आज ADGP वाई पूरण कुमार जी के पत्नी IAS अमनीत कुमार जी से मुलाक़ात की, सोचिए जब देश में दलित IAS/IPS को ही इंसाफ़ नहीं मिल रहा तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा?
सरकार ने अभी तक DGP शत्रुजीत कपूर के ख़िलाफ़ कोई नामज़द FIR नहीं की है, परिवार की माँग है को नामज़द FIR हो, उसके बाद पोस्टमार्टम होगा!
आज़ाद भारत के ऊपर कलंक है ये घटना।
साथ ही परिवार से मिलने कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @AdvRajendraPal जी ने भी परिवार से मुलाक़ात की।
NSUI हरियाणा के जुझारू अध्यक्ष, मेरे छोटे भाई @AvinashYadav___ को जन्मदिन की हार्दिक मंगलकामनाएँ!
प्रकृति से आपके लंबी उम्र एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ!
लड़ते रहो-बढ़ते रहो!
@cmohry Uchana sho or io pichle 10 gambhir case me fir nahi kar raha garib admiyo ka shoshan kar raha hai sir kafi preshan hai jatiwad bhi kar raha sir io
लोकतंत्र में आम जनता को अपनी पसंद की सरकार चुनने का अधिकार है। हिमाचल की जनता ने अपने इसी अधिकार का इस्तेमाल किया और स्पष्ट बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनाई। लेकिन भाजपा धनबल, एजेंसियों की ताकत और केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग करके हिमाचल वासियों के इस अधिकार को कुचलना चाहती है। इस मक़सद के लिए जिस तरह भाजपा सरकारी सुरक्षा और मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है, वह देश के इतिहास में अभूतपूर्व है। 25 विधायकों वाली पार्टी यदि 43 विधायकों के बहुमत को चुनौती दे रही है, तो इसका मतलब साफ है कि वो प्रतिनिधियों के खरीद-फरोख्त पर निर्भर है।
इनका यह रवैया अनैतिक और असंवैधानिक है। हिमाचल और देश की जनता सब देख रही है। जो भाजपा प्राकृतिक आपदा के समय प्रदेशवासियों के साथ खड़ी नहीं हुई, अब प्रदेश को राजनीतिक आपदा में धकेलना चाहती है।
#HimachalPradesh
विधान परिषद के सदस्य माननीय भीमराव जी ने सदन में शिक्षक भर्ती घोटाले में सरकार और पिछड़े-दलित समाज का वोट लेकर सरकार में शामिल चमचे नेताओं का काला चिठ्ठा खोलकर रख दिया।
पिछड़ों-दलितों की आवाज को सदन में मज़बूती से उठाने के लिए माननीय भीमराव अंबेडकर जी आपका बहुत आभार।
मंदी की आहट से दुनिया की बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं डरी हुई हैं और खासतौर से भारत में लगातार घट रही मांग मंदी की मुख्य वजह बनी हुई है ऐसे में इस बजट में लोगों के हाथ में कुछ पैसा आता तो शायद इससे डिमांड बढ़ती और अर्थव्यवस्था को फायद पहुंचता।
लेकिन इस उदासीन बजट में ना तो किसान को कुछ मिला, ना लघु उद्योगों और ना ही गरीबों को। सबसे बुरा हाल रहा मिडिल क्लास का जिसे हर बार की तरह इस बार भी सिर्फ धन्यवाद और झूठी उम्मीद का चश्मा पहना कर वित्त मंत्री ने काम चला लिया। वैसे भी देश के मध्यम वर्ग की चिंताओं से इस सरकार ने बरसों पहले ही नाता तोड़ लिया है।