आज 3 गाँवो में गए। वँहा बसपा का जो उत्साह देखा जा रहा है, पिछले क्यो सालों में नही था।।इस बार माहौल कुछ अलग है। क्योंकि अखिलेश के बस का भाजपा को रोकना नही है ओर 2014 से रोकने की जगह मोदी और योगी सरकार अखिलेश ने मुख्यमंत्री बनते बनवा दी, उंसके बाद रोक भी नही पाए, यह समझ मे आ गया है।।
अब अपना अधिकतर समय चुनावी माहौल में घूमने का ही रहेगा।
इसलिए यह लोगो के दिमाग मे आ गया है कि भाजपा को या तो बसपा रोक सकती है, नही तो बाकी के बस का नही है।
इस अवसर पर व्हाट्सअप पर Pay back to Society का जो ग्रुप बनाया है, उसमे से काफी बन्दे मिले। जिसमे इस इंतजार में है कि बसपा की सरकार बने और समाज का कुछ कल्याण हो सके।
जय भीम।।जय भारत। जय
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP
बसपा का जितना प्रचार एससी बहुजन युवा अपना नेट खर्च करके कर रहे है, उतने के लिए भाजपा कोंग्रेस सपा कम से के सैकड़ो करोड़ रुपया खर्च कर देते।
इसमे एससी समाज के लेखक, वीडीओ बनने वाले, यूटूबर्स का भी काफी योगदान है। जो अपने दम पर यह सभी कर रहे है।
बसपा व बहुजन मिशन के प्रति समर्पित इन सभी युवाओ को धन्यवाद।
लेकिन देखा जा रहा है कि बसपा के प्रत्याशी इन दलित युवाओ को प्रोत्साहन देने की जगह उन्हें प्रोत्साहन दे रहे है जिनकी रिच न तो एससी समाज मे है ओर न ही उन्हें बहुजन मिशन से कुछ लेना देना है।
इसलिए प्रत्याशियो को या तो किसी को प्रोत्साहन न दे, अगर दे रहे है तो उन एससी समाज के युवाओ को प्रोत्साहन दे जो बेचारे रैली के लिए 500 किलोमीटर से आकर एक होटल के कमरे में 5 से 7 रुकते है। इसलिए कम से कम इनके रहने और खाने की व्यवस्था जरुर करे।
इन्ही की बात एससी वर्गों में सुनी जाती है। किसी अन्य की नही।
जय भीम। जय भारत। जय बसपा।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP
बहन जी AC में क्यों बैठी हैं?
2000 के आसपास की बात है। उस समय मैं अपने गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। उस समय जब भी कहीं चुनाव होता था, तो साथ पढ़ने वाले यादव बच्चे बहन जी को "चमारिन", काली *&#, जैसी कई जातिसूचक गालियां देते थे।
बहन जी के पोस्टरों पर गंदे-गंदे इशारे किए जाते, उनका नाम मुलायम सिंह के साथ जोड़कर अश्लील और जातिसूचक गालियां दी जातीं। मेरा गांव में कई जाति के लोग रहते हैं। गांव में चाय की दूकान पर राजनीतिक चर्चा के नाम पर सभी गैर दलित समुदाय के सभ्य से सभ्य लोग चाय की चुस्कीयां लेते हुए बहन जी पर अपमानजनक टिप्पणियां करते और खूब ठहाके लगाते। ये वही लोग थे, जिन्हें हम सम्मान से चाचा, बाबा.. कहकर बुलाते थे। देश में PM इंदिरा गांधी सहित कई महिलाएं CM एवं बड़ी नेता रही हैं लेकिन कोई उन्हें गाली नहीं देता था। सिर्फ बहन जी से ही इतनी नफरत क्यों थी? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।
