चीटिंग क्या होती है समझना है तो समझिए AIIMS के इस केस से, जब सालों साल तक चुन चुनकर दलित छात्र-छात्राओं को फेल किया जा रहा था।
मुंगेरकर कमेटी बैठी,जांच हुई तो पता चला जाति के हिसाब से फेल किया गया और कोर्ट ने न सिर्फ पास किया सबको 10 लाख कंपनसेशन दिलवाया।
IITs, IIMs और Central Universities में आए दिन जातिवाद से जुड़ी ख़बरें आती रहती हैं। IIT Mandi में एक प्रोग्राम हुआ था, जिसमें पोस्टर पर लिखा था, “शूद्र का काम है सेवा करना।”
IIT दिल्ली में बिहार के ऋषिकेश ने आत्महत्या की। क्या हुआ उस पर? अब IIT बॉम्बे में एक दलित छात्र ने आत्महत्या कर ली।
एक बार इन IITs में प्रोफ़ेसरों की डाइवर्सिटी चेक करिए, सारा खेल समझ आ जाएगा। वंचित तबक़ों के बच्चों के लिए कितना सपोर्ट सिस्टम है?
SC, ST और OBC तबकों से आने वाले छात्रों के साथ भेदभाव को इतना नॉर्मलाइज़ कर दिया गया है कि अब वह किसी को दिखाई ही नहीं देता!
पर छात्र अब बिना डरे सवाल कर रहे हैं। IIT दिल्ली में भी छात्रों को प्रशासन ने धमकाया, फिर भी छात्र झुके नहीं।
रोहित की शहादत के बाद देश में जो चिंगारी लगी थी, वह अब बुझेगी नहीं! सवाल भी होगा और जवाब भी देना होगा। कितने पायल, रोहित, मुथु?
हर संस्थागत हत्या का हिसाब माँगा जाएगा।
IIT-Bombay के बीटेक (एनर्जी साइंस) द्वितीय वर्ष के दलित छात्र साहिल वाकोड़े की असामयिक मृत्यु ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, सम्मान और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
साहिल जी की आत्महत्या के अगले दिन कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी बयान में परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन मिलने की बात कही गई। लेकिन साहिल की मृत्यु के अगले दिन प्रशासन द्वारा यह बयान जारी किया जाना और पूरे मामले को मुख्य रूप से मोबाइल मिलने की घटना से जोड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है और मामले को लेकर संदेह को और गहरा करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा कक्ष में साहिल जी के आसपास अन्य परीक्षार्थी मौजूद थे, लेकिन अभी तक उनमें से किसी अन्य परीक्षार्थी द्वारा उनके पास मोबाइल फोन होने की बात कहे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं, कॉलेज प्रशासन के नियमानुसार, यदि परीक्षा के दौरान किसी परीक्षार्थी के पास मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो संबंधित सामग्री जब्त कर परीक्षार्थी को नई उत्तरपुस्तिका देकर परीक्षा पूरी कराई जाती है और आगे की कार्रवाई के लिए मामला कमेटी के सामने रखा जाता है।
साहिल के परिजनों और साथी छात्रों का कहना है कि उन्हें प्रोफेसर द्वारा परीक्षा कक्ष से बाहर ले जाकर धमकाया गया और एक वर्ष के लिए निलंबित करने की बात कही गई। परिवार ने उनके साथ पहले भी जातिगत भेदभाव और संस्थागत प्रताड़ना किए जाने की भी बात कही है।
18 सितंबर की शाम करीब 6 बजे साहिल ने आत्महत्या कर ली। इसके कुछ ही समय बाद @iitbombay के छात्र इस घटना से चिंतित होकर कैंपस में एकत्र हुए और कैंडल मार्च निकाला। इसके बाद से छात्र धरने पर बैठे हुए हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों में IIT के निदेशक और डीन (छात्र मामले) के इस्तीफे, साहिल जी के परिवार को मुआवजा, IIT प्रशासन की सहमति से प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज करने, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने और सभी छात्रों के साथ ओपन हाउस बैठक आयोजित करने की मांग रखी है।
हम @EduMinOfIndia से मांग करते हैं कि घटनाक्रम से जुड़े सभी CCTV फुटेज, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो।
देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव, अपमान या किसी भी प्रकार की संस्थागत प्रताड़ना की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस दुःख की घड़ी में हमारी गहरी संवेदनाएँ साहिल के शोकाकुल माता-पिता और पूरे परिवार के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे।
#JusticeForSahilWakode
SC वाला 58 नंबर, ST वाला 53 नंबर ला रहा है, लेकिन EWS वाला मात्र 44 नंबर लाकर चिकित्सा विभाग में आचार्य बन रहा है।
लेकिन योग्यता पर सवाल उठाने वाले शायद यहां चुप्पी साध लेंगे...?
सावित्रीचा संघर्ष अजूनही सुरूच आहे..!
जवळपास १८० वर्षांपूर्वी क्रांतीज्योती सावित्रीमाई फुले यांना ज्ञानदानाचा यज्ञ सुरू करण्यासाठी शेणगोळ्यांचा मारा सहन करावा लागला. "सावित्रीबाई जोतीराव फुले" मालिकेच्या माध्यमातून हा संघर्ष घराघरात पोहोचतोय.
दुर्दैवाने त्याकाळी सावित्रीबाईंनी केलेला संघर्ष आजही एका सावित्रीला सहन करावा लागतोय. शेणगोळ्यांची जागा अंड्यांनी घेतली, पण मारा करणारे हात आजही तेच आहेत, सावित्रीला रोखणारी प्रवृत्ती आजही तीच आहे.
