कमलेश तिवारी को शायद मालूम नहीं है कि दूध निकालना मेहनतकश और सम्मानजनक काम है, और यह पाखंड के जरिए भोले-भाले लोगों को मूर्ख बनाकर शोषण द्वारा जीवन-यापन करने से बेहतर है।
मिर्जापुर से हमने कुत्ते के काटने से कुत्ते जैसा भौकने वाले करन को लेकर स्टोरी की। स्टोरी पब्लिश हुई तो कई डॉक्टर्स ने आपत्ति जताई। कहा कि रेबीज होने के बाद बचने का चांस 0% होता है। मतलब मौत तय ��ै। इस बच्चे को रेबीज नहीं था, कुछ लोगों ने कमेंट में लिखा- ये बच्चा नाटक कर रहा था।
अब इन डॉक्टर साहब और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग यह वीडियो देख लें। पहली बार बच्चे को कछवां बाजार के क्रिस्चियन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया, वहां जवाब दे दिया गया। परिवार मिर्जापुर जिला हॉस्पिटल लेकर गया, वहां के डॉक्टरों ने कहा कि इसे तो रेबीज हो गया है, यहां इलाज नहीं होगा, वाराणसी लेकर जाओ।
परिवार जैसे-तैस�� वाराणसी के बीएचयू में पहुंचा। दो डॉक्टर्स ने देखा। हाथ खड़े कर दिए। कहा कि इसे ले जाकर किसी काल कोठरी में बंद कर दीजिए। ये 3-4 दिन में खत्म हो जाएगा। यहां इसका इलाज संभव नहीं है।
इसके बाद परिवार के लोग रामा हॉस्पिटल, कबीर हॉस्पिटल लेकर गए। विशेषज्ञों ने देखा लेकिन जवाब एक जैसा ही। कहा- ये ठीक नहीं होगा, इसकी मौत तय है। अब इससे दूर रहिए, वरना काट लेगा।
करन के पिता भाई लाल इन चीजों से टूट से गए। वह हमसे बोले कि जब ये सुना कि ये नहीं बचेगा, काल कोठरी में बंद कर दीजिए, तब हम हिम्मत ही छोड़ दिए। हार से गए। हालांकि हम इसे लेकर इसके मामा के घर गए। वहां सीएसची हरहुआ में डॉक्टर साहब ने रेबीज का टीका लगाना शुरू किया। वहीं से ठीक हो गया।
अब आप लोग बताओ, अगर उसे रेबीज नहीं था तो आखिर डॉक्टरों ने मना क्यों किया? उन्हें तो समझकर इलाज करना चाहिए था न? अगर उनके कहने से ये परिवार बच्चे को एक अंधेरे कमरे में बंद कर देता तो बच्चा ऐसे ही मर जाता।
हम तो यही कहेंगे कि आप लोग इस बच्चे पर अध्ययन कीजिए। पता करिए कि कुत्ते की तरह भौकने के बाद, लार टपकने के बाद, लोगों पर हमला करने के बाद भी करन कैसे ठीक हो गया। क्या लक्षण आ जाने के बाद भी अगर रेबीज का टीका लगवाया जाए तो ठीक हो सकता है। समस्त सवालों के जवाब पर काम करिए। हमारा काम था इस मसले को सबके सामने लाना, हमने अपने हिस्से का काम कर दिया।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस 2024 में सफल सभी अभ्यर्थियों को बहुत-बहुत बधाई एवं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएं!
पिछले 12 वर्षों में यह बेटियों की सबसे बड़ी सफलता है। इस बार चयनित 932 अभ्यर्थियों में से 319 (34.22%) बेटियां हैं। विशेषकर, इस वर्ष के टॉप-10 में टॉपर नेहा पांचाल सहित 6 बेटियों का स्थान प्राप्त करना, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। डिप्टी कलेक्टर के 37 में से 21 पदों पर बेटियों का चयन और डिप्टी एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी उनकी मजबूत भागीदारी-न केवल गर्व की बात है, बल्कि क्��ांतिज्योति माता सावित्रीबाई फूले जी के उस ऐतिहासिक कदम का परिणाम है, जब उन्होंने भारत में बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोला था।
यह अवसर संविधान निर्माता, शोषितों के मुक्तिदाता, नारी उद्धारक, आधुनिक भारत के शिल्पकार परम पूज्य ��ाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के उस महान संविधान की जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसमें उन्होंने लिंग, जाति और धर्म के हर भेदभाव को समाप्त कर एक समतामूलक राष्ट्र की नींव रखी।
जय भीम! जय फूले!जय संविधान!जय भारत!जय उत्तर प्रदेश!
