कल तिरंगा मार्च के दौरान संघी गुंडों ने मेरा हाथ पकड़कर ���ुझे भीड़ में खींचने की कोशिश की। ऐसे गुंडे गिरोह बनाकर स्वतंत्र पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं और पुलिस-सुरक्षाकर्मी वहां मूकदर्शक बने रहते हैं। लगातार हमें परेशान किया जाता है।
सुनने में आ रहा है मध्यप्रदेश सरकार ओबीसी को 27 %आरक्षण दिलाने के लिए आगे लड़ाई लड़ेगी परंतु आप ये बताइए जिस सरकार ने हाईकोर्ट में जानबूझकर ओबीसी का पक्ष नहीं रखा वो क्या खाक ओबीसी की लड़ाई लड़ेगी,डॉ मोहन यादव जी ये नौटंकी बंद कीजिए ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण का संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की ठोस पहल कीजिए।
Alert 🚨 🚨
Debunking Castiest Propaganda!!!!
दलित महिलाओं को समाज में दोहरी मार झेलनी पड़ती है—
एक महिला होने के कारण और दूसरी दलित होने के क��रण!
इसको intersectionality बोलते हैं:
लेकिन कुछ नफरती चिंटू बिना सामाजिक व्यवस्था और कानून को समझे, दिन-रात दलितों और OBC के खिलाफ जहर उगलने में लगे हैं।
संसद कानून यूं ही नहीं बना देती, आता-जाता कुछ नहीं है और चले हैं फर्जी दावों से नफरत फैलाने!
सच यह है कि स��र्ण समाज की महिलाओं को मुआवजा न मिलने की बात पूरी तरह फर्जी है। CrPC Section 357A के तहत हर वर्ग की रेप पीड़िता को न्यूनतम ₹3-4 लाख का मुआवजा कानूनी अधिकार के रूप में मिलता है।
वहीं 'SC/ST Act' के तहत ₹8.25 लाख तक का विशेष प्रावधान तब लागू होता है जब आरोपी गैर-दलित हो, और यह सुरक्षा व्यवस्था SC/ST समाज के पुरुषों पर हुए अपराधों पर भी लागू होती है।
दलित समाज के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना आसान नहीं होता—अक्सर गवाह बदलवा दि�� जाते हैं, प्रक्रिया सालों तक घसीटी जाती है, और लगातार सामाजिक दबाव व धमकियां दी जाती हैं।
वकीलों के भारी-भरकम खर्च और इस सामाजिक उत्पीड़न से बचाने के लिए कानून में यह अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा दी गई है।
इसे कोई 'विशेषाधिकार' या खैरात नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और सुरक्षा कवच कहते हैं।
#SocialJustice #CasteReality #SCSTAct #WomenSafety #CrPC #IndianLaw #FactsMatter #Equality
#jouranlism #fringejournalism
I explain analytical base of my conclusion that GDP growth in Q1 in 2026-27 in current price is 2.6% and in real terms close to 0. There are still messier distortions in sectoral performance with manufacturing and consumption witnessing negative growth. https://t.co/pvsjXlAdcq
आरक्षण के समर्थन में वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल यादव सर ने जो कहा वह एकदम परफेक्ट है।
"जहां आरक्षण नहीं है, पहले वहां तो बराबरी की व्यवस्था लाइए, अगर ऐसा नहीं करते तो स्वाभाविक है कि मन में खोट है।"
#WATCH | New York, US: At the "One World One Humanity" event, RSS Chief Mohan Bhagwat says, "If any Hindu thinks that there should be no Muslim in Bharat, he will not remain Hindu. If you want to call yourself Hindu, you must believe that all paths are leading to the same goal and that every human has dignity. There is no difference between human beings..."
