भाजपा की इस तानाशाह सरकार को झुकना ही होगा।
भारतवासियों के नाम संदेश,
हर गुजरते दिन के साथ हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।
मुझे नहीं पता कि Sonam Wangchuk सर और कितनी देर तक इस संघर्ष को जारी रख पाएँगे। वे हमेशा कहते हैं कि वे ठीक हैं, लेकिन जो लोग उनके साथ बैठे हैं, वे उनकी बिगड़ती हालत को लेकर बेहद चिंतित हैं।
यह वही व्यक्ति हैं जो आराम, सम्मान और सुविधाओं से भरी ज़िंदगी चुन सकते थे। लेकिन रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित इस इंसान ने देश के बच्चों, युवाओं और भारत के भविष्य के लिए अपना स्वास्थ्य दांव पर लगा दिया है। वे उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं जिसे वे टूटी और भ्रष्ट मानते हैं, और उन छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं जिनकी मौतों ने पूरे देश को झकझोर दिया।
यह सोचकर मन व्यथित होता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि भारत का एक सम्मानित नागरिक, जिसने दुनिया में देश का नाम रोशन किया, उसे अपनी ही सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए आमरण अनशन का सहारा लेना पड़े?
यह मेरा भारत नहीं है। यह वह भारत नहीं हो सकता, जिसकी हमने कल्पना की थी।
कहीं न कहीं हमने महसूस करना छोड़ दिया है। जहाँ आक्रोश होना चाहिए था, वहाँ खामोशी है। जहाँ संवेदना होनी चाहिए थी, वहाँ उदासीनता है। हम दूसरों के दर्द के सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं। हमने मान लिया है कि कोई और बोलेगा, कोई और आगे आएगा।
मेरे पास अब शब्द नहीं बचे।
मुझे क्षमा कीजिए, सोनम सर।
अगर सचमुच ऐसा समय आ गया है कि आपकी ईमानदारी, आपकी प्रतिष्ठा और आपकी आवाज़ को सुनने के लिए आपको अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़े, तो यह हम सबके लिए आत्ममंथन का विषय है। हमने संवेदनशीलता की जगह अहंकार, करुणा की जगह सत्ता और अंतरात्मा की जगह उदासीनता को सामान्य मान लिया है।
20 जुलाई शायद वह आख़िरी अवसर हो जब देश अपनी आवाज़ बुलंद कर सके।
अगर आज भी हम खड़े नहीं हुए, तो इतिहास यह नहीं पूछेगा कि सोनम वांगचुक ने भारत के लिए क्या किया। इतिहास यह पूछेगा कि जब सोनम वांगचुक को भारत की ज़रूरत थी, तब भारत ने क्या किया?
- @SauravDassss
अन्ना हजारे के 11 दिन के अनशन में पूरी कांग्रेस
सरकार हिल गई थी
आज सोनम वांगचुक के अनशन का 16वा दिन है लेकिन सरकार को कुछ फर्क नहीं पड़ रहा
आज का मीडिया पूरी तरह से बिक चुका है
"अखिलेश यादव जी व राहुल गांधी जी अगर 20 जुलाई को नहीं आते है तो ये अच्छी बात नहीं होगी,
यहां बात छात्रों के भविष्य को लेकर है,सबको आना चाहिए "
: सोनम वांगचुक सर 🥺
At Jantar Mantar 📍
15 दिन से सोनम वांगचुक इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन सत्ता के दरवाज़े बंद हैं।
क्या अहंकार इतना बड़ा हो गया कि देश के एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद से दो मिनट बात करना भी मंज़ूर नहीं।
अंग्रेज़ों पर इतिहास में कई मौकों पर आंदोलनकारियों से बातचीत करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज सवाल यह है कि लोकतांत्रिक सरकार संवाद से क्यों बच रही है।
जनता ने सरकार चुनी थी, ख़ामोशी नहीं।
"सोनम वांगचुक जी से हमारा विनम्र आग्रह है कि वो अपना अनशन तोड़ दें"
◆ सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा
◆ जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 16 दिनों से लगातार अनशन कर रहे हैं
@yadavakhilesh | #AkhileshYadav | #SonamWangchuk | Akhilesh Yadav | Sonam Wangchuk
देश के कोने कोने से लोग वीडियो बनाकर सोनम वांगचुक सर को सपोर्ट कर रहे हैं,
आप भी करिए,
इस पोस्ट को खूब शेयर करिए,
खुद भी सोशल मीडिया पर लिखकर सपोर्ट करें 🥺
"कॉकरोच जनता पार्टी को समर्थन करो या ना करो, फर्क नहीं पड़ता, लेकिन सोनम वांगचुक का समर्थन बहुत जरूरी है वरना तुम्हारे लिये आगे कोई नहीं लड़ेगा।"
पहली बार इस चोटी वाले स्वर्ण ने सही बोला है 👇👇👇
"राहुल गांधी को सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करना चाहिए"
◆ शिवसेना UBT के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा
◆ जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 16 दिनों से लगातार अनशन कर रहे हैं
@uddhavthackeray | Sonam Wangchuk | #RahulGandhi | Rahul Gandhi
सोनम वांगचुक के लिए दिल से बुरा लगता है हम किसी पार्टी को सपोर्ट नहीं करते लेकिन ये बंदा पिछले 15 दिन से भूखा है आपके बच्चों के लिए लेकिन हम लोग उसके साथ खड़े होने की भी हिम्मत नहीं दिखा रहे...
सरकार से निवेदन है उनकी बात सुनी जाए..🙏
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66