लो भैया, चिराग पासवान भी विपक्ष की तारीफ़ कर रहे हैं!*😄
एंकर: इस बार सदन नहीं चल पाया।
चिराग पासवान: लोकतंत्र में कई बार विपक्ष को अपनी आवाज़ बुलंद करनी होती है, ताकि वह अपनी बात सरकार तक पहुँचा सके।
साथ ही कहा- विपक्ष ने चंदा पेटी रखकर जो प्रदर्शन किया, वो वाकई शानदार था।
सोचिए, जिस विपक्ष को रोज़ कोसा जाता है, उसी के प्रदर्शन की तारीफ़ 🤔
#WATCH दिल्ली: पुणे में राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, "22 अगस्त को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश में एक नया झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश की। वह 'पितृसत्ता को खत्म करने' (Smashing the Patriarchy) की बात करते हैं - एक ऐसी सोच जिसका मैं पूरी तरह समर्थन करती हूं। हालांकि, मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं: क्या आप 'पितृसत्ता को खत्म करने' का नारा सिर्फ पुणे के मंच तक ही सीमित रखते हैं? और क्या आप अपनी कांग्रेस पार्टी के अंदर राजनीतिक पितृसत्ता को बढ़ावा देते रहते हैं? राहुल गांधी के पास न तो कोई विजन है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। नतीजतन, वह अपनी रिसर्च टीम द्वारा दिए गए नोट्स का इस्तेमाल करके देश के युवाओं और सम्मानित मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। आइए कांग्रेस पार्टी के रिपोर्ट कार्ड पर नज़र डालें। आखिरकार, अगर कोई सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहता है, तो राहुल गांधी को इसकी शुरुआत कांग्रेस पार्टी से ही करनी चाहिए। उन्होंने 22 अगस्त को पुणे के मंच पर यह बयान दिया; फिर भी, ठीक दस दिन पहले, उन्होंने एक महिला प्रधानमंत्री - खास तौर पर हमारे मित्र देश इटली की मौजूदा प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी - पर किए गए एक भद्दे मज़ाक में हिस्सा लिया था। यह लॉकर रूम में लड़कों की बातचीत सुनने जैसा था; उन्होंने सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरने के लिए सस्ते इशारों और सनसनीखेज बातों का सहारा लिया..."
“अच्छा है, खूब महंगी हो जाए... चीनी सेहत के लिए नुकसानदायक है”
◆ रक्षाबंधन से पहले चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी पर बोले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
@KailashOnline | Sugar Price Hike | #Sugar | #Viral
2014 में प्रति व्यक्ति आय:
भारत— $1,560
बांग्लादेश— $1,200
आज 2026 में IMF के अनुसार प्रति व्यक्ति आय:
भारत— $2,813
बांग्लादेश— $2, 960
मोदी जी के 12 साल के शासन में बांग्लादेश हमसे आगे निकल गया है,जबकि 2014 में हमसे चीन और USA को पीछे छोड़ने का वादा किया गया था,अमेरिका से आगे जाना तो दूर हम जिनसे आगे थे ,अब उनसे भी पीछे हो गए हैं!
अमेरिका के राजदूत ने गजब खुलासा किया है 👇
• 2 महीने पहले फ्रांस में ट्रंप और मोदी की मुलाकात होनी थी. वहां दोनों बयान देते और सामने पत्रकार भी होते.
• इस मुलाकात से पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने अनुरोध किया कि पत्रकारों से सवाल ना लिए जाएं.
जी हां, मोदी को पत्रकारों के सवाल से बचाने के लिए विदेश मंत्रालय आगे से रिक्वेस्ट कर रहा है.
आप ट्रंप-मोदी की उस मीटिंग का वीडियो देखेंगे तो पाएंगे कि ट्रंप पत्रकारों के सवाल ले रहे हैं, लेकिन मोदी से एक सवाल नहीं पूछा गया.
Trump didn’t forget what Narendra Modi said. He just didn’t listen. A compromised PM is not taken seriously.
It is painful to see what India has been reduced to under Narendra Modi.
Once a formidable force. Today, taken for granted.
PS: Why is Modi so afraid of press freedom — at home and abroad?