जंतर मंतर एक राष्ट्रीय प्राचीन धरोहर है वहाँ पर धरना प्रदर्शन करना और आंदोलन के लिये समर्थकों को इक्ट्ठा करना कहाँ तक उचित है ?
लोगो की भीड़ में अराजक, देशद्रोही तत्व शामिल होकर कभी भी अनियंत्रित भीड़ के साथ इन धरोहरों को नुक़सान पहुचाl सकते हैं. इसी जगह बहुत प्राचीन बाज़ार, शोरूम और सरकारी कार्यालय आदि की बड़ी बड़ी इमारतें हैं.
जंतर मंतर पर जगह भी कम है ऐसी स्थिति में वहाँ भगदड़ या आगजनी जैसी स्थिति यदि पैदा हो जाये तब जान माल का कितना बड़ा नुक़सान हो सकता है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.
मैं समझता हूँ कि कोई खुली जगह की तलाश सरकार को करना चाहिए जो धरना प्रदर्शन के लिए चिह्नित हो जहाँ ज़्यादा भीड़ हो भी जाये तो खुली जगह रहे. वहाँ सभी आवश्यक सुविधाएं कर दी जायें. वैसे तो रामलीला मैदान है लेकिन वह एक धार्मिक स्थल है, तब जमुना के साथ का छायादार पेड़ो की कोई जगह बनायी जा सकती है या सरकार द्वारा जो जगह ठीक समझी जाये.
जंतर मंतर पर तो धरना प्रदर्शन तुरंत बंद करवा दिया जाए जिसके लिए सरकार आदेश दे या क़ानून बनाये.
विनम्र अनुरोध के साथ निवेदन है
@AmitShahOffice
जंतर मंतर एक राष्ट्रीय प्राचीन धरोहर है वहाँ पर धरना प्रदर्शन करना और आंदोलन के लिये समर्थकों को इक्ट्ठा करना कहाँ तक उचित है ?
लोगो की भीड़ में अराजक, देशद्रोही तत्व शामिल होकर कभी भी अनियंत्रित भीड़ के साथ इन धरोहरों को नुक़सान पहुचाl सकते हैं. इसी जगह बहुत प्राचीन बाज़ार, शोरूम और सरकारी कार्यालय आदि की बड़ी बड़ी इमारतें हैं.
जंतर मंतर पर जगह भी कम है ऐसी स्थिति में वहाँ भगदड़ या आगजनी जैसी स्थिति यदि पैदा हो जाये तब जान माल का कितना बड़ा नुक़सान हो सकता है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.
मैं समझता हूँ कि कोई खुली जगह की तलाश सरकार को करना चाहिए जो धरना प्रदर्शन के लिए चिह्नित हो जहाँ ज़्यादा भीड़ हो भी जाये तो खुली जगह रहे. वहाँ सभी आवश्यक सुविधाएं कर दी जायें. वैसे तो रामलीला मैदान है लेकिन वह एक धार्मिक स्थल है, तब जमुना के साथ का छायादार पेड़ो की कोई जगह बनायी जा सकती है या सरकार द्वारा जो जगह ठीक समझी जाये.
जंतर मंतर पर तो धरना प्रदर्शन तुरंत बंद करवा दिया जाए जिसके लिए सरकार आदेश दे या क़ानून बनाये.
विनम्र अनुरोध के साथ निवेदन है
@AmitShahOffice
मुझे तो लगता है कि काकरोच पार्टी में ज्यादातर छात्र ही नहीं हैं , यह वही हाल है जो पिछले दिनों हुए दो आंदोलन शाहीन बाग और किसान आंदोलन में अराजक तत्व और देश हित के विपरीत चलने वाले राजनीतिक दलों ने घुसकर, देश की छवि विश्व में ख़राब कर, विदेशों से धन जुटाने का प्रयास किया था. आज कल देश की जनता को अराजक तत्वों से सावधान रहना चाहिए.
काकरोच पार्टी के नेताओ ने संसद भवन तक मार्च के दौरान जो संघर्ष पुलिस के साथ किया वह कितना शर्मनाक था, छात्रों को हमेशा मोहरा बना कर ही रखा जाता है अराजक तत्व और पार्टियां इनका उपयोग करते रहें हैं जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके. संसद मार्च में पुलिस के द्वारा जो गिरिफ़्तार हुआ या जाँच में दोषी पाया जाता है, यदि वह किसी स्कूल का छात्र है तब उसपर सरकार को नर्मी की की जानी चाहिये और इसके अलावा अन्न सभी व्यस्क उपद्रवकारियो पर दंगा आदि करने की सख्त धराओं में कार्यवाही की जानी चाहिये.