बुरा तो लगता था, लेकिन तब हम छोटे थे। उस समय मुझमें इतना भावबोध नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह हमारे समाज की नेता हैं। हमारे बाबा एक पुराना नीला झंडा लेकर बसपा की सभी मीटिंगों और रैलियों में जाते थे। गांव के कुछ बड़े लोग मान्यवर साहब और बहन जी के संघर्षों के बारे में बताते थे। बाबा अपने मिट्टी के घर पर बड़े गर्व से बसपा का झंडा लगाते थे। छोटी उम्र से ही हम सब उनका नाम सुनते ही एक खास अपनापन महसूस करते थे। जब गांव में बसपा का कोई नेता आने वाला होता, तो हम सब खुशी से नाचते हुए बहन जी के पोस्टर लगाया करते थे। रास्ते से साइकिल पर जाते हुए इन पोस्टरों को देखकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी ठहाके लगाकर मसखरी करते थे।
एक बार यादव समाज के लोगों ने गांव में होली मिलन समारोह रखा था। उसमें तूफानी सरोज भी आए थे। उनके सामने गायक ने मुलायम सिंह और बहन जी का नाम जोड़कर मंच से एक अभद्र गीत गाया, लेकिन तूफानी सरोज सुनकर मुस्कुराते रहे, जबकि वह स्वयं दलित हैं। आज उनकी बेटी प्रिया सरोज हमारे लोकसभा क्षेत्र मछलीशहर से सांसद हैं। गांव के दलितों ने जब इसका विरोध किया तो आयोजकों ने माफी मांगी और गायक से माइक बंद करवा दिया।
वहीं, 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तो लोगों के बोल बदल गए। प्रेम से नहीं, डर से। अब दलितों में स्वाभिमान आ गया था। गांव में जो लोग हमारे बुजुर्गों को "रे, बे, ते" कहकर और नाम बिगाड़कर बुलाते थे, वही लोग सम्मान से नाम लेने लगे। अब वही यादव समुदाय के लोग बात-बात पर हंसते हुए तंज कसते थे कि, "अरे भाई, अब तो आप लोगों की सरकार है।" हालांकि अब ऐसा सुनकर बहुत गर्व महसूस होता था। यह सिर्फ मेरे बचपन की कुछ बातें हैं जो मुझे याद हैं। छात्रजीवन और आज का अनुभव बताने के लिए पूरी किताब लिखनी होगी।
लेकिन यह सब मैं आपको क्यों बता रहा हूं? इसलिए कि आप समझ सकें कि बहन जी और बसपा ने समाज को दिया क्या है। जिस रीलबाजी और हवाबाजी को आप संघर्ष समझते हैं, अपने बाप-दादाओं का नहीं तो कम से कम अपने बचपन का दौर याद करो और सोचो कि बहन जी ने उस समय कितना संघर्ष किया होगा। नफरत का आलम यह था कि नन्हे-नन्हे बच्चे तक उन्हें जातिगत गालियां देते थे। यह वह दौर था, जब सोशल मीडिया छोड़िए, समाज के अधिकांश घरों में पुराना हैंडसेट भी नहीं था। तुम्हें बहन जी के AC से दिक्कत है, तो जरा ईमान से बताओ, क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी छप्पर और घास-फूस की झोपड़ी में रहते हैं? या फिर अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद के टाइप-8 बंगले में AC की जगह फर्राटा पंखा लगवाया है?
