US Director of National Intelligence @DNIGabbard:
“Today, I’m releasing never before seen intelligence revealing new evidence of past US government funding for more than 120 biolabs in over 30 countries, including Ukraine.”
One more borderline racist opinion piece from @TheEconomist ...... here making fun of the Indian "uncle". Now, north Indians like making fun of the proverbial "phuphaji" - the bane of every family wedding. In Bengal, it is the eternally annoyed "pishi". I am sure other parts of India have their equivalent. However, the Economist is trying to convert this into some sort of political Gen Z thing by mocking the older generation. This is a serious cultural misunderstanding. We make fun of "phupha-ji" as a default - and this was true of all previous generations. Even phuphajis make fun of phuphajis. The journalist at Economist is trying to force fit their "angry, white male" stereotype that is a staple of the Western Left in their home market; tone deaf and contrived when applied to India.
@pulkitnpc I am 47 but and my son is 11 and he is preparing for GRE from now because I don't see any future in Indian education system as I am a Bhumihar (general category). Hell with them!
NEET में 22 लाख विद्यार्थियों की मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थिति पर मूत्र त्याग करने वाली NTA, वर्तमान सरकार और मंत्री पर चर्चा न कर के, आज जब PM, राज्यों के CM के कारों की संख्या और कहीं दूर हो रहे बुलडोज़र एक्शन पर पूरा 'समर्थक तंत्र' केंद्रित है।
क्यों? क्योंकि इसमें आप कोई जाति नहीं निकाल सकते, ना ही कहीं भाग सकते हैं। हर एक बीतते दिन में @BJP4India नीचे गिरती जा रही है। हाँ, कुछ लोग कह देंगे कि हरियाणा नगर निकाय चुनावों में हुई भारी जीत बताती है कि @narendramodi की लोकप्रियता अधिकतम स्तर पर है। अच्छी बात है!
धर्मेंद्र प्रधान या अन्य लोगों से मेरी व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है। मेरे घर में अभी ना तो कोई कॉलेज में हैं, ना अगले 18 वर्षों में होगा। फिर भी लिखना-बोलना आवश्यक है क्योंकि इस सरकार ने हमें 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' और 'पार्टी विथ अ डिफरेंस' कह कर वोट माँगा था।
उन रोते बच्चों, परेशान माता-पिता, प्रसन्न माफिया और निकृष्ट मंत्री-सरकार को देख कर भी यदि आप सिर्फ़ इसलिए कुछ नहीं लिख रहे कि मोदी जी कमज़ोर हो जाएँगे, तो याद रखिए कि एक दिन मोदी को युगपुरुष लिखने वाला पिता आज उनसे ही प्रश्न पूछ कर रो रहा है कि उसकी बेटी का भविष्य क्या है।
नेता की भक्ति अच्छी है, पर रेंगना और जीभ को सैंडपेपर बना कर चाटना आपकी प्रासंगिकता समाप्त करता है।
As many as eight Hindu majority States have had at least one non-Hindu Chief minister, but not a single non-Hindu majority State has ever had a Hindu Chief minister.
India is safe, secure, prosperous, plural, and empowering for non-Hindus only because India is majority Hindu.
इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा
बस तीन से पाँच मिनट। बिना किसी खर्च के। बिना किसी विशेष साधन के। सिर्फ अपनी नाक के अगले भाग पर ध्यान लगाओ – और देखो कैसे तुम्हारा पूरा शरीर ऊर्जा से गूंज उठता है। यह कोई जादू नहीं है। यह सनातन शास्त्रों का एक प्रयोग है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने बताया है।
संस्कृत श्लोक (गंधर्व तंत्र, श्लोक 17):
नासाग्रं चैव नाभिं च हृदयं च तृतीयकम्।
स्थानान्येतानि जीवस्य कल्पितानि शिवेन तु॥
अर्थ: नासिका का अग्र भाग, नाभि और हृदय – ये तीन स्थान हैं जहाँ जीव (आत्मा) निवास करता है। ये तीनों स्थान स्वयं भगवान शिव ने निर्धारित किए हैं।
दूसरा श्लोक (गंधर्व तंत्र, श्लोक 24):
सर्वगः सर्वदेहस्थो नासाग्रे च प्रतिष्ठितः।
प्रत्यक्षः सर्वभूतानां दृश्यते न च लक्ष्यते॥
अर्थ: जीव सर्वव्यापी है, सभी शरीरों में विद्यमान है, किन्तु वह नासिका के अग्र भाग में प्रतिष्ठित है। वह सभी प्राणियों को प्रत्यक्ष दिखाई देता है, फिर भी पहचाना नहीं जाता।
विधि – ऐसे करें अभ्यास:
किसी भी शांत जगह बैठ जाएँ। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। पालथी मार सकते हैं, नहीं तो कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं। पहले आँखें बंद करें और अपनी साँस पर ध्यान दें – कैसे साँस नाक से अंदर आ रही है, कैसे बाहर जा रही है। बस एक मिनट ऐसे ही देखें। साँस को जबरदस्ती न बदलें, जैसी है वैसी ही चलने दें। थोड़ी ही देर में मन स्थिर होने लगेगा।
अब आँखों को आधा खोलें – न पूरी तरह बंद, न पूरी तरह खुली। दोनों आँखों से अपनी नाक के अगले भाग को देखें। वह हिस्सा जहाँ नाक खत्म होती है। वहाँ कोई दाना हो, कोई रोएँ हों, या सिर्फ एक आकृति – जो दिखे, बस उसे देखते रहें। पलक झपक सकते हैं, कोई हर्ज नहीं। तीन से पाँच मिनट तक अपनी नाक के उस सिरे को निहारें।
फिर आँखें बंद कर लें। बंद आँखों से भी उसी नासिका अग्र को 30-45 सेकंड तक देखें। फिर धीरे-धीरे आँखें खोलें और उठें। बस। इतना सा प्रयोग है।
लाभ – क्या होगा:
सबसे पहला और सबसे बड़ा लाभ – मन की एकाग्रता। जिस कंसंट्रेशन पावर के लिए लोग तरह-तरह के सेमिनार और वीडियो देखते हैं, वह इस एक प्रयोग से घर बैठे मिल जाती है। मन स्थिर होता है, चंचलता घटती है। जो काम पहले देर से होता था, वह अब जल्दी होने लगता है। पढ़ाई हो, व्यापार हो, नौकरी हो – हर क्षेत्र में फोकस बढ़ता है।
दूसरा लाभ – मानसिक विकार दूर होते हैं। तनाव, चिंता, डिप्रेशन, अनिद्रा, अत्यधिक क्रोध, चिड़चिड़ापन – ये सब धीरे-धीरे पिघलने लगते हैं। मन शांत होता है, धैर्य बढ़ता है। छोटी-छोटी बातों पर अब उतना गुस्सा नहीं आएगा, उतनी उदासी नहीं होगी।
तीसरा लाभ – शरीर की ऊर्जा का संतुलन। हमारे शरीर में अलग-अलग ऊर्जाएँ काम कर रही होती हैं। जब वे असंतुलित हो जाती हैं, तो शरीर और मन दोनों गड़बड़ा जाते हैं। नासिका अग्र ध्यान उन ऊर्जाओं को संतुलित करता है। पाचन ठीक होता है, नींद गहरी आती है, दिनभर ताजगी बनी रहती है। आलस छूटता है, सुस्ती दूर भागती है।
चौथा लाभ – नेत्रों की शक्ति बढ़ती है। आँखें स्वस्थ रहती हैं। थकान कम होती है। पढ़ने, काम करने में आँखें जल्दी नहीं थकतीं।
पाँचवाँ लाभ – आध्यात्मिक उन्नति। जो लोग मंत्र जाप करते हैं, नाम जपते हैं, चालीसा पढ़ते हैं – उन्हें इस ध्यान से सीधा फायदा मिलता है। उनका जप शीघ्र सिद्ध होता है, शीघ्र फलदायी होता है। दैवी शक्तियों का सहयोग मिलने लगता है। क्योंकि अब मन एकाग्र है, तो जो भी साधना करोगे, वह गहरी होगी। शीघ्र सफलता मिलेगी।
छठा लाभ – आत्म-साक्षात्कार। जब तुम नियमित रूप से यह ध्यान करोगे, तो एक दिन वह क्षण आएगा जब तुम उस जीव को पहचान लोगे जो तुम्हारी नाक के अग्र भाग पर स्थित है। शास्त्र कहते हैं – वह प्रत्यक्ष दिखता है, फिर भी पहचाना नहीं जाता। यह ध्यान उसे पहचानने का द्वार है। और जिसने अपनी आत्मा को पहचान लिया, उसके लिए फिर कुछ असंभव नहीं रह जाता।
कैसे अपनाएँ:
प्रतिदिन तीन से पाँच मिनट इसके लिए निकालें। सुबह के समय सबसे उत्तम है, पर किसी भी समय कर सकते हैं। पूजा-पाठ से पहले करेंगे तो और भी अच्छा। लगातार दस दिन करके देखें – खुद अंतर महसूस करेंगे। न तो समय ज्यादा चाहिए, न धन। बस थोड़ी सी नियमितता चाहिए।
एक लाइन में सार:
"नासिका अग्र ध्यान वह द्वार है जहाँ तुम्हारी आत्मा स्वयं बैठी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है – बस उसे देखना भर है।"
To @UnSubtleDesi for relentlessly documenting TMC crimes and to @jsaideepak for resolutely fighting post-poll violence cases. Both at great personal and professional risk.