(Source: One World One Humanity)
बिहार में आरक्षण जैसे ज्वलंत मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग़ पासवान एकदम फ्रंटफुट पर खेल रहे हैं।
चिराग पासवान किसी भी स्थिति में आरक्षण को लेकर कोई बात नहीं करना चाहते और न ही उसमें कोई रिफॉर्म्स चाहते हैं।
वहीं जीतन राम मांझी जैसे लोग जो आरक्षण को आर्थिक आधार पर करने की बात कर रहे हैं उसका समर्थन कर रहे हैं उन्��ें
चिराग पासवान ने चुनौती देते हुए कहा कि
"अगर जीतन राम मांझी जी को लगता है कि वो आर्थिक आधार पर आरक्षण चाहते हैं तो सबसे पहले खुद रिजाइन करें और अपने बेटों से भी करवाएं।" 😀
चिराग़ पासवान ने मनुवादियों और उसके समर्थको को पुनः रगड़ दिया है 🔥🔥
चिराग़ पासवान पॉवर में है, इनके हटते ही, बिहार में सरकार गिर जाएगी, साथ ही केंद्र सरकार पर भी ख़तरा मंडरा जाएगा,
नीतीश कुमार चंद्रबाबू नायडू रिजर्वेशन के मुद्दे पर भाजपा का साथ नहीं देने वाले 😂😂
संविधान में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।
ऐसे में SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ या उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की मांग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक न��तिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
जब तक समाज में भेदभाव और असमानता कायम है, तब तक वंचित एवं शोषित वर्गों के अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा की हमारी लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रहेगी : @iChiragPaswan
ज़मीनी हकीकत और हमारा अधिकार
इक्कीसवीं सदी के इस आधुनिक दौर में भी जातिवाद हमारे समाज की रगों में एक धीमे ज़हर की तरह दौड़ रहा है। ज़मीनी हकीकत यह है कि आज भी गाँवों की सीमाओं के बाहर हमारी अलग बस्तियां हैं, यही हश्र शहरों में हैं!
- रामदास आठवले, केंद्रीय मंत्री।
मनुस्मृति बनाम संविधान: देश की असली वैचारिक लड़ाई!
सवाल किसी एक किताब का नहीं, उस मानसिकता का है जो आज भी जाति और पितृसत्ता को ढो रही है। एक तरफ़ जन्म से ऊँच-नीच तय करने वाली सोच है, दूसरी तरफ़ समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय का संविधान।
हमारा पक्ष साफ़ है - मनुस्मृति नहीं, भारत का संविधान सर्वोपरि है। लड़ाई इसी विचार और इसी बराबरी के लिए है।
👉Untouchability is a crime.
👉The Shuddhikaran of the stage after Congress President Kharge ji's speech in Uttarakhand is 𝗨𝗡𝗧𝗢𝗨𝗖𝗛𝗔𝗕𝗜𝗟𝗜𝗧𝗬.
👉 We demand justice. The state and central governments must ensure Kharge ji gets justice.
: LoP Shri @RahulGandhi
📍 Delhi
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात ��ो 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।
चोर दरवाज़े से मोदी सरकार ने आरक्षण ख़त्म करने की योजना रची !!
2015 में केंद्र सरकार में 4.21 लाख पद खाली थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 8.24 लाख हो गई।
रेलवे में 2.40 लाख पद खाली हैं। डिफेंस में 2.41 लाख। गृह मंत्रालय में 1.10 लाख।
PSU में 5.1 लाख स्थायी नौकरियां खत्म हो गईं। ठेका कर्मचारियों की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 49% हो गई।
सवाल सिर्फ रोजगार का नहीं, सामाजिक न्याय का है।
सरकारी पद खाली रखो तो आरक्षण का अवसर खत्म।
PSU बेचो तो आरक्षित नौकरियां खत्म।
स्थायी नौकरी को ठेके में बदलो तो आरक्षण खत्म।
आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान बदलना जरूरी नहीं, आरक्षण वाली नौकरियां खत्म कर देना ही काफ़ी है।
सामाजिक न्याय विरोधी भाजपा का यही एजेंडा है।
पद खाली रखो। PSU बेचो। ठेकेदारी बढ़ाओ।
और SC, ST, OBC, EWS से उनका संवैधानिक हक छीन लो।
बाबासाहेब के संविधान से मिले अधिकारों को षड्यंत्र के तहत खत्म करने की भाजपाई नीति का अब पर्दाफ़ाश हो चुका है।