देशभर में कनेक्टिविटी को और सशक्त करने के लिए हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बिहार में NH-31 और NH-231 के खगड़िया-पूर्णिया सेक्शन को 4-लेन में अपग्रेड करने को मंजूरी दी गई है। इससे पूरे राज्य, विशेषकर खगड़िया, भागलपुर, कटिहार और पूर्णिया के लोगों को बहुत लाभ होगा। यह परियोजना न केवल यात्रा समय और ईंधन की बचत करेगी, बल्कि इससे यहां के चौतरफा विकास को भी नई गति मिलेगी।
https://t.co/ZdkR2f3v65
🚨 SUPREME COURT : "If both parents are IAS officers, why seek reservation?"
"The parents have studied, they are in good jobs, they are getting good income, and the children want reservation again"
"We will never get out of it"
"With educational and economic empowerment, there is social mobility"
"See, they should get out of reservation"
Now that Trinamool Congress is out of power, they won't be able to make money any longer. The principal motivation behind being in TMC is to make money. With that opportunity gone, the party will dwindle and eventually peter out.
But nature abhors a vacuum. Who will get into the political vacuum in West Bengal that TMC will leave behind? It seems it can only be CPI(M), which is VERY BAD NEWS. If anything, they are more pernicious than TMC.
BJP central leadership must now craft a strategy for this likely situation. I have for long clamored for a think tank in the state BJP, with no result so far. The time has come to think about such a think tank. @AmitShah@NitinNabin@SamikBJP@sunilbansalbjp
अरविंदो मार्ग पर पद्मिनी एनक्लेव में कोठी बंगले में रहने वाले लोगो ने अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए सर्विस रॉड को लोहे की ग्रिल लगाकर हमेशा के लिए बंद कर दिया जिससे हर रोज लाखो लोगो को ग्रिन पार्क से हौज खास की ओर जाने वाले लोगो को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है। @gupta_rekha@upadhyaysbjp@DelhiPwd@MCD_Delhi@LtGovDelhi@p_sahibsingh
"Keep this video and played when the result comes in Tamil Nadu"
Prashant Kishor- man who could rightly predict everybody's political future except his own.
25 acres. Rs 289 crore. 15 students. And this is build to be the excellent archaeology campus.
But when I visited India’s “ghost campus” — what I found raises serious questions.
Read: https://t.co/tbHARaprAc
निकृष्ट चाचा!
यूपी- ललितपुर की आरूषि के पिता की भोपाल में मौत हो गयी. वह एक निर्माण कंपनी में मुलाजिम थे. कंपनी ने 48 लाख रूपये का मुआवजा तय किया.
ग्रामप्रधान और आरूषि के चाचा ने षड़यंत्र करके RTGS से 16 लाख रूपये की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली. बाकी पैसे के चेक ले लिये. यह सब ग्रामप्रधान और चाचा ने मृतक के अंतिम संस्कार से पहले कर लिया.
बेशर्म चाचा अंतिम संस्कार के खर्चे के नाम पर 50 हजार रूपये भी ले आया.
आरुषि और उसकी मां को एक रूपया भी नही मिला. गांव में पंचायत भी हुई लेकिन बेईमान किसी भी तरह राजी नही है. अब आरूषि पैसा और इंसाफ पाने के लिए चिलचिलाती धूम में अफसरों के चक्कर काट रही है.
