@muskangoyal037 अगर लिया गया निर्णय पक्ष में है तो कोई बात ही नहीं है, अगर सही औऱ गलत का बोध न हो पाए और लिया गया निर्णय विरोध में चला जाये तो, ज़िन्दगी दाव पर लगा देना और अपने दम पर सही बना देना। इसका मतलब है ईश्वर ने तुम्हें इस योग्य बनाया है कि तुम अपनी लड़ाई ख़ुद लड़कर जीत सको।।
@muskangoyal037 निर्णय लेते समय तो किसी को ज्ञात नहीँ होता है कि उसके लिए क्या सही है और क्या ग़लत। अन्यथा नर औऱ नारायण के मध्य अंतर समाप्त हो जायेगा। इसीलिए जो निर्णय दिल य�� अंतरात्मा के ज्यादा करीब से लिया जाये, हो सकता है अभी सन्तुष्ट न करे लेकिन बाद में संतुष्टि मिलती है।।
@SuccessfulRuby@ramprakash0324 उसको बोलो आत्महत्या करने के लिए अब देर हो चुकी है। आत्महत्या तभी कर लेनी चाहिए थी जिस दिन ऐसा विचार आया था। अब विचार को झेलनी की तागत है और झेल चुकी हो तो जीवन में कुछ भी और बड़ा कर सकती हो। अंततः सब कुछ विचार ही तो है। समझाओ उसको। जीवन बहुमूल्य है।
@nishabdBatein02@DrGauravGarg4 किसी की भी सरकार हो हर किसी ने अपने अपने स्तर से बहुत सारे शौचालय बनवाये हैं और तुमने ट्विटर पर ही हग दिया। भावनाओं में मत बहा करो अपनी बुद्धि, विवेक से काम लो। आदमी पढ़ लिख जाएगा तब वैज्ञानिक तकनीक के आधार पर बहुत अच्छे से और मुनाफ़े के साथ खेती कर सकता है।
@SuccessfulRuby@ACPAshishKumar स्वार्थ= स्व+अर्थ यानि स्वंय का अर्थ। जो खुद के अर्थ को समझ गया वो स्वार्थी है। हर समाज के अपने अलग अलग रंग है। आज हम जिनको महान कह रहे हैं कल उनकी जगह हमारे बच्चे होंगे और उनका स्थान हम ले लेंगें। सब कुछ तभी तक तो अज्ञात है जब तक सामने नहीँ है। उस बीच की दूरी को कैसे भी देख लो।
@SuccessfulRuby@ACPAshishKumar सारी दुनिया को दोष देना गलत है माननीय, दुनिया के दो रूप हैं प्रकृति और विकृति। इस प्रकृति ��े किसी का कुछ नहीँ बिगाड़ा है, इंसानों ने प्रकृति को विकृति करके दोनों को मिला दिया है। औऱ अगर आगे कहें तो दुनिया जैसा सच में कुछ है या सिर्फ हमारे दिमाग में इसलिये है??
@ACPAshishKumar@SuccessfulRuby पैसा प्रकृति का स्वरूप नहीँ है इसीलिये आप पैसे को अलग से नहीँ देख सकते हो। जिसने पैसा लिया है या दिया है या मेहनत मजदूरी से अर्जित किया है, उसकी जाति, धर्म सब कुछ होता है। इसके अलावा जाति और धर्म न मानने वालों की भी एक अलग जाति और अलग धर्म होता है।।