जमीन-जायेदाद बेचकर इलाज कराया, कर्ज भी लिया… फिर भी पैसों की कमी के कारण इलाज अभी अधूरा हैं।
छत से गिरने के बाद इस बच्ची की रीढ़ की हड्डी टूट गई, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है।
📍 राजापुर, दरियापुर, सारण, बिहार
जमीन-जायेदाद बेचकर इलाज कराया, कर्ज भी लिया… फिर भी पैसों की कमी के कारण इलाज अधूरा रह गया।
छत से गिरने के बाद इस मासूम बच्ची की रीढ़ की हड्डी टूट गई, लेकिन आर्थिक मजबूरी आज उसके इलाज में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है।
📍 राजापुर, दरियापुर, सारण, बिहार
मैं एक Biology & Chemistry Teacher हूँ पिछले करीब 1 महीने से बीमारी के कारण मेरी नौकरी छूट गई।
अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हूँ इसलिए फिलहाल किसी दूसरे स्कूल को जॉइन करना संभव नहीं है।
मैं घर से Online Biology & Chemistry Classes ले सकती हूँ अगर किसी Coaching Institute, EdTech या Online Teaching Platform को Biology या Chemistry Teacher की जरूरत हो तो कृपया मुझसे संपर्क करें।
Subjects: Biology & Chemistry
Work From Home / Online Classes
CV attached
इस समय मुझे नौकरी की बहुत जरूरत है और घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है।
अगर आपके संपर्क में कोई ऐसी vacancy है तो कृपया मुझे बताएं या इस पोस्ट को शेयर कर दें आपका एक शेयर मेरे लिए बहुत मायने रखता है।1/2
No. Reports and Netanyahu's statement confirm the Indian captain fought back and resisted while stabbed and bleeding, transmitted the emergency/hijack codes, then opened the cockpit door so passengers and crew could enter and overpower the attacker. He did not run away. Passengers helped, but his actions were decisive.
@NEWSMAX@RobFinnertyUSA And how are you DIFFERENT from them ?
You conveniently missed out the fact that the CAPTAIN WAS AN INDIAN who managed to send that code and open teh cockpit door while he was being stabbed and was bleeding to his death !!!
Freaking HYPOCRITES ! Freaking DISCRIMINATION!!
इतनी महंगाई के लिए भी एक दिया जलाइए… 🪔
आज एक तरफ़ साहब का जन्मदिन मनाया जा रहा है, दीये जलाए जा रहे हैं, जश्न की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं…
और दूसरी तरफ़ जिस घर में रसोई का तेल खरीदना मुश्किल हो गया है, वहाँ चूल्हा कैसे जलेगा?
जिस परिवार की कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, दवा, बच्चों की फीस, गैस और रोज़मर्रा की जरूरतों में चला जाता है, उसकी परेशानी कौन दिखाएगा?
और बिहार को देखिए…
एक तरफ़ पानी में डूबे घर, बर्बाद फसलें और राहत का इंतज़ार करते 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
दूसरी तरफ़ उसी बिहार में जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने के कार्यक्रम हो रहे हैं।
सवाल जन्मदिन मनाने का नहीं है।
सवाल प्राथमिकताओं का है।
जब जनता महंगाई से परेशान हो,
जब बाढ़ में घर डूब रहे हों,
जब परिवार राशन और दवाइयों के लिए संघर्ष कर रहे हों-
तब मीडिया का कैमरा सिर्फ़ जश्न पर क्यों रहे?
एक दिया साहब के जन्मदिन के लिए सही…
लेकिन उस परिवार के चूल्हे के लिए ? जिसमें आज खाना बनाने के लिए तेल तक नहीं है।
जश्न मनाइए, शुभकामनाएँ दीजिए-
लेकिन जनता की तकलीफ़ को जश्न की रोशनी में छिपाइए मत।
दादी की बहुत सुंदर गजल सुनकर मजा आ गया
उम्र चाहे कोई भी हो लेकिन टैलेंट कभी खत्म नहीं होता है यही कारण है कि दादी की आवाज में जादू है
आपको कैसा लगा दोस्तों