The darkest hour they say is just before dawn. You endured that hour so we could greet the dawn. Thank you.
"मैं आज़ादी की लड़ाई में बिल्कुल भी शामिल नहीं था"
बल्कि मैंने इसका विरोध किया था।"*
*नेहरू जी --
*एक दुर्लभ वीडियो फुटेज है...*
*जिसमें नेहरू एक ब्रिटिश पत्रकार को इंटरव्यू दे रहे हैं*
*तब नेहरू कह रहे हैं नहीं गांधी जी देश का बंटवारा बिल्कुल नहीं चाहते थे*
लेकिन मैने करवाया
एक पत्रकार के लिए इससे ज्यादा संतोष की बात क्या हो सकती है कि वो जो मुद्दा उठाए वो देश तक पहुंच जाए।
दिसंबर 2024 में मैने #DoTook में बावनी इमली का इतिहास याद दिलाया था, जो कांग्रेस और वामपंथियों ने छुपाया। दरअसल उस दिन खड़गे जी ने कहा था कि आजादी तो हमने (कांग्रेस) ने ही दिलाई। पर सहसा रिसर्च करते हुए मेरे सामने बावनी इमली का इतिहास आ गया। जब कांग्रेस का जन्म भी नहीं हुआ था तब अंग्रेजी हुकूमत से लड़ते हुए 52 स्वतंत्रता सेनानियों को एक ही दिन (और वो आज ही की तारीख थी, 28 अप्रैल 1858) अंग्रेजों ने इमली के पेड़ पर फांसी दे दी थी। कितने दुर्भाग्य की बात है कि स्वतंत्रता संग्राम के पूरे इतिहास में 52 कांग्रेसियों को फांसी नहीं हुई,पर जिस एक ही दिन 52 लोग फांसी पर लटका दिए गए उसका हमारे इतिहास की किताबों में कोई जिक्र तक नहीं है।
दो टूक में जब मैने यह विषय उठाया तो यह क्लिप बहुत वायरल हुई और देश की नई पीढ़ी ने बावनी इमली का इतिहास जाना। और आज ही मुझे लेखक भगवंत अनमोल की लिखी पुस्तक "बावनी इमली" मिली! भगवंत अनमोल को यह पुस्तक लिखने के लिए बधाई।
और आप सबसे आग्रह है कि यह पुस्तक जरूर पढ़ें और हमारे गुमनाम स्वतंत्रता सैनियों का वो इतिहास जरूर पढ़ें तो एक साजिश के तहत हमसे छुपाया गया।
🚨 HUGE! J Sai Deepak makes sharp arguments in Sabarimala hearing 💥
— He argues: "If a practice is SACRED & beyond court reach, State cannot INDIRECTLY drag it under scrutiny by framing laws around it."
Calls it a Constitutional OVERREACH. Surya Kant responds firmly, do not question the CORE of judicial review.
Sai invokes Constituent Assembly intent: Religious groups must retain autonomy in managing their affairs.
A defining constitutional debate 🔥
🎬With Ishwar's grace, am posting Part-1 of my short Movie: 'Fibonacci Speaks'. May many children see it like Dhurandhar! to know How our Maths changed the World !
लव जिहाद की एक कहानी...