विनम्र निवेदन के साथ
@PMOIndia
यह राजनीति की त्रासदी दुनिया में तहलका मचा रही है जिसके नायक माननीय ट्रम्प जी हैं. सभी को सोंचना चाहिए कि कितना अत्याचार आम जनता के साथ हो रहा है, मासूम बच्चों की हत्या हो रही है, जीव जंतु कीड़े मकोड़े पक्षी आदि हजारों अनगिनत मारे जा रहें हैं, जो वातावरण के लिए हानिकारक हैं वह सभी प्रदूषण बमों मिसायलो के द्वारा फैलाया जा रहा है जो देश कार्बन उत्सर्जन के लिए सबसे अधिक ज़िम्मेदार होता जा रहा है वही यह सब रोज़ रोज़ नए बहाने बना कर युद्ध का स्तर बड़ा करता जा रहा है और किसी भी बात या समझौते पर नहीं रुक रहा है.
ऐसे लोगों को क्या लगता है की उनके कदमों को रोकने कोई नहीं आ सकता है लेकिन अब समय बहुत जल्दी आ रहा है जब सारी दुनिया से कुछ लोग निकल रहे हैं जो इनको रोकने का प्रयास करेंगे और यह ऐसे मुंह बाये खड़े रह जाएँगे न घर के रहेंगे न घाट के .
भारत में चंदा चोरी और असंवैधानिक लूट कोई नई बात नहीं है यह वर्षों से होता आया है, गरीब व अपाहिज बच्चों की देखभाल खाना पीना शिक्षा के नाम पर चंदा, बुजर्गों की देखभाल के लिए, स्कूल , रामलीला, दंगल , बाढ़ पीड़ित , नेत्रहीनों की सुव्यवस्था इन तमाम के साथ साथ मंदिरों और भगवान के धार्मिक आयोजनों तक के चंदे व दान में हमेशा ही बंदरबाट लोग करते रहते हैं. बड़ी लूट हमेशा होती रहीं हैं सोने जेवरात खजाने से और यहाँ तक कि भगवान की मूर्ति से भी खींच कर ले गए, हजारों साल की धरोहर कला शिल्प तक को तहस नहस किया जाता रहा है.
लोग और भगवान सबकुछ देखते रहे कोई रक्षा नहीं कर सका, न धन की न स्वम् की.
लोग सोचते हैं कौन देख रहा है और अगर देख भी लेगा तो क्या कर लेगा धन दौलत तो मिल गई , परिवार तो कुछ पा गया अगर सजा मिल भी जाएगी भुगत लेंगे और जो अपनी ही रक्षा नहीं कर सका जिससे छीना गया खंडित किया गया वो क्या सज़ा दे पाएगा .
बनाए जाते है जिनको पार किया जा सकता है. बड़े ही शर्म की बात है की हजारों करोड़ की लागत के मंदिरों में धन प्राप्ति, गिनती और बैंक में जमा करने की व्यवस्था इतनी असुरक्षित होती है जहाँ चोरों को रास्ता मिल जाता है, मंदिर के दरवाजों चौकियों से सोना जवाहरात गायब कर देते हैं.
@UPGovt
जब राम मन्दिर या अन्य मंदिरों में करोड़ों रुपया आता है तब दानपात्रों से भी धन की चोरी हो सकती है उन जगहों से जहाँ से धन डाला जाता है. मैंने कभी सुना था की पतली छड़ में राल लगाकर गुल्लकों से नोट निकाले जा सकते हैं ऐसे में दान पात्रों को गोदरेज़ जैसी कंपनी से ही बनवाना चाहिए
और ताले भी उन्ही से आधुनिक तरह के बनवाये जाये जो निर्धारित समय पर ही खोले जा सकें यानी मैकेनिकल व इलेक्ट्रॉनिक दोनों के माध्यम से बनाये गए हों, ताकि रात में कोई हरकत न हो सके. अभी भी कई जगह दान पेटी जीआई शीट के बने होते हैं और उनके धन जाने के रास्ते में एक आध पार्टीशन
इसका मतलब यह है कि महँगे तेल का कुछ भी भंडार नहीं हो सका. ऐसी स्थिति में अब तेल के दामों में गिरावट एक दम हो रही है तब सरकार को तेल कंपनियों से कहकर क़ीमत भी कम कराना चाहिए और सरकार को कीमत में कमी की घोषणा समय समय पर करने का विचार करना चाहिये.जनता को आभास करायें
@PetroleumMin
देश में डीजल , पेट्रोल व गैस की माँग और खपत बहुत अधिक है अत: सरकार को अपना सुरक्षित भंडार को बचाकर रखना, जलडमरूमध्य में उत्पन्न परेशानियों व लड़ाई के समय बहुत मुश्किल हो गया था . हमारे देश की सरकार जितना भी तेल व गैस आयात करती थी उससे ज़्यादा ही तेल गैस रोज का खर्च होता था.
अता वैज्ञानिकों से इस पर विचार कर कुछ करने का निवेदन जनहित में करता हूँ. मुझे उम्मीद है कि यह संभव है.