पण.. सावित्री तेव्हाही थांबली नव्हती, आजही थांबणार नाही !
एक फार्म हाउस में मेरी हत्या करने का षड्यंत्र रचा गया है। मैं यह बात बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं। मेरे पास जो सूचनाएं और स्रोत हैं, वे गलत नहीं हैं। मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए और हत्या की साजिश से लेकर बाराबंकी हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका सामने लाई जाए।
मैं अपने विरोधियों से भी कहना चाहता हूं—मौत तो एक दिन आनी है, मौत से डरकर जिया नहीं जा सकता। अगर मेरी मौत आपके हाथों लिखी होगी तो वह भी हो जाएगी, लेकिन अगर आप अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हुए और मेरे लोगों ने मुझे ताकत, हिम्मत और मेरा साथ दे दिया, तो याद रखिए, आप जैसे गुंडों को उत्तर प्रदेश से पलायन करना पड़ेगा।
आज सवाल सिर्फ मेरी सुरक्षा का नहीं है। जब सुरक्षा प्राप्त एक चुने हुए जनप्रतिनिधि और सांसद के साथ दिनदहाड़े पत्थरबाजी की जाए, पेट्रोल-डीजल जैसी ज्वलनशील चीजों से भरी बोतलों के जरिए गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया जाए और आरोपी इतने बेखौफ हों, तो सोचिए इस प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों की सुरक्षा और न्याय की स्थिति क्या होगी?
मैं अपने साथियों से भी कहना चाहता हूं—डरने की जरूरत नहीं है। संघर्ष जारी रहेगा। मौत से डरकर जिया नहीं जा सकता।
जय भीम!
साहिल के परिवार ने जातिगत अपमान के गंभीर आरोप लगाए हैं, उनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। हमने समाज में ‘आरक्षण वाला’ कहकर दलित-पिछड़े छात्रों को अपमानित होते देखा है, जबकि आरक्षण EWS के लिए भी है। इसलिए चीटिंग की बहस अपनी जगह, लेकिन जातिगत भेदभाव के आरोपों को दबाया नहीं जा सकता।
ये जाहिल हरामज़ादे जब बलात्कारियों के समर्थन में खड़े हो सकते हैं, तो भला IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे के हत्यारे के समर्थन में क्यों नहीं खड़े होंगे? कोई नई बात नहीं है।
साहिल वाकोडे का first year में 8.5 CGPA था। ऐसे होनहार छात्र के नकल करने की बात पूरी तरह झूठ है।
जेपी नड्डा इस पर चर्चा नहीं करेंगे. मोहन भागवत इस पर जातिवादियों से मीटिंग नहीं करेंगे. इनको दिक्कत बस sc/st से है. जातिवादी आतंकवादी इसके बारे मे बात नहीं करेंगे. असल मे ये जातिवादी नेता ही जातिवाद खत्म नहीं करना चाहते हैँ वो बस जातिगत शोषण बनाये रखना चाहते हैँ.
“इस इंस्टीट्यूट में जातिवाद होता है” - साहिल वाकोड़े की मौत के बाद IIT मुंबई के छात्रों का यह आरोप बेहद गंभीर है। परिवार भी कह रहा है कि साहिल महीनों से जातिगत उत्पीड़न झेल रहा था। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक पर ऐसे सवाल उठें, तो उन्हें दबाया नहीं - निष्पक्षता से जाँचा जाना चाहिए।
पहली बार बहुजन छात्र हो रहे अब एकजुट। वहीं जातिवादी खुलकर हत्या और मौत को जस्टिफाई कर रहे। वो बहुजन अधिकार और बहुजनों के खिलाफ हैं। जो आपको चपरासी नहीं बनने देना चाहता वो डॉ, इंजीनियर, सीएम, पीएम या SP और डीएम बनने देगा। बहुजनों को बोलना होगा। बीजेपी और RSS के आने के बाद जातिवाद आसमान छू रहा।
साहिल वाकोड़े सिर्फ एक नाम नहीं है… एक सवाल है।
18 सितंबर को IIT-Bombay के छात्र साहिल वाकोड़े की आत्महत्या ने देश के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
साहिल वाकोड़े की मौत ने देश के सामने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार और साथी छात्रों ने जातिगत भेदभाव व संस्थागत प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
घटना से जुड़े CCTV फुटेज, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। दोषी कोई भी हो, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
रोहित वेमुला, पायल तड़वी, दर्शन सोलंकी और अब साहिल वाकोड़े…
सवाल सिर्फ FIR का नहीं है।
सवाल यह है कि हमारे शिक्षण संस्थानों में ऐसा माहौल कब बनेगा, जहां किसी विद्यार्थी को उसकी जाति के कारण अपमान या भेदभाव का सामना न करना पड़े?
जाति के नाम पर भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाइए।
सभी आरोपियों/जातिवादियों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
#JusticeForSahilWakode
DUSU छात्र संघ चुनाव की काउंटिंग में भारी गड़बड़ी के आरोप समाजवादी छात्र सभा के प्रत्याशी विशेष यादव द्वारा लगाए गए ,
उनका आरोप है जब वो 19वे राउंड तक अपने विपक्षियों को लीड दिए हुए थे फिर 20 वे राउंड की 6 EVM में इतना वोट कैसे निकल आया कि 600 वोटों से पीछे चल रही ABVP ने लीड ले ली।
विशेष यादव और उनके समर्थक रिकाउंटिंग की मांग कर रहे थे लेकिन तानाशाह अमित शाह अपनी पुलिस के दम पर तानाशाही करना चाह रहा।