SIR के नाम पर विपक्षी वोटरों के नाम कैसे काटे जा रहे हैं, ज़रा देख लीजिए।
पुरानी सूची में नाम मौजूद था,
आधार कार्ड भी है,
फिर भी वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया गया है।
चुनाव आयोग से सवाल है —
क्या ये लोग अचानक बांग्लादेशी हो गए, जिनके नाम काट दिए गए? @ECISVEEP@SpokespersonECI
अंडमान के घने जंगलों में बसी जारवा जनजाति कभी विलुप्ति के कगार पर थी। बाहरी दुनिया से उनका संपर्क ना के बराबर था, और बीमारियाँ, कुपोषण तथा भय ने उनकी पीढ़ियों को कमजोर कर दिया था। ऐसे कठिन समय में डॉ. रतन चंद्र कर ने अपने साहस, करुणा और मानवता के अद्भुत संकल्प से इस जनजाति को नई ज़िंदगी दी। उन्होंने महीनों तक जंगलों में रहकर जारवा लोगों का विश्वास जीता, उनकी भाषा सीखी, उनकी स���स्कृति को समझा और उन्हें इलाज के माध्यम से ��ीवनदान दिया। डॉ. कर ने न केवल उनकी शारीरिक बीमारियों का उपचार किया, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि बाहरी दुनिया में भी ऐसे लोग हैं जो उनका शोषण नहीं, बल्कि सहयोग करना चाहते हैं। उनकी सेवा भावना ने जारवा समुदाय में फिर से जीवन का संचार किया और उन्हें अस्तित्व की नई रोशनी दिखाई। आज डॉ. रतन चंद्र कर की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब एक डॉक्टर मानवता के प्रति सच्चे समर्पण से कार्य करता है, तो वह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरी सभ्यता को बचा सकता है।
प्रशांत किशोर बोल रहे हैं हम कोई 'चोरी चमारी' करने वाले लोग हैं जो जेल भेज दोगे?
चोरी के साथ चमारी! देश की सबसे बड़ी आबादी वाली जाति तुम��हारे लिए गाली है!
ये अपराध सिर्फ नैतिक नहीं, कानूनी भी है।
SC/ST एक्ट के तहत एक्शन ले@NCSC_GoI
#CasteistPrashantKishor
https://t.co/p1bEvE1FFp
GST% घटने से पहले ही सीमेंट कंपनियों ने दाम इतना बढ़ा दिया कि कोई फर्क न पडे! 'खेला' हो गया! आजकल के काॅरपोरेट 'ज्योतिषी' भी हो गये हैं!
यानी सीमेंट के दामों में नये GST रेट से जितनी कमी होती, बडी सीमेंट कम्पनियों ने दाम में उतनी बढोत्तरी सप्ताह भर पहले ही कर ली थी!
पर्ची निकालने और भविष्य बताने वाले बाबाओं ने विमान दुर्घटना के बारे में पहले क्यों नहीं बताया?
अगर ये सच में भविष्य बता सकते हैं, फिर भी देशवासियों की जान नहीं बचाई तो ये इंसानियत के दुश्मन हैं.
अगर ये भविष्य नहीं बता सकते और झूठा दावा करते हैं तो ये ठग हैं.
ये क्या हैं?
#planecrash #PlaneCrashIndia
#planecrashahmedabad
जिस व्यक्ति ने अपने देश में गृहयुद्ध करवाया, वहां की संसद में उत्पात मचाया, जिसने कहा—'भारत और पाकिस्तान की लड़ाई हजारों साल पुरानी है, हमें कोई लेना-देना नहीं', जिसने भारतीय नागरिकों को ज़ंजीरों ���ें बाँधकर देश भेजा, वो आज कह रहे हैं-'मैंने #Ceasefire में मदद की'।
इतना मन बढ़ा हुआ है कि कह रहे हैं—'कश्मीर के मुद्दे को कैसे सुलझाया जाए, वो देखूँगा'।
बैठे-बैठे BOSS की तरह सुना रहे हैं, 'Sovereignty' (संप्रभुता) क्या होती है, ये प्रधानमंत्री जी समझ रहे हैं?
Be it tariff, deportation or ceasefire, these days news about India is broken by the Trump Administration and the Modi government remains conspicuously silent. Is this the 'new normal' of Indian foreign policy? Why do we need 'a long night' of American mediation to deescalate?