श्री गौरांग जयते!
श्री राधारमण जयते!
जय जय श्री सीताराम।
सनातन धर्म का निष्ठावान सेवक।
भारत माता का एक सजग सिपाही।
Love Indian Army
Advocate district Gorakhapur
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
राजस्थान में चुनाव होते तो आज मोदी जी का ट्वीट आता कि राणा सांगा ने किस वीरता का परिचय दिया था। वो उनके भाले, घोड़े, कवच में हुए छेदों की संख्या गिनाते और मूर्ति पर माल्यार्पण करते।
राणा सांगा के साथ समस्या यह हो गई कि वो दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत समाज से भी नहीं आते कि हों महाराष्ट्र के, और थोप दिए जाएँ पूरे देश पर!
ऐसे राजा होने का क्या लाभ जब ब्रह्मा जी को ‘रंडीबाज’ और ‘बेटीचो*’ भी न कह पाएँ, न ही बाईस प्रतिज्ञा ले पाएँ! फुले जी ने पुस्तक लिखी और आज देखिए कि महाराष्ट्र में चुनाव नहीं है पर पीएम सात ट्वीट धकापेल लिख दिए।
मंडल राजनीति आपकी पार्टी करती है ना ताल ठोक कर? उनका किया OBC वर्गीकरण जो है उसमें backward का हिंदी अनुवाद और फिर भावानुवाद क्या है, भाटी जी?
पिछड़ा कौन है? पिछड़ा का विलोम क्या है? आपको और रावण-शूर्पणखाओं की फौज को बुरा इसलिए लग रहा है क्योंकि जब आपने अपने वैचारिकी पुरखों के हिसाब से हमें जब “ऊँचा” परिभाषित किया था तब हम सात्विक अफ़सोस के साथ दशकों affirmative action में आपके साथ थे। न्याय के लिए। और ये उचित था। धर्मसंगत था।
पर आज आपलोगों की ज़हरीली बातों के सामने सीना ठोक कर अपनी जाति पर बात कर रहे हैं तो आपके कलेजे पे साँप क्यों लोट रहा है? आपने ये बोया है। अब याचक बनकर गर्दन झुकाए बिना अपनी संस्कृति पर बोलेंगे।
यहाँ डिजिटल गुंडे छोड़ ही रहे हैं। यही सब और कीजिए! आपसे अच्छा कौन समझ सकता है कि इस attitude से हमारी राजनीति और उग्र ही होगी!!