1.काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद के नज़दीक जन्तर मन्तर में पिछले कई दिनों से, ख़ासकर मेडिकल की नीट जैसी विशेष परीक्षा आदि में पेपरलीक व अन्य गड़बडियों के दुष्परिणामों से छात्र-छात्राओं व उनके परिवार के काफी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे जीवन को लेकर जारी अनिश्चितकालीन आन्दोलन के कारण सड़क से लेकर संसद तक में ज़बरदस्त हंगामा बरपा है और अब इसका राजनीतिकरण करने से यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव का हो गया है, जिस विषम स्थिति से देश को निकालना ज़रूरी है, क्योंकि इससे दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों में भी आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
2.वैसे चाहे पूरे देश में अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा चोरी/ग़बन आदि का गर्म मामला हो या फिर आल-इण्डिया व राज्यों की परीक्षाओं आदि में पेपरलीक का मुद्दा हो, यह सभी मूलतः भ्रष्टाचार के हर स्तर पर पनपने का ही परिणाम है।
3.इसके साथ ही यह संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) से भी जुडा़ मामला है, जिसके अभाव में यह देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है, जबकि संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने गुड गवरनेन्स हेतु इस पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत पर विशेष बल दिया है।
4.संक्षेप में मेरा यही कहना है कि देश व जनहित से जुड़े वर्तमान विकट हालात के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु सरकार तथा माननीय कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।
5.साथ ही, सीजेपी के व्यापक हो रहे आन्दोलन का अब विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने-अपने संकीर्ण स्वार्थ में राजनीतिकरण करके सड़क से लेकर संसद तक में टकराव व हिंसा किया जाना घोर अनुचित। सरकार व आन्दोलनकारी दोनों मिलकर इसका शान्ति व सौहार्दपूर्ण समाधान जितना जल्द निकालें उतना ही उचित।
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
#आरएसएस और #कांग्रेस का ये रिस्ता क्या कहलाता है ?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी, जिसका छुपा उद्देश्य ब्राम्हणों के वर्ण वर्चस्व को बनाये रखना और कांग्रेस का हर मामले मे साथ देना था। कांग्रेस और आरएसएस के बीच संबंध जटिल रहे हैं, और इसमें नेहरू-गांधी परिवार की भूमिका विवादास्पद रही है। ये बड़ी ही गहन विश्लेषण की बात हैं, आईये समझते हैं।
मोहनदास गांधी के साथ आरएसएस का रिश्ता शुरू में सौहार्दपूर्ण था। गांधीजी ने आरएसएस की अनुशासन और सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की थी, लेकिन उनकी कुछ नीतियों और हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर के कारण वैचारिक मतभेद थे ऐसे वो दिखाते थे, हालांकि गांधीजी भी वर्णधर्म के कट्टर समर्थक ही रहे हैं, 1948 में गांधीजी की हत्या के बाद, नाथूराम गोडसे, जो पूर्व में आरएसएस से जुड़े थे, के कारण संगठन पर प्रतिबंध लगा। हालांकि, जस्टिस कपूर आयोग ने स्पष्ट किया कि हत्या के लिए आरएसएस संस्थागत रूप से जिम्मेदार नहीं था।
जवाहरलाल नेहरू आरएसएस के कटु आलोचक थे। उन्होंने इसे सांप्रदायिक और फासीवादी ताकत माना, और 1947 में इसे "नाजी तर्ज पर निजी सेना" करार दिया, हालांकि आरएसएस से ख़ुदको अलग दिखाने के लिए ये मात्र प्रचार ही हैं प्रतीत होता हैं, क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान आरएसएस के स्वयंसेवकों की महान देशभक्ति को देखते हुए नेहरू ने 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में उन्हें शामिल होने का न्योता दिया।
इंदिरा गांधी के शासनकाल में 1975 की आपातकाल के दौरान आरएसएस पर प्रतिबंध लगा, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया। कुछ स्रोतों के अनुसार, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने आरएसएस के साथ रणनीतिक संपर्क बनाए रखा। राजीव गांधी ने 1984 के चुनावों में आरएसएस के समर्थन की बात भी सामने आई, जब नानाजी देशमुख ने उनके पक्ष में लेख लिखा।
कुल मिलाकर, कांग्रेस और आरएसएस के बीच संबंध तनावपूर्ण, लेकिन समय-समय पर सहयोगात्मक रहे। नेहरू-गांधी परिवार की ऐतिहासिक संबंध इसे दर्शाते हैं, जो वैचारिक विरोध और रणनीतिक अवसरवाद का मिश्रण रहा हैं।
- संदीप आनंद, संपादक, नेशनल चौपाल
#आरएसएस #Congress #RSS #Indianpolitics
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
@raviadi7793 Bhai मिलने के लिये दिल में तमन्ना होनी चाहिये उस महान शक्सियत से मिलने को ....लेकिन ये तेरे पास नहीं है और रही बात बेचने की तो तुसी अपना ईमान बेच हीं चुके हों
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
CBSE बोर्ड की छात्रा हर्षिता का कहना है 👇
• उन्हें फिजिक्स की जो आंसर शीट दी गई, वो उनकी है ही नहीं
• जो आंसर शीट हर्षिता को दी गई, उसमें उन्हें सिर्फ 12 नंबर मिले हैं
• हर्षिता को दी गई आंसर शीट में हैंडराइटिंग बिल्कुल अलग है
इस गड़बड़ी के चलते हर्षिता का रिजल्ट बिगड़ गया और अब वह प्रतियोगी परीक्षाओं पर ध्यान नहीं दे पा रही है। साथ ही, उसका परिवार भी बहुत परेशान है।
CBSE बोर्ड की आंसर शीट में गड़बड़ी का ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले वेदांत नाम के छात्र को भी गलत आंसर शीट थमा दी गई थी।
साफ है- मोदी सरकार और उनका भ्रष्ट सिस्टम छात्रों का भविष्य तबाह करने पर तुला है, जिसकी कोई माफी नहीं है।
इस नाकामी के जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
आरक्षण के जनक, बहुजन समाज के सच्चे मसीहा और सामाजिक न्याय की नींव रखने वाले छत्रपति शाहूजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
आपने शिक्षा और हक की जो मशाल जलाई थी, हम उसे आदरणीय बहनजी के नेतृत्व में आगे बढ़ा रहे हैं।
#ChhatrapatiShahujiMaharaj#BahujanNayak
भारत की कोई भी राजनैतिक पार्टी दलित को जनरल सीट से नहीं लड़ाती है, उनको सिर्फ़ आरक्षित सीट पर ही टिकट देती है, TVK पार्टी ने जनरल सीट पर दलितों को टिकट बांटे और 28 MLA दलित समुदाय से चुनकर आए,
यह ऐतिहासिक बदलाव है, DMK AIDMK BJP ने दलितों को इग्नोर किया परिणाम आपके सामने है, एक्टर विजय ने दलितों को सम्मान दिया, उनको टिकट दिया, बाबासाहेब को अपनाया, दलितों ने भी बदले में भरपूर वोट और सहयोग दिया, थालापति विजय अब मुख्यमंत्री बनने वाले हैं,
तमाम पार्टियों को सलाह है कि जनरल सीट पर दलित आदिवासी को मौका दो, सिर्फ रिज़र्व सीट पर टिकट देकर उनका मनोबल मत तोड़ों 🔥🔥🔥