हमारे देश के वैज्ञानिक सर्वश्रेष्ठ हैं और विदेशों में इनकी योग्यता गुणगान होता है. देश में एक से बढ़कर एक शिक्षा संस्थान है जहाँ कुछ भी कर पाना संभव है
@dgcsirIndia@iitdelhi
आज कल लोगो के पर्स भरे हुए होते है उनमे कई बैंकों के क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, बड़े शोरूम्स के डिस्काउंट कार्ड्स आदि इतने अधिक भरे होते है कि पीछे पैंट की जेब में पर्स का आना मुश्किल होता है. वैज्ञानिक ऐसी खोज करें की एक ही कार्ड पर सभी बैंक अपने अपने खाते के डेबिट व क्रेडिट
कार्ड की एंट्री कर दे और इनका इस्तेमाल करने वाले कोड नंबर इस्तेमाल करने के साथ मन चाहे कार्ड और बैंक अकाउंट के ज़रिए पेमेंट कर सकें . इसी प्रकार एक बिजनिस कार्ड बने जिस पर शॉप कीपर अपनी डिटेल भर दें . आज की वैज्ञानिक खोजों की प्रगति को देखते हुए, कुछ भी संभव हो सकता है
यह एनसीआर में पंजीकृत एवम चलने वाले वाहनों पर लगाना अनिवार्य हो. साथ ही उन शहरों में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपयोग किया जा सकता है जहाँ पर आवश्यक हो . यह एक सुझाव है जिस पर उपयोगिता के लिये अनुसंधान किया जा सकता है .
कृपया विचार करें
@CPCB_OFFICIAL@MoHFW_INDIA@iitdelhi
पोल्युशन को कम करने में वाहनो की मदद ले सकते हैं क्योकि उनके द्वारा भी इसे फ़ैलाया जाता है. प्रत्येक वाहन के टॉप पर एक फ़िल्टर असेंबली लगाना अनिवारिये किया जाए जिसमे वाहन के चलते समय आगे से दूषित हवा अंदर जाए और बीच में फ़िल्टर से साफ़ होकर पीछे की ओर निकले .
वाहनों के लिए उनकी छमता के हिसाब से फ़िल्टर असेम्बलियाँ बनाई जाए और इनके फ़िल्टर की सफाई और रखरखाव वाहन मालिक करे जिसकी जाँच होनी चाहिए. प्रदूषण की रोकथाम में सरकार के साथ साथ वाहन मालिको का भी सहयोग लेना चाहिये. इससे जो वाहन जितना प्रदूषण फैलायेग उसका कुछ हिस्सा साफ़ भी करेगा .
फिर यह सुनिश्चित किया जायेगा कि बीजेपी सरकार दस्यों साल तक राज्य करती रहे . इसके लिये इनके कार्यकर्तायों एवं वोटरों को भी लगवाया जाएगा और लोग देखते रह जायेंगे कि चुनाव भी ईमानदारी से हो रहें हैं और बीजेपी जीत रही है - क्योंकि कांग्रेसियो, विपक्षी पार्टी और सपाई को नहीं मिलेगा….
AI के द्वारा सभी महामारीयो से सुरक्षा के लिए वैक्सीन बनाई जा रही है और उसका परीक्षण किया जा रहा है।अब यह भी परीक्षण किया जा रहा होगा की ऐसी वैक्सीन बनाई जाए जो आदमी को सो वर्षों से कहीं अधिक जीवन जीने की छमता प्रदान करे और सफल होने पर सबसे पहले सत्ता पक्ष के लोगों को टीका लगवाए.
से अब तो बच्चों की माँ भी कहने लगी है कि अर तुम जनरेटर नहीं ला सकते हो तब मैं अपने पापा को कह देतीं हूँ वोह भिजवा देंगें … अब सब कुछ होते हुए भी असहाय हैं और क्या क्या झेलना और सुनना पड़ता है.
क्या यह सब इस देश की आजादी के तुरंत बाद की उन सरकारों की नाकामी का परिणाम ही तो है ?
बचपन में हम कितने ख़ुश रहते थे, हमारे पिताजी रेलवे में तब ऐसे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर थे जहाँ बिजली नहीं होती थी , सिंग्नलों में दीपक जला कर रखे जाते थे जिसको हरा लाल देखकर ड्राइवर ट्रेन चलाते थे. शाम को बान की चारपाई आँगन में डाल कर उनपर पानी छिड़क कर रात को खुले में तकिया लेकर
सोते थे, हम बच्चे उन चारपाइयों पर कूद कर एक से दूसरे पर आया जाया करते थे और रात को चैन से सोते थे, अब हर कमरे में गद्दे वाले बेड है पंखे और ऐसी लगे हैं और हम बिजली जाने पर रात में जागते रहते है नीचे गद्दे गर्म लगते हैं .बच्चे झल्लाते हैं कहते है जनरेटर ले आओ , बार बार बिजली जाने