एक कंपनी के मालिक की बेटी को एक मुस्लिम लड़के से प्यार हो गया... वह प्यार में पागल थी और उसने अपने माता-पिता की बात नहीं मानी। माता-पिता बेबस हो गए, फिर उन्होंने एक दोस्त की सलाह ली। दोस्त का परिवार और यह परिवार पिकनिक पर गए।
पिकनिक के दौरान, दोस्त ने साफ कहा कि वह लड़की की तरफ है। उसने कहा कि सभी धर्म बराबर हैं और माता-पिता को शादी करवानी चाहिए। इस वजह से, लड़की अब उस दोस्त को अपना सहारा मानने लगी। लड़के के कॉल रुक-रुक कर आते रहे।
दोस्त लड़की को एक तरफ ले गया और उसे एक मराठी में ट्रांसलेट की हुई किताब दी और कहा, "तुम एक मुस्लिम लड़के से शादी करने जा रही हो, इसलिए तुम्हें उसके कल्चर के बारे में पता होना चाहिए।"
किताब का नाम: 'नॉट विदाउट माय डॉटर' (मराठी ट्रांसलेशन)
लड़की ने रात 11:30 बजे किताब पढ़ना शुरू किया और कुछ ही मिनटों में उसने अपनी दोस्त के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। उसकी आँखों में आँसू थे। उसने कहा, "यह बहुत डरावना है, मैं उससे शादी नहीं करूँगी।"
दोस्त ने फिर भी अपनी बात नहीं बदली। उसने उसे समझाया, "भले ही धर्म ऐसा हो, क्या तुम्हारा प्यार सच्चा है? तो चलो एक काम करते हैं, उससे कहो कि वह हिंदू धर्म अपना ले और हम तुम्हारी शादी करवा देंगे। मैं तुम्हारे पिता को मना लूँगा।"
लड़की को यह बात अच्छी लगी और उसने तुरंत लड़के को फ़ोन करके यह सब बताया। इस पर लड़के ने जवाब दिया, 'तुम्हें क्या लगता है, मैं तुम जैसी दो परसेंट प्रॉस्टिट्यूट के लिए अपना मज़हब बदल लूँगा?'
उसकी बातें लड़की के कानों में ऐसे लगीं जैसे पिघला हुआ सीसा डाल दिया गया हो। उसे एहसास हुआ कि जिस लड़के से वह अपनी जान से ज़्यादा प्यार करती थी और जिसके लिए अपने माता-पिता से लड़ी थी, उसकी नज़रों में उसकी क्या कीमत है। फिर उसने शादी से साफ़ मना कर दिया....
मुख्य किताबों की लिस्ट -
1)द किंगडम बिहाइंड द बुर्का - कारमाइन बिन लादेन
2)फ्रॉम तेहरान जेल - मरीना नेमत
3)इनफिडेल एंड नोमैड - अयान हिरसी अली
4)ब्लासफेमी - तहमीना दुर्रानी
5)नॉट विदाउट माई डॉटर - बेट्टी महमूद
6)लज्जा - तस्लीमा नसरीन
7)द लास्ट गर्ल - नादिया मुराद
ये किताबें ज़रूर पढ़नी चाहिए। सेक्युलर लोगों को ये किताबें खास तौर पर पढ़ने के लिए दी जानी चाहिए ताकि उन्हें असलियत पता चले। ये सभी ऑटोबायोग्राफी और सच्ची कहानियाँ हैं।
मुझे ये कहानी कहीं पर मिली तो मैं आप सबके लिए ले आई ।
My urgent message to Mr @narendramodi ji. Why are you still silent on today's killing of innocent 2 babies while sleeping with her mother in midnight with rockets by Kuki militants? Manipur is not a part of India? Manipur deserves justice now. No Justice, No Rest. 😢🙏
There are frequent debates in India about what exactly forced the British to grant us Independence in 1947. It was a combination of factors that included a war-weary Britain, and the long-running political mobilisation in India. However, the fear of guerrilla warfare by the revolutionaries, and the possibility of a revolt in the Indian armed forces (esp after INA & Naval revolt) played a major role. We do not need to debate this because Prime Minister Attlee has explicitly noted this in the Transfer of Power papers (Nov 1946). Just look up Vol 9, doc 35, page 68 (199 in the pdf):
https://t.co/yvIioo0zl7
An Army whistleblower claims he once visited a secret civilization on the Moon.
He says its inhabitants travel in egg shaped UFOs and that he personally flew in one.
He also alleges the deep state possesses Stargate technology capable of teleporting both people and spacecraft.
“There’s people living in the Moon.”
“There are multiple Moon bases.”
Thanks @LauraLoomer. I knew that your own direct experience will be transformative. Let’s leave the past biases behind and join hands to build a future for humanity.
I hope the IDIOTS trolling me for encouraging you have the decency to apologize and learn the art of building strategic alliances.