ऐसा नहीं है कि बसपा में कमियां नहीं हैं। बसपा में अनेक कमियां हैं। इन कमियों के बारे में हम खुलकर लिखते भी हैं। इसलिए कई बार बसपा समर्थक भी मेरे बारे में बहुत अभद्र भाषा लिखते हैं, लेकिन हम इग्नोर करते हैं। हालांकि मैं बसपा का सदस्य भी नहीं हूं, लेकिन बसपा हमारी पार्टी है। हमारा घर है। अतः इन कमियों को लेकर मैंने कई बार बसपा के कोऑर्डिनेटरों को आगाह भी किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बहन जी के त्याग को गाली दें और उनका अपमान करें। वह हमारी आदर्श हैं, गुरूर हैं, हिम्मत हैं और स्वाभिमान हैं।
बसपा की गलती बस इतनी है कि उसकी कोई IT सेल नहीं है। पदाधिकारियों का मानो सोशल मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा है। बसपा आज AI के युग में भी 90 के दशक में जी रही है। जिस दिन पार्टी और उसके पदाधिकारी सोशल मीडिया का महत्व समझ जाएंगे और युवाओं से डायरेक्ट संपर्क बना लेंगे, उस दिन सारा पासा पलट जाएगा। उम्मीद है कि बहन जी एक दिन इस पर संज्ञान अवश्य लेंगी। बाकी बहन जी पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग या तो अबोध हैं या फिर मूर्ख। जिस दिन कभी शांति से बैठकर आत्मचिंतन करेंगे, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
- सूरज कुमार बौद्ध
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का दौर चल रहा है। चूँकि केवल बसपा ही अनुसुचित जातीयो, अति पिछड़ी जातीयो, अल्पसंख्यक को सुरक्षा, सम्मान, रोजगार दे सकती है। जो की बाबा साहब व मान्यवर कांशीराम साहब के आदर्शों पर आधारित है।।
इसलिए;
1.व्हाट्सएप्प के माध्यम से
https://t.co/NeU4hPo8Po back to सोसाइटी कार्यक्रमो में बसपा के महत्व
3.फेसबुक/ट्विट्टर के माध्यम से
जितना ज्यादा प्रचार हो सके। करना चाहिए।। में ज्यादा से ज्यादा लोगो को व्हाट्सएप्प के माध्यम से जोड़ रहा हूँ, जिससे प्रचार और तीव्र गति से हो सके।।
सबसे मुख्य;
"हमने Pay back to सोसाइटी के कार्यक्रमो में दो से तीन गुना इजाफा कर दिया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा को समझाया जा सके। ज्यादा की मदद करने की कोशिस की जा रही है। जिससे वो 50 जानकार को बताएगा तो आंबेडकरवादी आंदोलन का प्रचार व बहुजन मिशन के महत्व का प्रसार हो सकेगा।
Pay back to Society के कार्यक्रम में सिर्फ एक बात में कहता हूं कि;
"बसपा का शासन आ गया तो ऐसे कार्यक्रमो की जरूरत भी नही पड़ेगी। जीरो शुल्क से एससी की सभी जातिया यथा बाल्मीकि, धोबी, पासी, जाटव, खटीक, कोरी, से लेकर तमाम 68 जातीयो को लाभ हुआ है। इसमे कोई यह भी अफवाह का शिकार नही हो सकता कि हमारा हक खाया जा रहा है।"
1.जीरो फीस वाली शीट पर एडमिशन होंगे।
2.स्कॉलरशिप सही समय पर आएगी।
3.स्किल/प्रोफेशनल आधारित शिक्षा पर ज्यादा फोकस दिया जायेगा।
4.रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
5.2012 के बाद जो बैकलॉग बन गया है। उसमे एससी/एसटी/ओबीसी के पद भरे जाएंगे।।
6.सरकारी ठेकों में आरक्षण मिलेगा। जिससे एससी/अत्यंत ओबीसी जातीयो व वर्ग से भी ठेकेदार निकलेंगे।
