है तो तमाम संगठन लेकिन प्रशासन शासन अटेवा से ही क्यों डर लगता है क्योंकि वह लड़ता है और शासन प्रशासन का यह तानाशाही रवैया है विकसित भारत में विचार व्यक्त करने के लिए शिक्षकों को बुलाया गया और शिक्षक को ही नजर बंद किया जाए यह कहां तक उचित है????? संगठन इस कारवाई की घोर निंदा करता है
अटेवा उ० प्र०
बाकी घटनाक्रम मनीष के शब्दों में
*अटेवा के पदाधिकारी से डरा प्रशासन*
मनीष कुमार शर्मा बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक विभागीय ड्यूटी के अंतर्गत आदरणीय मुख्यमंत्री के जिला गाजियाबाद में एक कार्यक्रम में उपस्थिति होना था,मनीष जी समय से अपने विभाग के लोगों के साथ कार्यक्रम में उपस्थिति हुए, पुलिस ने कार्यक्रम के शुरू होने से पहले ही मनीष क���मार शर्मा को उठा लिया और नज़र बंद कर दिया, पुलिस ने पुलिस बल के साथ उन्हें सिहानी थाने में नज़र बंद कर दिया।
यहां आपको बताना ये जरूरी है कि श्री मनीष कुमार शर्मा अटेवा के जिलाध्यक्ष गाज़ियाबाद भी है, अटेवा/एनएमओपीएस पेंशन बहाली और निजीकरण के खिलाफ आंदोलन में चला रहा है जिसके मनीष कुमार शर्मा एक सक्रिय नेता के तौर पर जाने जाते हैं प्रशासन को उनकी उपस्थिति से शायद कोई ऐसी आशंका हो कि पुरानी पेंशन से संबंधित वो कोई मांग मुख्यमंत्री जी के सामने न रख दें जबकि मनीष कुमार शर्मा ने पूर्ण विश्वास दिलाया कि वो आज विभागीय ड्यूटी पर हैं न कि संगठन की तरफ से कोई विरोध दर्ज कर रहे हैं।
अटेवा चोरी छुपे कोई काम नहीं करता है हर काम खुलकर, बोलकर, बताकर करता है।
जहां आज का क��र्यक्रम विकसित भारत 2047 के विचार के लिए था वहीं संगठनों के पदाधिकारियों को हाउस अरेस्ट और थाने में नज़र बन्द करना कहां तक उचित है,यदि हमारे विचार सुनने ही नहीं तो ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन का कोई महत्व नहीं रह जाता है।
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मनीष कुमार शर्मा
अटेवा जिलाध्यक्ष गाज़ियाबाद
मधुशाला सजी है हर चौक-चौराहे,
पाठशाला ढूँढे बच्चे राहों राहे।
कहते हैं “नया भारत” बन रहा है,
पर भविष्य तो अब भी पेड़ के नीचे पढ़ रहा है।
#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो#SaveVillageSchools
“कुछ बच्चे अपनी जान हथेली पर रखकर अपना भविष्य सँवारने की कोशिश कर रहे हैं”����🚨
ये अपने देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है 🙄🙄
#JusticeForSchoolsChildren
यूपी सरकार सरकारी स्कूलों के बंद करने के फ़ैसले वापस ले
#JusticeForSchoolsChildren
स्कूल बंद करना नौनिहालों को मौलिक अधिकार वंचित करके पशुवत् करने जैसा घोर घृणित निर्णय है
एक स्कूल का निर्माण सैकड़ो जेलों को बंद करने के बराबर हो सकता है।
एक #स्कूल_का_बंद होना हजारों अपराधी बनाने के बराबर हो सकता है��
#JusticeForSchoolsChildren
"सर ये स्कूल बंद न हो तो अच्छा है, इतनी फीस नहीं है कि हम प्राइवेट स्कूलों में जा पाए"
ये सिर्फ एक मासूम बच्ची की बात नहीं है, ये उस पूरे भारत की आवाज़ है जहाँ सरकारी स्कूल बंद करके बच्चों का भविष्य भी बंद किया जा रहा है।
ना तो घर में पैसे हैं प्राइवेट स्कूल की मोटी फीस देने के लिए, ना ही गांव के पास कोई दूसरा स्कूल है, और ना ही सरकार को बच्चों की पढ़ाई की कोई परवाह है।
भाजपा सरकार क��� शिक्षा-विरोधी नीति लाखों बच्चियों को मजबूर कर रही है, या तो स्कूल छोड़ो या सपना छोड़ो!
बंद स्कूलों के पीछे छिपा असली एजेंडा क्या है?
👉 सरकारी शिक्षा को खत्म करो
👉 बच्चों को प्राइवेट माफियाओं के हवाले करो
👉 गरीब की पढ़ाई को भी कारोबार बना दो
मोदी-योगी सरकार जवाब दो, छोटे छोटे मासूम बच्चों की पढ़ाई बंद करके आखिर किसका विकास हो रहा है?
#Justiceforschoolschildren
आजादी से अब तक तमाम सरकारों, जनसेवकों, माननीयों की कोशिशों और बड़ी मुश्किल से गांव- गांव तक विद्यालय पहुंचें हैं। अब कुछ संसाधन बचाने, कुछ धन बचाने के चक्कर में इन्हें बंद मत कीजिए। एक बार बंद हुए विद्यालय फिर दुबारा खोलने में बहुत मशक्कत होगी। बच्चे आज कम है उस गांव में, कल को हो सकता है बढ़ जाए।
इतना भीषण कदम मत उठाइए।
विद्यालय बंद करना कहीं से कोई समाधान नहीं है, समस्या का। ग्रामीणों, छात्रों और शिक्षकों के लिए यह विद्यालय एक स्थान नहीं बल्कि हजारों बाल स्मृतियों का कल्प- वृक्ष है। इसे न काटिए।
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