सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है।
सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं - यह तानाशाही है।
इन्क़लाब ज़िन्दाबाद
सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
लोकतंत्र में असहमति का जवाब संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं। किसी भी सरकार की परिपक्वता उसकी आलोचना सुनने और बातचीत करने की क्षमता से तय होती है, न कि विरोध की आवाज़ को बलपूर्वक दबाने से।
लोकतंत्र की असली पहचान संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है - डर, दमन और चुप्पी नहीं।
निर्लज्ज धर्मेंद्र प्रधान एक बार अपने एसी वाले चैंबर से निकल कर इन छात्रों का दुख सुन ले।
तुम लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करके कैसे चैन का खाना खा लेता है।
प्रयागराज में छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने वाले कोचिंग संस्थानों — क्लाइमैक्स, टारगेट विद रवि तिवारी और एग्जामपुर — को बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संस्थानों के बाहर पुलिस की तैनाती भी कर दी गई है।
सवाल यह है कि क्या युवाओं के भविष्य की बात करना अब अपराध बन गया है, क्या छात्रों के हक की आवाज़ उठाने वालों को दबाकर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
जो लोग देश को "विश्व गुरु" बनाने का दावा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि विश्व गुरु बनने का रास्ता शिक्षा के मंदिरों पर ताले लगाने से होकर जाता है या शिक्षा को मजबूत करने से,
युवाओं की मांगों का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए, दमन से नहीं। आवाज़ों को बंद करने से समस्याएँ खत्म नहीं होतीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति अविश्वास और बढ़ता है।
याद रखिए, जब छात्र अपने भविष्य के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएँ, तो सवाल छात्रों पर नहीं, व्यवस्था पर उठते हैं।
क्योंकि किताबों से डरने वाली व्यवस्था कभी ज्ञान का नेतृत्व नहीं कर सकती।
#indianmedia #youtubeteachers #students
भर्ती परीक्षाओं में धांधलेबाजों के हौसले आखिर इतने बुलंद क्यों होते जा रहे हैं?
आज हालत ये है कि
exam से पहले ही उसकी setting और rate की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं।
कानपुर में SSC GD परीक्षा निरस्त होने के बाद छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखा
और ऐसी प्रतिक्रियाएं अब देखने को मिल रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
जिन scams का खुलासा हो जाता है,
स्थिति अगर सिर्फ उतनी ही होती तो भी चिंता की बात थी।
लेकिन जिन गड़बड़ियों का कभी पता ही नहीं चला
ऐसे कितने लोग आज system में होंगे?
#SSC_GD_SCAM
अपनी जायज मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे है SSC_GD के छात्रों को सरकार अभी कहेगी ये युवा देशद्रोही है
इनके साथ खड़े होने वाले अध्यापकों के ऊपर सरकार मुकदमा दर्ज करेगी और आयोग भी बयान देगा की परीक्षा में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई है किसी भी तरह की धांधली नहीं हुई है परीक्षा एकदम निष्पक्ष और पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है अगर परीक्षा को लेकर कोई भी भ्रामक वीडियो या फिर अफवाह फैलाई जाती है और इसमें कोई छात्र सम्मिलित मिलता है तो उसके ऊपर भी मुकदमा होगा यानी उसका भविष्य खराब कर दिया जाएगा,
मेरा एक सवाल है अगर सरकार और आयोग किसी भी एग्जाम को सुचारू रूप से नहीं करवा सकती तो युवाओं और छात्रों से कह दे कि हम आपके भविष्य से यूं ही खिलवाड़ करते रहेंगे क्योंकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित है हमें देश के गरीब, मजदूर के बच्चों से क्या मतलब है, अगर बेरोजगार युवाओं से ऐसी अव्यवस्था नहीं झेली जा रही है तो वह पढ़ाई लिखाई छोड़कर पकौड़े तले... #ssc_gd
मैं SSC GD के हर उस स्टूडेंट के साथ खड़ा हूं जिसकी मेहनत के साथ धोखा हुआ है। ✋
अगर एक आदमी 500-600 सेंटर पर पेपर लीक करवा सकता है…
तो सोचो इस पूरे खेल में कितने लोग शामिल होंगे।
ये सिर्फ गड़बड़ी नहीं…
बहुत बड़ा घोटाला है।
इस भर्ती की दोबारा निष्पक्ष परीक्षा होनी चाहिए
और दोषियों को ऐसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी छात्रों के सपनों से खेलने की हिम्मत ना करे।
#SSC_GD_SCAM
@DoPTGoI@PMOIndia