जब जीरो शीट एडमिशन होगा तब एससी वर्ग से एक बड़ा तबका प्राइवेट सेक्टर के लिए भी तैयार होगा, जैसे 2007 से 2012 के बीच जीरो शुल्क होने के कारण गरीब एससी ने प्रोफेशनल आधारित उच्च शिक्षा ली और लाखों प्राइवेट सेक्टर तक मे लाखो सैलरी ले रहे है, जिनके घर पर लकड़ी के दरवाजे तक टूटे हुए होते थे। मकान जर्जर था। आज आलीशान घर मे रह रहे है। 2012 के बाद यह प्रगति रुक गयी क्योंकि ऊपर जो क्रम 1 से 6 में योजनाएं है, उनपर 2014 के बाद अखिलेश ने रोक लगा दी।।
यह एससी के वर्गों को लाभ पहुचाती है। इतना ध्यान रखना चाहिए।। जिसे doubt है वो स्वयं रिसर्च कर ले कि 2007 से 12 में उनके गरीब से गरीब समाज के बच्चे ज्यादा उच्च शिक्षा लिए या बाद में।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp@bspindia
नई दिल्ली में मैनहोल की।सफाई के दौरान 3 युवकों की जहरीली गैस से मौत हो गयी।
कल बसपा का प्रतिनिधिमंडल उनके घर गया। जिसमें राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम व प्रभारी श्री सुदेश कुमार आर्या व अन्य थे।
बेचारों के परिवार की दयनीय स्तिथी देखकर प्रतिनिधिमंडल के आंखों में आँसू आ गए। किसी का 8 माह का, 2.5 साल का व किसी का 10 साल का बच्चा है।
सफाई कर्मियों को अब मैनहोल में कार्य बन्द कर देना चाहिए। जब विशेष मशीनें आ रही है तब उनसे सरकार को सफाई करवानी चाहिए।
बसपा का प्रतिनिधिमंडल हर जगह जाता है। लेकिन पहले ही चेतावनी, भीड़ इकट्ठी करके या मीडिया लेकर नही जाता है।
उद्देश्य = पीड़ित को एहसास करवाना की उनके साथ समाज है। इसके अलावा प्रशासन पर दवाब डालना जिससे आर्थिक सहायता मिल सके।।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp@KumarSudeshArya
मुस्लिम पत्रकार रोमाना ने राम मंदिर पर सवाल पूछा तो विनोद बंसल मस्जिद को बीच में लाने लगे।
चंदा चोरों का जबरदस्त इलाज हो रहा है। जो खुद को चौकीदार बताते थे वह साले चोर निकले
मै कक्षा 12 की छात्रा हु UP ki ,कोई व्यक्ति मेरे पास call और massage कर के मुझे बहुत परेशान कर रहा है मना करने के बाद भी बार२ कर रहा है उसका mobil no-9302616713 है, राहुल नाम बता रहा है, पुलिस से निवेदन है समझ दे मेरे पास कॉल न करे
@Uppolice@CMHelpline1076@w
पासपोर्ट विवाद में यह तो पता चला कि नागरिकता प्रमाणपत्र ज़िलाधिकारी के कार्यालय में बनता है। विदेशी लोगों का प्रमाणपत्र गृहमंत्रालय के अण्डर सेक्रेटरी के यहाँ से जारी होता है, ज़िलाधिकारी शपथ दिलाता है।
@nitinmeshram_ ने अपना नागरिकता प्रमाणपत्र मे 2002 में ही अपने DM बनवाया था
दलित के घर में लगाई आग। 😡
यूपी के पीलीभीत में जातिवादी दंभ से ग्रसित भानुप्रताप और उसके परिजनों ने दलित परिवार के घर में आग लगा दी है। घर में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया।
अत्यंत भयावह! गुंडों पर NSA के तहत कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार के एक लड़के पर हमला भी किया गया है।
नीट का exam फिर से हो गया। एडमिशन भी हो जाएगा। लेकिन अनुसुचित जाति के संगठनों से एक प्रश्न है कि उन्होंने इस बात पर कितना ध्यान दिया कि;
"बहन कुमारी मायावती जी ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से जो चार मेडिकल कॉलेज सहरानपुर, जालौन, अम्बेडकरनगर, कन्नौज में बनाये थे, उनमे एडमिशन बहनजी द्वारा दी गयी व्यवस्था से होंगे या फिर आर्टिकल 30 में विशेष आरक्षण प्राप्त साबरा अहमद व उनके यादव वकील द्वारा हाईकोर्ट से रद्द करवाए अनुसार होगा?"
