@CEO_Maharashtra
महोदय,
ड्राफ्ट लिस्ट में अपना नाम जानने के लिए Epic नं लिखकर 1950 पर मैसेज भेजा जाता है उसके बाद वहां से जवाब आता है जिसमें सब डिटेल होते हैं। लेकिन उसमें नोटिस का उल्लेख नहीं होता है जिन्हें नोटिस देनी है।मुझे अब जाकर पता लगा जब नोटिस मिला वरना अंधेरे में था।
@SharmaKadambini कुछ भी कर लो ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई फैसला नहीं आना वाला।जिसके पक्ष में राज्य के सभी मुख्यमंत्री,सरकार हो और तो और कानूनी संरक्षण प्राप्त हो,उसका कुछ नहीं बिगड़नेवाला।ये अलग बात है ज्ञानेश साहब की अंतरात्मा जाग जाए और इस्तीफा दे दें। माननीय कोर्ट से भी कोई उम्मीद नहीं है?
@ECISVEEP मतदाता कैसे नहीं छूटेंगे?जब इतनी सूक्ष्म तरीके से जांच हो रही है।2002के लिस्ट से नाम में फर्क वाले को नोटिस दिया जा रहा है।लोग बाग अपना नाम वैगरह संशोधित या अपटेड करते रहते हैं,इससे तो आयोग वाकिफ जरुर होगा।उस समय किसी के बर्थ डेट के लिए कोई दस्तावेज मांगता जाता था?
Take it easy.
@manojkjhadu जिसके नतीजे में दिल्ली,बिहार , महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल हो गई। सरकार ने कानून का कवच कुंडल देकर ही मिशन पर भेजा था,पता था इसमें सजा होने का खतरा है। लेकिन इस तरह से सत्ता हासिल करना बेहद घृणित कृत्य है। इतिहास में ऐसे लोग खलनायक के रुप में उद्धृत होते हैं।
@news24tvchannel मतलब जरनैल सिंह को कोई कमीशन नहीं मिला। लेकिन बिना कमीशन दिए इतनी घटिया सड़क ठेकेदार नहीं बनायेगा।सवाल है कि फिर कमीशन किसने खाया।बीजेपी के नेता का यह रवैया कुछ अलग नहीं है।जिसके हाथ में सत्ता होती है उसका तेवर ऐसा ही होता है।
देख लेना,षड़यंत्र करके जेल मार खानेवाले को ही होगी ?
@raghav_chadha सिर्फ डेटा लेना है तो बेसिक प्लान लेना जरूरी है।अब तो सरकार के हिस्सा है तो विपक्ष में रहकर जिन मुद्दों को उठाया था,उसे लागू करवा सकते हैं।सभी रिचार्ज 30दिन के हो।बचा डेटा अगले दिन जुड़ जाए।यह सब अपने कहा था,देखना है कितने कामयाब होंगे?
@ECISVEEP
बच्चे के पहली बार वोटर आईडी कार्ड के आवेदन में मेरा पिछले SIR की डिटेल मांगी गई।अब मुझे नोटिस मिला है कि मेरे पिता और मेरी उम्र में अंतर कम है। आयोग 2002मे लोगों की उम्र के लिए कौन सा दस्तावेज मांगता था?लोग बाग कुछ भी लिखा देते थे। पहले सूक्ष्मता से जांच कहां होती थी?
@ajitanjum ज्ञानेश कुमार के लिए पद्मभूषण की मांग पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष की मांग जायज है? जिस पश्चिम बंगाल में बीजेपी सत्ता में आने के लिए तरह रही थी उसे ज्ञानेश भैया ने साकार कर दिया , बीजेपी की तरफ से भी कुछ करना तो बनता है।
#GyaneshKumar
'बदनाम हुए तो क्या नाम न होगा'
ज्ञानेश साहब के लिए बस यही बचा है।इतनी किरकिरी के बाद भी अपने पद पर बना रहना, शून्य नैतिकता है।अब इनको अपनी बदनामी भी रास आ रही है तो कुछ किया नहीं जा सकता।चुनाव आयोग को मतदाता का संरक्षक होना चाहिए लेकिन नाम काट कर भक्षक बना बैठा है?
#GyaneshKumar
इस तोते में किसकी जान है?इस पर कोई आरोप लगाता है तो उसका जवाब इनकी तरफ से नही बल्कि दूसरा ही कोई देता है।इस सरकार ने कानून बना कर चुनाव आयुक्त को बचाव का कवच कुंडल यूं ही नहीं दिया था।पता था जिस रास्ते पर इन्हें भेजना है वहां सजा मिलना तय है।
#ElectionCommission
चोर की दाढ़ी में तिनका। कोई तीर चुनाव आयोग पर फेंका जाता है तो वह बीजेपी को जाकर क्यों लगता है?वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगती है। चुनाव आयुक्त के चुनाव से न्यायधीश को अलग करना और उसके काम के लिए सजा से बचाव का कानून बनाना,इसका उद्देश्य स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
@navinjournalist यह सब अकेले करना ज्ञानेश कुमार के बस की बात नहीं है ,इसमें सरकार भी शामिल हैं।ऐसा करने से बीजेपी को फायदा हो रहा है इसलिए उनके नेता चुनाव आयोग पर कोई सवाल नही उठाते। माननीय कोर्ट का भी ढुलमुल रवैया है।इस बार नहीं तो अगली बार वोट दे देंगे,इस टिप्पणी का मतलब क्या होता है।
गजब है?
#Jamui
जमुई की घटना को कुछ छुटभैये नेता छींटपुट घटना बता रहे हैं।इन अहमक नेताओं पर पार्टियों को कार्यवाही करनी चाहिए।इस घटना को छींटपुट घटना बताकर इसकी गंभीरता को कम किया जा रहा है।
'बिना अपने मरे स्वर्ग नहीं दिखता'
#bihar
किस सुबह की सम्राट चौधरी बात कर रहे थे जिस दिन वे इस्तीफा दे देंगे।
कोई कन्डीडेट चुना गया ?जो भावी मुख्यमंत्री बन सके।
फेंकने में बीजेपी के नेता एक दूसरे से बीस पड़ रहे हैं।
@rajuparulekar सरकार ने चुनाव आयुक्त को कानून का कवच कुंडल दे दिया है इसलिए उन पर कार्यवाही होने से रही ।उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए जिससे लोकतंत्र बच सके।SIR में लोगों के नाम काटे जा रहे हैं ,अब इनमें बड़े बड़े लोगों का नाम शामिल हैं।शायद सत्ताधारियों की आंखे खुले जिनके नाम कट गये है।
@TellingRavindra तभी तो वोहरा साहब सरकार का बचाव टीवी चैनल की डिबेट में करते रहते हैं।आजकल जिसका भी हाथ
कहीं भी फंसा है वह सरकार की तरफदारी में जुट जाता है और मजे की बात है कि इसका उन्हें फायदा भी होता है।