यदि आप भी केदारनाथ यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए मेरी तरफ से कुछ जानकारी एवं सुझाव-
● आप जहाँ भी रहते हैं सबसे पहले आपको यदि ट्रेन से आ रहे हैं तो आप हरिद्वार आईये यदि फ्लाइट से आ रहे हैं तो आप देहरादून आईये ।
● हरिद्वार आपका सेंटर पॉइंट है इसके बाद आप यदि केदारनाथ के लिए बस से जाना चाहते हैं तो सबसे पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन हरिद्वार से गौरीकुंड की बस बुक कर लें क्योंकि आपको तुरंत टिकिट मिलना मुमकिन नहीं है और यदि आप कार से जाना चाहते हैं केदारनाथ तो 3 दिन के लिए कार होती है बुक और यदि केदारनाथ-बद्रीनाथ जाना चाहते हैं तो 5 दिन के लिए कार बुक होती है जो आपको हरिद्वार से केदारनाथ-बद्रीनाथ के दर्शन कराके वापिस हरिद्वार छोड़ देती है । (यदि आप कार को देहरादून बुलाना चाहें या ऋषिकेश तो वहाँ भी बुला सकते हैं)
● वैसे तो कार के रेट फिक्स नहीं है लेकिन फिर भी स्विफ्ट 3500 रुपये प्रतिदिन, अर्टिका और इनोवा 4500-5500 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मिल जाती हैं (यदि भीड़ कम हो तो और भी सस्ती मिल जाती हैं)
● यदि आप Helicopter से जाना चाहते हैं तो सिर्फ इसी वेबसाइट से ही बुक करें- https://t.co/Kz9sEihD8E
● आने से पहले अपने रजिस्ट्रेशन इस वेबसाइट से बुक करें- https://t.co/GmtlrEf5Yg बगैर रजिस्ट्रेशन के न जाएं वरना दिक्कते हो सकती हैं वैसे ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन हरिद्वार में भी होते हैं लेकिन आप अपनी चीज़े पहले से करके आएं तो ज्यादा बेहतर हैं।
● हरिद्वार से केदारनाथ के लिए यदि कार से जा रहे हैं तो आपको आपका कार वाला रुद्रप्रयाग तक ले जाएगा फिर वहाँ से आपको 50 रुपये देकर गौरीकुंड के लिए कार मिलेंगी ।
● गौरीकुंड में स्नान करने एवं माता पार्वती जी के दर्शन के बाद आप अपनी पैदल यात्रा चालू कर सकते हैं यदि घोड़े से जाना चाहे तो 3500 रुपये के लगभग आपको देने होने जो आपको घोड़ा पड़ाव से लेकर बेसकैम्प तक छोड़ेगा ।
● पैदल यात्रा के दौरान सामान जितना कम हो सके उतना कम ले जाये (लेकिन उल्टी,दस्त, बुखार,सिर दर्द,कपूर और ठंडी का पूरा सामान रखें अपने साथ)
● गौरीकुंड से केदारनाथ लगभग 21 किलोमीटर है इसको पैदल चढ़ने में सामान्य लोगो को 5-7 घण्टे लगते हैं बस इतना याद रहे रास्ते में ज्यादा चीज़ें न खायें बस लेकिन लिक्विड चीज़ें लेते रहे जिससे चढ़ने में आपको आसानी होगी । ज्यादा रुके नहीं धीरे-धीरे चढ़ते चले ।
● शुरुवात में ज्यादा कवर करने की कोशिश करें क्योंकि छोटी लिंचौली तक थोड़े जल्दी कवर कर सकते हैं क्योंकि उसके बाद आपको हर 200 मीटर पर रुकना होगा और स्पीड कम और थकावट ज्यादा महसूस होगी ।
● बेसकैम्प में ही GMVN के टेंट होते हैं वहाँ आप अपने यात्रा की डेट के अनुसार टेंट बुक कर सकते हैं GMVN WEBSITE- https://t.co/Lam5wM1NWO
● बेसकैम्प से केदारनाथ मंदिर लगभग 1.5 किलोमीटर है,मंदिर के पास भी रूम ले सकते हैं लेकिन उनका कोई रेट फिक्स नहीं होता ।
● मंदिर में दर्शन के लिए आप बाहर से घी ले लें क्योंकि यहाँ घी लगाने और केदारेश्वर को टच करने का बहुत महत्व है दर्शन के पश्चात आप जो बाहर नन्दी जी विराजमान हैं उनके दर्शन करें और लगभग 15/30 मिनट वहाँ बैठे फ़ोटो/मोबाइल से दूर थोड़ी बाबा से भी तो बातें करना हैं न अपने को क्योंकि यहाँ (केदारनाथ) और महाकालेश्वर में जो एनर्जी है वो मैंने अभी तक कहीं महसूस नहीं कि तो मेरे कहने पर यहाँ बैठिएगा जरूर शांति से आँखे बंद करके कुछ समय ।
● गर्भगृह से दर्शन सुबह से दोपहर 12 बजे तक ही होते हैं उसके बाद बाहर से ही दर्शन होते हैं पूजा और VIP दर्शन के लिये आप मंदिर के पास से ही पास ले सकते हैं एक दिन पहले या कई बार तुरन्त भी ।
● इसके बाद मंदिर के पीछे भीम सिला है और शंकरचार्य जी की समाधि वहाँ भी दर्शन कर सकते हैं फिर उसके बाद आप लगभग मंदिर से 600 मीटर दूर भैरवनाथ जी के दर्शन भी कर सकते है ।