1.इन चारों मेडकिल कॉलेज में 340 के लगभग शीट है।
2.बहनजी ने मुस्लिम के आर्टिकल 30 में मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी प्रकार के अल्पसंख्यक संस्थान में अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित 50% शीट की तर्ज पर इन चारों संस्थान में 70% सीट एससी व 20 शीट एसटी के लिए लिए आरक्षित करी थी। जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया ओर राज्य सरकार ने स्वीकार करके 70% से सीधा 21% पर ला दिया। जब हम लोगो ने विरोध किया तब इस साल की छूट देकर सुप्रीम कोर्ट जाने की जानकारी दी।।
3.बहनजी के अनुसार एडमिशन पर =
एससी = 248 शीट
एसटी = 20 शीट
ओबीसी = 44 शीट
सामान्य = 20 शीट
4.साबरा अहमद व यादव वकील की पिटीशन पर निर्णय के बाद स्तिथी यह है कि;
एससी = 340 का 21% = 68 शीट
अथार्त नुकसान है;
248-68 = 180 शीट का है।
5.आप समझ सकते है कि मेडिकल की एक एक शीट कितनी कीमती होती है।।अनुसुचित जाति के 180 डॉक्टर कम बनेंगे।
इंहा ध्यान देने वाली बात है कि यह मेडिकल कॉलेज अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से बने थे। जिसमे एससी से अलग ओबीसी, एसटी, सामान्य तक को शीट दी गयी। इसलिए इसके लिए राज्य सरकार से कोई विशेष फंड नही allot हुआ जिससे साबरा अहमद या अन्य को दिक्कत होती।
6.अब बहनजी ने सत्ता में रहते एससी के लिए कार्य कर दिया। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी एससी समाज व उनके संगठनों की है। एससी के अधिकतर सन्गठन ऐसे मामलों पर गायब मिलते है। इंहा तक कि;
"चन्द्रशेखर से लेकर चिराग पासवान व अन्य अम्बेडकर के नाम पर सभा/महासभा वाले दलित नेता तक इसपर कोई बयान देते नही दिखते"
7.अब नीट में एडमिशन होने वाला है। इन 4 संस्थान में किस प्रकार एडमिशन होंगे यह पूछने वाला कोई नही है?
मजेदार बात यह है कि;
"अधिकतर अपने घर मौज मस्ती करते हुए मुझे कहते है कि आप क्यो नही रिट दाखिल करते। जबकिं यह मामला मेने ही वायरल किया, जिसके कारण राज्य सरकार को डबल बैंच से आदेश पर रोक लगवाकर 1 साल की छूट दिलवाई गयी व असीम अरुण ने बताया कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रहे है। नही तो मामला ही सामने नही आ पाता। अब;
"घर बेचकर इसी काम मे लगा दूँ क्या। मतलब मेने इतना बड़ा नुकसान बताया तो यह मेरी ही जिम्मेदारी है कि इसे में ही देखूं"
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए या नही। अगर गए तो निर्णय तक किस प्रकार एडमिशन होंगे, इसकी किसी को जानकारी नही है"
विकास कुमार जाटव
सहारनपुर देहात विधानसभा पर मुकाबला रोचक होने जा रहा हैं जिले का सियासी पारा चढ़ चुका हैं
अखिलेश यादव के खास विधायक आशु मलिक के लिए इमरान मसूद नहीं बल्कि बसपा के संभावित उम्मीदवार फिरोज आफताब कड़ी चुनौती बन गए हैं आइए बताते हैं कैसे
फिरोज आफताब गाढ़ा जाती से आते इस जाति के पास राजनीतिक प्रतिविधित्व के नाम पर कुछ नहीं हैं जबकि सहारनपुर जिले में इनकी आबादी 3.5 लाख हैं और देहात विधानसभा मे 40 हजार।
देहात विधानसभा में 90 हजार दलित और 1 लाख 30 हजार मुस्लिम वोटर हैं
आशु मलिक का बाहरी होना और इस बार इमरान का उनके खिलाफ होना चुनाव पर काफी असर डाल सकता हैं।
फिरोज आफताब एक बेहतरीन वक्ता हैं वो लगातार सहारनपुर देहात मे मुसलमानो के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अगले एक महीने में सहारनपुर जिले की सियासत काफी बदलने वाली हैं।
बसपा एक पार्टी से ज्यादा विचारधारा है। ऐसी विचारधारा, जिसमे राजनैतिक परिणाम ज्यादा फर्क नही डालते। स्वयं देख लीजिए;
"जो लोग कहते थे हम नही जानते किसी शाहू वाहू को वो तक कुर्मी जाति से आने वाले मराठा महाराज के जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी रहे है"
प्रश्न: यह किसकी जीत है?
उत्तर : बहुजन विचारधारा की
विकास कुमार जाटव