● यात्रा के दौरान पैसे कैश ही रखें क्योंकि कई बार नेट नहीं चलता तो चीज़ें दिक्कत करती हैं और आधारकार्ड भी साथ रखें कई बार जरूरत पड़ सकती है ।
● दर्शन के बाद शाम को सन्ध्या आरती भी देख सकते हैं वो लगभग 7 बजे होती है ।
● केदारनाथ जाने का सबसे सही समय पट खुलने से लेकर जून तक फिर सितंबर से पट बंद होने तक (बीच के समय बारिश होती है तो थोड़ा रिस्की होता है)
● यात्रा से आने के बाद आपको बार-बार लगेगा कि कब आएं दोबारा क्योंकि शिव जहाँ स्वर्ग वहाँ ।
● बाकी मर्यादाओं का ख्याल रखें ये पिकनिक स्थल नहीं है यह शिव की तपस्या की भूमि है 🙏🏻
जानकारी अच्छी लगी हो तो आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करें बाकी कुछ लगे तो पूछ सकते हैं ।
जय केदार..कृपा अपार 🙏🏻
#Kedarnath #KedarnathTrip
इस गाने के लिए कोई शब्द नहीं है दोस्तों.. मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं.. लता दीदी अद्भुत है.. सबसे सुंदर और दिल को छू लेने वाला गाना.. इस गाने के लिए कोई शब्द नहीं है दोस्तों.. बस इस गाने को सुनो और दिल से महसूस करो ❤️
समस्या यही है, अधिक पढ़-लिख लेने पर हमें सनातन धर्म और उनकी उन रीतियों में भी नुकसान दिखने लगता है, जिनका पालन करने से हमें फ़ायदा ही है।
सीधी सी बात है कि चंद्रग्रहण के दौरान पूजा-पाठ व ईश्वर की आराधना का विधान है, ताकि उन घंटों का सार्थक उपयोग हो। आज का विज्ञान भी कहता है कि सामान्य तापमान पर रखा भोजन 2 घंटे बाद बैक्टेरिया को आमंत्रित करने लगता है। सामूहिक रूप से एकत्रित होकर लोग 3-4 घंटे भजन करेंगे तो लौटकर उस भोजन को फेंक देना ही बेहतर है। प्राचीन काल में फ्रिज वगैरह भी नहीं होते थे।
आज जब 'लो-टेक फूड-सेफ्टी प्रोटोकॉल' की बात की जाती है तो हम ताली पीटते हैं, लेकिन कुछ खगोलीय घटनाओं के दौरान हमें यही सीख दी गई तो हम गाली दे रहे हैं। आज 'क्रोनो-न्यूट्रिशन' की बात होती है और रात के वक़्त कम भोजन करने को कहा जाता है, तो हम दूसरों को भी ज्ञान देते हैं कि ऐसा-ऐसा है। लेकिन, रात के समय चंद्रग्रहण के दौरान उपवास की बात हुई तो हमें अन्धविश्वास लगता है।
पहले कृत्रिम रोशनी नहीं होती थी, चंद्र-चक्र के हिसाब से न केवल व्यक्ति का रूटीन प्रभावित होता था बल्कि खाने-पीने की प्रक्रिया भी। चंद्रग्रहण पूर्णिमा की रात ही आता है, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रकाश की आदत होती है। ऐसे में अँधेरा छाएगा तो लोगों का रूटीन सरल रखने के लिए कुछ व्यवस्थाएँ बनाई गईं - उसमें भी हमें समस्या दिख रही है।
अब स्नान करके कपड़े बदलने कह दिया गया, इससे भी बड़ी समस्या है। कोविड विश्वमारी के दौरान यही लोग 'हाइजीन-हाइजीन' चिल्लाते नहीं थकते थे। आम लोग खगोलीय घटनाओं से चिंतित न हों और उनके भीतर अनिश्चितता का भाव न हो, इसीलिए उन्हें कहा गया कि ये चरण ख़त्म होने ही नहा-धोकर दूसरे कपड़े पहन लो। यानी, बात ख़त्म भाई, टेंशन ख़त्म। निश्चिंत हो जाओ। सब सामान्य हो जाता है इसके बाद। मनोविज्ञान भी विज्ञान ही है। 'सूतक' अनुशासन और शुद्धता के लिए ही होते हैं, इन्हें अंधविश्वास कह देना 'कूल' तो है लेकिन विज्ञान को बीच में क्यों लाना भाई?
भविष्य में और शोध बताएँगे कि चंद्र-चक्र में इस बदलाव से हमारे नींद, मूड, हॉर्मोन्स, मेटाबॉलिज्म पर क्या-क्या फ़र्क़ पड़ते हैं। ये एक ब्रह्मांडीय खौगोलिक घटना है, हमारे मनीषियों ने मानव शरीर, मन व वातावरण पर इसके प्रभाव का अवलोकन कर कुछ व्यवस्था बना दी, लेकिन हमको 'कूल' बनकर रीच की खेती करनी है।
Talibans have legalised wife beating but with out any bone fracture. If a wife goes to her parent place with out the husband’s permission , she will be jailed for three months . I beseech the Mufties and mullas
Of India to condemn it unconditionally because it all is being done in the name of their religion